कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता टीएस सिंहदेव को छत्तीसगढ़ का डिप्टी सीएम बना दिया है. सीएम भूपेश बघेल ने उनकी नियुक्ति की सराहना की. उन्होंने ट्वीट किया,'डिप्टी सीएम के रूप में जिम्मेदारी मिलने पर महाराज साहब को बधाई और शुभकामनाएं.' हालांकि चर्चा है कि सिंहदेव की सीएम बघेल के साथ जारी खींचतान को खत्म करने, प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी कलह रोकने और साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने यह कदम उठाया है. हालांकि कांग्रेस के इस फैसले पर बीजेपी ने तंज कहा है. पूर्व सीएम और बीजेपी के वरिष्ठ नेता रमन सिंह ने ट्वीट किया,'जब डूबने लगी कश्ती तो कप्तान ने कुछ किया, सौंप दी है पटवार आधे दूसरे के हाथ में. महाराज जी को बचे हुए 4 महीनों के लिए बधाई.'
आइए यह समझते हैं कि कांग्रेस को चुनाव से कुछ महीने पहले टीएस सिंहदेव को मनाने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या वजह है कि तीखे तेवर अख्तियार करने के बाद भी कांग्रेस सिंहदेव को नजरअंदाज नहीं कर पाई?
दिल्ली में बुधवार रात जारी पार्टी के एक बयान में कहा गया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सिंहदेव (70) को डिप्टी सीएम नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. यह निर्णय छत्तीसगढ़ के शीर्ष कांग्रेस नेताओं द्वारा दिन में नई दिल्ली में आयोजित बैठक में छत्तीसगढ़ में पार्टी की रणनीति और चुनाव तैयारियों पर चर्चा के बाद आया. इस बैठक में अध्यक्ष खड़गे के अलावा पूर्व पार्टी प्रमुख राहुल गांधी, छत्तीसगढ़ के सीएम बघेल, राज्य की पार्टी प्रभारी कुमारी शैलजा और महासचिव केसी वेणुगोपाल शामिल थे.
अंबिकापुर के विधायक टीएस सिंहदेव कांग्रेस के प्रमुख नेता हैं. छत्तीसगढ़ के उत्तरी हिस्से सरगुजा में उनकी मजबूत पकड़ है. इतना ही नहीं सरगुजा शाही परिवार के वंशज सिंहदेव पार्टी में आलाकमान के भरोसेमंद भी हैं.
सिंहदेव का 6 जिले से बने सरगुजा संभाग की 14 सीटों पर सीधे असर माना जाता है. इस संभाग को छत्तीसगढ़ के सत्ता की चाबी भी कहा जाता है. यही वजह है कि 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने इन्हीं सीटों पर बड़े वोटों के अंतर से अपनी जीत दर्ज कराई थी, इसलिए सभी दलों की नजर सरगुजा संभाग पर रहती है.
कांग्रेस ने टीएस सिंहदेव को डिप्टी सीएम बनाने का फैसला यूं ही नहीं ले लिया. दरअसल 13 जून को सिंहदेव ने अंबिकापुर में कांग्रेस के संभागीय सम्मेलन में यह बयान दिया था कि दिल्ली में उन्होंने बीजेपी के केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की थी. उन्हें बीजेपी में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया है, लेकिन वह बीजेपी में नहीं शामिल होंगे. उनके इस बयान के बाद यह अटकलें लगने लगी थीं कि वह कांग्रेस छोड़ सकते हैं. अगर वह चुनाव से पहले पार्टी बदल लेते तो कांग्रेस को इसका भारी नुकसान उठाना पकड़ सकता था.
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक आर कृष्ण दास ने पीटीआई से कहा कि कांग्रेस ने यह निर्णय राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर मतभेदों को दूर करने के लिए उठाया है. हालांकि उसे यह फैसला विधानसभा चुनाव से काफी पहले लेना चाहिए था. इस समय इस तरह का निर्णय पार्टी पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है.
भूपेश बघेल और सिंहदेव के बीच 2021 में मतभेद तब खुलकर सामने आ गए थे, जब अटकलें लगाई जा रही थीं कि 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद सीएम पद साझा किया जाएगा. 15 साल के बाद दिसंबर 2018 में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद से छत्तीसगढ़ के राजनीतिक हलकों में सीएम पद ढाई-ढाई साल के लिए साझा करने के फॉर्मूले की चर्चा थी. तब बघेल और उनके दो वरिष्ठ कैबिनेट सहयोगी- सिंहदेव और ताम्रध्वज साहू शीर्ष पद के लिए प्रमुख दावेदार थे, लेकिन बात नहीं बनी. इसके बाद सिंह देव ने जुलाई 2022 में यह कहते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय से इस्तीफा दे दिया कि उन्हें सरकार में दरकिनार कर दिया गया है. हालांकि वह अभी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण समेत चार विभाग संभाल रहे हैं.
- टीएस सिंहदेव तीन बार से विधायक चुने जा रहे हैं. सिंहदेव 2008 में सरगुजा निर्वाचन क्षेत्र से पहली बार विधायक चुने गए थे. उन्होंने यह चुनाव 980 मतों के मामूली अंतर से जीता था. यह सीट पहले एसटी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित थी. 2008 में परिसीमन के बाद यह सामान्य सीट बन गई थी, जो 2013 तक बरकरार रही.
- 2013 में वह दूसरा चुनाव 19400 वोटों के अंतर से जीते थे. इसके बाद 2018 में अपना तीसरा चुनाव में करीब 40 हजार वोटों के अंतर से जीता था. बघेल सरकार में उन्हें स्वास्थ्य, वाणिज्यकर, पंचायत व ग्रामीण मंत्री बनाया गया.
टीएस सिंहदेव को 2013 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद विधायक दल का नेता बनाया गया था. तभी से सिंहदेव ने 2018 में पार्टी को सत्ता में लाने के प्रयास किए. 2018 विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के घोषणापत्र का मसौदा तैयार करने का प्रभार दिया गया था. इसके बाद इन्होंने राज्य भर में यात्रा की और चुनाव पूर्व दस्तावेज तैयार करने से पहले समाज के हर वर्ग से परामर्श किया. कांग्रेस के घोषणापत्र में विशेष रूप से किसानों के लिए किए गए वादों के कारण 2018 के चुनाव में कांग्रेस की शानदार जीत हुई.
सिंहदेव का जन्म 31 अक्टूबर 1952 को प्रयागराज (पूर्व में इलाहाबाद) में हुआ था. उनके पिता स्वर्गीय एमएस सिंहदेव, एक आईएएस अधिकारी थे. वह संयुक्त मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे. बाद में वह योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे. उनकी मां देवेंद्र कुमारी सिंहदेव मध्यप्रदेश में दो बार मंत्री रहीं.
टीएस सिंहदेव ने ग्वालियर के सिंधिया स्कूल से पढ़ाई की. इसके बाद नई दिल्ली के हिंदू कॉलेज से इतिहास में ग्रेजुएशन किया. इसके बाद उन्होंने भोपाल के हमीदिया कॉलेज से पोस्ट-ग्रेजुएशन किया.
परिषद अध्यक्ष के तौर की शुरू की राजनीति
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिंहदेव का राजनीतिक करियर अंबिकापुर नगर परिषद से शुरू हुआ था. वह 1983-88 और 1995-99 के दौरान दो बार नगर परिषद के अध्यक्ष रहे. फिलहाल वह त्रिभुवनेश्वर शरण सिंहदेव यानी टीएस सिंहदेव सबसे अमीर विधायक हैं. उनके पास करीब 514 करोड़ रुपये की संपत्ति है. वह सरगुजा राजघराने के 118वें राजा हैं.