बंद कमरे में एक मासूम चीख रही थी, दर्द से बिलबिला रही थी और उसे इस हाल में पहुंचानेवाले उसकी हर चीख पर उसे एक नया जख्म दे रहे थे. गांधीनगर के बंद कमरे के वहशत की ये कहानी जब आम हुई तो फिर लोग अपने गुस्से पर काबू नहीं रख सके क्योंकि मासूम गुड़िया का ये दर्द अब हर हिंदुस्तानी का दर्द बन चुका था.
आख़िर क्या वजह है इस गुस्से की? जवाब सीधा सा है, उन्हें गांधीनगर की गुड़िया में अपनी बेटी, बहन, भांजी या फिर किसी भी दूसरी फूल सी बच्ची का अक्स नज़र आता है और ऐसे में गुस्से पर काबू मुश्किल है.
वैसे तो गुड़िया की कहानी जब पहले ही दिन दुनिया के सामने आई, तो दरिंदों की करतूत जानकर हर कोई सन्न रह गया, लेकिन अब जैसे-जैसे गुड़िया का गुनहगार अपना मुंह कोल रहा है, हैवानियत की तस्वीर और भयानक होती जा रही है और लोगों का दर्द भी बढ़ता जा रहा है. गुड़िया से बलात्कार के इल्ज़ाम में गिरफ्तार 22 साल के मनोज ने पुलिस की हिरासत में जो कहानी बयान की है, उसे सुनकर किसी के भी रौंगटे खड़े जाएंगे.
पुलिस की मानें तो आरोपी मनोज ने पुलिस को बताया है कि 15 अप्रैल की शाम करीब पांच बजे, उसने पहले अपने एक दोस्त के साथ अपने ही कमरे में पार्टी की और फिर जाम छलकाए. इस दौरान ने दोनों ने मोबाइल पर ब्लू फ़िल्म देखी और फिर इसके बाद किसी के साथ ज़्यादती के इरादे से कमरे से बाहर निकल गए.
गुड़िया की बदकिस्मती ये रही कि वो ठीक उसी वक़्त खेलने के लिए अपने घर से बाहर निकली थी. मनोज और उसके दोस्त ने बहला-फुसला कर उसे अपने पास बुला लिया और फिर कमरे में लाकर उसके साथ ज़्यादती की.
पुलिस की मानें तो इस दौरान जब गुड़िया ने दोनों के चंगुल से छूटने के लिए छटपटना शुरू किया, तो दोनों ने ना सिर्फ़ उसके हाथ-पैर बांध दिए, बल्कि उसके साथ मारपीट भी की और हद तो तब हो गई, जब इतना सब कुछ होने के बाद दोनों ने उसके जिस्म में मोमबत्ती और शीशी जैसी चीज़ें डाल दीं. मासूम गुड़िया तड़पती रही और दोनों को उसकी चीख़ों में मज़ा आता रहा.
अब पुलिस ने गिरफ्तार मनोज से पूछताछ के बाद उसके मोबाइल फ़ोन से दर्जन भर से ज़्यादा अश्लील फ़िल्मों के क्लिप बरामद किए हैं जबकि दूसरी तरफ आरोपी मनोज का डीएनए सैंपल भी लिया गया है, ताकि गुड़िया के साथ ज़्यादती के इस मामले में अदालत के सामने पुख्ता सुबूत पेश किया जा सके.