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सरकार का फैसला, दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विवि से जुड़ेंगी 13 सरकारी संस्थाएं 

केजरीवाल सरकार ने फैसला लिया है कि दिल्ली के सभी 10 सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों को दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय के अंतर्गत लाया जाएगा. सरकार का मानना है कि इस फैसले से दिल्ली के स्टूडेंट्स में स्किल विकसित करने में मदद मिलेगी.

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दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया (फाइल फोटो)
दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • युवाओं के लिए बढ़ेंगी रोजगार की संभावनाएं
  • पुष्प विहार में शुरू होगा नया वर्ल्ड क्लास स्किल सेंटर

दिल्ली सरकार ने 10 पॉलिटेक्निक संस्थानों सहित 13 सरकारी संस्थाओं का दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय में विलय करने का फैसला लिया है. सरकार का मानना है कि इस फैसले से दिल्ली के स्टूडेंट्स में स्किल विकसित करने में मदद मिलेगी. 10 पॉलिटेक्निक संस्थानों के अलावा दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ टूल इंजीनियरिंग के वजीरपुर और ओखला कैंपस और जीवी पंत इंजीनियरिंग कॉलेज को भी दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय के साथ जोड़ा जाएगा.

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उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के मुताबिक दिल्ली सरकार अपने स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए नौकरी के अवसरों का विस्तार करना चाहती है. उन्होंने कहा कि संस्थाओं के विलय का मकसद स्किलिंग इकोसिस्टम को अधिक कुशल बनाना और युवाओं की रोजगार संभावनाओं को बढ़ाना है. साथ ही दिल्ली सरकार ने फैसला किया है कि कॉलेज ऑफ आर्ट्स को 'स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स' और दिल्ली विरासत अनुसंधान एवं प्रबंधन संस्थान को स्कूल ऑफ हेरिटेज रिसर्च एंड मैनेजमेंट' के रूप में डॉ. बीआर अम्बेडकर विश्वविद्यालय में शामिल किया जाएगा.

इसके अलावा दिल्ली सरकार, दिल्ली फार्मास्यूटिकल साइंस एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी, पुष्प विहार में एक नए वर्ल्ड क्लास स्किल सेंटर की शुरुआत करने जा रही है.  इस नए वर्ल्ड क्लास स्किल सेंटर के भवन निर्माण के लिए दिल्ली सरकार ने 9.90 करोड़ रुपये भी जारी किए हैं. बता दें कि दिल्ली सरकार ने पूरी दिल्ली में 25 वर्ल्ड क्लास स्किल सेंटर बनाने का ऐलान किया था. 

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दिल्ली कैबिनेट ने अभिलेखागार में भवनों के निर्माण और विकास के लिए 50 करोड़ रुपये के फंड को मंजूरी दी है. बता दें कि 2020 में उपमुख्यमंत्री मनीष मनीष सिसोदिया ने सांस्कृतिक परिसर 'कला कुंज' की आधारशिला रखी थी. इसका उद्देश्य दिल्ली के नागरिकों को एक ऐसा मंच प्रदान करना है, जहां वे डिजिटल रूप में ऐतिहासिक दस्तावेजों को देख सकें और संस्कृति कार्यक्रमों में भाग ले सकें.सरकार ने सीड मनी के रूप में दिल्ली पर्यटन परिवहन विकास निगम को दिल्ली अभिलेखागार विभाग के साथ काम्प्लेक्स के निर्माण के लिए 3 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि देने को मंजूरी भी दी है.

दिल्ली कैबिनेट द्वारा दिल्ली अभिलेखागार विभाग को कोरोना काल के दौरान में हुए नुकसान और अभिलेखों के रखरखाव के लिए दिल्ली सरकार द्वारा 1.32 करोड़ की राशि जारी करने का प्रस्ताव रखा गया था, जिसे कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान कर दी है. दिल्ली अभिलेखागार विभाग में दिल्ली सरकार के अलग-अलग विभागों के करीब 10 करोड़ पन्नों के अभिलेखों का रखरखाव किया जाता है.

 

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