दिल्ली की एक अदालत ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के उस मामले में बुधवार को सुनवाई पूरी कर ली जिसमें कांग्रेस नेता सज्जन कुमार और पांच अन्य आरोपी हैं. अदालत इस प्रकरण में फैसला बाद में सुनायेगी.
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जिला न्यायाधीश जेआर आर्यन ने इस मामले में अंतिम दलीलों के पूरा होने के बाद इस विषय पर स्पष्टीकरण के लिए 16 अप्रैल की तारीख मुकर्रर की है. सीबीआई या छह आरोपी यदि चाहे तो उस दिन कोई स्पष्टीकरण दे सकते हैं.
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न्यायाधीश ने कहा, ‘फैसला सुरक्षित रखा जाता है. यदि कोई स्पष्टीकरण हो, तो 16 अप्रैल को दिया जा सकेगा.’
सीबीआई के वकील डीपी सिंह ने अंतिम दलील देते हुए कहा कि घटना के वक्त प्रत्येक गवाह ने जो कुछ देखा था, अभियोजन ने खुद को वहीं तक सीमित रखा है. उन्होंने कहा कि गवाहों ने दंगों के दौरान जो कुछ देखा था उसे सच-सच बताया.
उन्होंने आरोप लगाया कि उन सभी शिकायतों में जहां कुमार का नाम सामने आया, उसे पुलिस रिकॉर्ड से फौरन हटा दिया गया था.
बहस के दौरान कुमार के वकील आईयू खान ने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता जगदीश कौर सहित गवाहों के बयानों में विरोधाभास हैं.
खान ने कहा कि कौर ने अपने किसी हलफनामे में कहीं भी कुमार का नाम नहीं लिया था. ये हलफनामे विभिन्न न्यायिक आयोगों में दाखिल किए गए थे, जिनका गठन दंगों से जुड़े मामलों की जांच के लिए किया गया था.
उन्होंने दलील दी, ‘जब कौर अपना बयान दर्ज कराने के लिए 2010 में अदालत में पेश हुई उस वक्त उन्होंने पहली बार सज्जन कुमार का नाम लेकर हमें चौंका दिया था और कहा कि रिकॉर्ड में कुछ चीज नहीं है.’
गौरतलब है कि दिल्ली छावनी इलाके में कथित तौर पर भीड़ को उकसाने को लेकर सज्जन कुमार के साथ ही बलवान खोक्कर, किशन खोक्कर, महेन्द्र यादव, गिरधारी लाल और कैप्टन भागमल मुकदमे का सामना कर रहे हैं.
यह मामला सिख विरोधी दंगों का है जो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 31 अक्तूबर 1984 को हत्या के बाद भड़का था.