आम आदमी पार्टी लोकसभा चुनाव से पहले अपने हर मोर्चे को मजबूत करने में लगी है. दिल्ली विधानसभा चुनाव में ऑटो वालों ने केजरीवाल को विधानसभा पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी. जिसके चलते लोकसभा चुनाव से पहले आप पार्टी को एक बार फिर से ऑटो वाले और ई-रिक्शा वालों को याद आने लगी है.
2015 के विधानसभा चुनाव के दौरान ऑटो के पीछे केजरीवाल बनाम शीला के पोस्टरों की याद भले ही अभी लोगों के जेहन से धुंधली पड़ रही हो. तीन साल पहले आप पार्टी के विधानसभा में पहुंचने के बाद ऑटो वालों को भूलने लगी थी. लेकिन अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर से आप को ऑटो वालों की याद आने लगी. आखिर पोस्टर तो इनके पीछे ही लगाने हैं. शायद यही वजह है पार्टी ऑफिस में ऑटो वालों को बुलाकर एक नया विंग बना कर इनको पार्टी से जोड़ने की कोशिश की जा रही है.
हर राजनीतिक दलों ने हक दिलाने का वादा किया
इससे पहले जब दिल्ली में कांग्रेस की सरकार थी उस समय दिल्ली वालों को बस स्टेशन और मेट्रो स्टेशन तक पहुंचाने के मकसद से शीला सरकार ने गलियों को सड़कों से जोड़ने के लिए ई-रिक्शा की शुरुआत की थी. ई- रिक्शा की शुरुआत करने में कई कानूनी अड़चनें भी आईं. कोर्ट की दखलअंदाजी के बाद ही ई-रिक्शा की बैटरी चार्ज हो सकी. ई-रिक्शा वालों को हर राजनीतिक दलों ने हक दिलाने का वादा किया पर आप पार्टी ने एक नया विंग बना कर इनको भी राजनीति के रंग में रंग दिया है.
ई-रिक्शे के सहारे चुनाव का सफर तय करने की फिराक
आप आदमी पार्टी भले ही ऑटो और ई-रिक्शे के सहारे चुनाव का सफर तय करने की फिराक में हो पर ऑटो विंग और ई-रिक्शा विंग वालों के पार्टी से मतभेद अभी से दिखने लगे हैं. ऐसा न हो कि ऑटो वाले मंजिल से पहुंचने से पहले कहीं और मुड़ जाएं और पार्टी बीच सड़क पर ही रह जाये.आप आदमी पार्टी ऑटो और ई-रिक्शे के सहारे चुनाव का सफर तय करने की फिराक में है. वह इनके सहारे लोकसभा चुनाव की वैतरणी पार करने की फिराक में है. इसके लिए 'आप' ने ऑटो और ई-रिक्शा वालों का एक नया विंग बना दिया है.