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दिल्ली में पावर वॉर पर अब विधेयक की बारी, राज्यसभा में किन समीकरणों से AAP को उम्मीद

दिल्ली में पावर वॉर को लेकर सरकार 31 जुलाई को बिल लाएगी. संसद के चालू मानसून सत्र में पेश किए जाने वाले इस बिल को राज्यसभा में गिराने की उम्मीद आम आदमी पार्टी ने किन समीकरणों के भरोसे पाल रखी है?

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अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो)
अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो)

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद कहा था- वे सभी विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिश में लगे हैं. अगर सभी विपक्षी दल एकजुट हो गए तो हम दिल्ली में ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर अध्यादेश पर केंद्र सरकार बिल लेकर आती है तो हम उसे हरा सकते हैं.

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केजरीवाल का ये बयान तब आया था जब विपक्षी एकजुटता की कवायद चल रही थी लेकिन तब तक कोई मीटिंग तक नहीं हुई थी. अब विपक्षी एकजुटता गठबंधन का रूप ले चुकी है और वह घड़ी भी आ चुकी है जिसकी केजरीवाल ने बात की थी. केंद्र सरकार दिल्ली में ट्रांसफर-पोस्टिंग के अधिकार से जुड़ा बिल लाने की तैयारी में है. इस बिल को कैबिनेट से हरी झंडी मिल चुकी है.

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अब दिल्ली की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी के सामने इस बिल को रोकने की चुनौती आ खड़ी हुई है जिसके लिए अरविंद केजरीवाल ने मुंबई से हैदराबाद तक एक कर दिया था. लोकसभा में अकेले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के ही 300 से अधिक सांसद हैं जो बहुमत के लिए जरूरी 273 से कहीं अधिक हैं. ऐसे में, निचले सदन यानी लोकसभा में इस बिल की राह में कोई रोड़ा नजर नहीं आता.

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अरविंद केजरीवाल भी इसे बखूबी समझ रहे हैं. केजरीवाल, आम आदमी पार्टी को उम्मीद राज्यसभा से है. अब अहम सवाल ये है कि दिल्ली में पावर वॉर को लेकर विधेयक पर आम आदमी पार्टी को आखिर राज्यसभा में किन समीकरणों से उम्मीद है?

NDA राज्यसभा में बहुमत के आंकड़े से पीछे

आम आदमी पार्टी की राज्यसभा से जुड़ी उम्मीदों के पीछे सबसे बड़ा कारण है उच्च सदन का नंबर गेम. बीजेपी जहां लोकसभा में अकेले ही बहुमत के आंकड़े से कहीं आगे है तो वहीं राज्यसभा में एनडीए का संख्याबल भी जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंच पा रहा. राज्यसभा में बीजेपी 92 सदस्यों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है. एआईएडीएमके के चार सांसद हैं. एनडीए के अन्य घटक दलों असम गण परिषद, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए), तमिल मनीला कांग्रेस (एम), मिजो नेशनल फ्रंट, नेशनल पीपुल्स पार्टी, पीएमके के एक-एक सांसद हैं.

एनसीपी के भी राज्यसभा में तीन सांसद हैं. एनसीपी के राज्यसभा सांसद प्रफुल्ल पटेल एनडीए में शामिल अजित पवार गुट के साथ हैं लेकिन बाकी के दो सांसद किस तरफ हैं, इसे लेकर तस्वीर साफ नहीं है. अगर ये मान लें कि एनसीपी के सभी तीनों राज्यसभा सदस्य अजित के साथ हैं तो एनडीए का संख्याबल 105 तक पहुंचता है. राज्यसभा में पांच नॉमिनेटेड सदस्य हैं. इनको भी जोड़ लें तो भी कुल संख्याबल 110 पहुंचता है जो इस समय 238 सदस्यों वाली राज्यसभा में बहुमत के लिए जरूरी 120 के आंकड़े से 10 कम है.

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I.N.D.I.A. के पास भी संख्याबल नहीं

नंबर गेम की बात करें तो विपक्षी इंडियन नेशनल डेमोक्रेटिक इंक्लूसिव अलायंस के पास भी इतना संख्याबल नहीं है कि बिल को गिरा सके. राज्यसभा में इस समय कांग्रेस 31 सदस्यों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है. तृणमूल कांग्रेस के 13, आम आदमी पार्टी के 10, डीएमके के 10, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के 6, सीपीएम के 5, जनता दल यूनाइटेड के 5 सदस्य हैं. एनसीपी के 4, सपा और शिवसेना के 3-3 सदस्य हैं. भाकपा और झारखंड मुक्ति मोर्चा के 2-2, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, केरल कांग्रेस (मणि) और राष्ट्रीय लोक दल के एक-एक सदस्य हैं. विपक्षी गठबंधन का संख्याबल 97 पहुंचता है.

इन दलों के रुख पर निर्भर बिल गिराने की आस

राज्यसभा के नंबर गेम में न तो सत्ताधारी एनडीए आगे है और ना ही विपक्षी गठबंधन भारी. ऐसे में केजरीवाल की राज्यसभा में बिल गिराने की उम्मीद निर्दलीयों के साथ ही उन दलों के रुख पर निर्भर नजर आ रही है जो न एनडीए में हैं और ना ही विपक्षी गठबंधन में. राज्यसभा में निर्दलीय और अन्य के तीन सदस्य हैं. वाईएसआर कांग्रेस और बीजू जनता दल के 9-9 सदस्य हैं. ये दोनों ही दल कई महत्वपूर्ण मौकों पर सरकार के साथ खड़े नजर आए हैं.

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इनके अलावा भारत राष्ट्र समिति के 7 सदस्य हैं. बसपा, जनता दल सेक्यूलर, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट, तेलगु देशम पार्टी और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी (लिबरल) के भी उच्च सदन में एक-एक सदस्य हैं. राज्यसभा में बिल पारित होगा या गिरेगा? यह इन दलों के रुख पर निर्भर करेगा. केजरीवाल ने हैदराबाद पहुंचकर बीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव से मुलाकात भी की थी. उनको उम्मीद है कि दिल्ली के पावर वॉर में संसद के भीतर ये दल भी आम आदमी पार्टी का साथ देंगे.

संसद में कब पेश होना है बिल

दिल्ली में ट्रांसफर-पोस्टिंग के अधिकार को लेकर बिल तैयार है. इस बिल को कैबिनेट ने मंजूरी भी दे दी है. सरकार इस बिल को 31 जुलाई, सोमवार को पेश करेगी. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसफर-पोस्टिंग विवाद में फैसला दिल्ली सरकार के पक्ष में दिया था. इसके बाद केंद्र सरकार ने अध्यादेश जारी कर ये सुनिश्चित कर दिया था कि ट्रांसफर-पोस्टिंग के मामलों में उपराज्यपाल ही बॉस होंगे.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसके बाद मुहिम छेड़ दी और शरद पवार, उद्धव ठाकरे, केसीआर समेत तमाम नेताओं से मुलाकात कर संसद में बिल आने की स्थिति में इसके खिलाफ समर्थन मांगा था. आम आदमी पार्टी को उम्मीद है कि केजरीवाल की मुहिम रंग लाएगी और सरकार इस बिल को पास कराने के लिए जरूरी आंकड़ा नहीं जुटा पाएगी.

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