दिल्ली सरकार ने प्रदूषण को रोकने के लिए निर्माण कार्यों के लिए गाइडलाइंस जारी की हैं. जेनरेटर के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी गई है. धूल न उड़े, इसके लिए पानी के निरंतर छिड़काव के निर्देश दिए गए हैं. दिल्ली सरकार के ये तमाम प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं. दिल्ली की हवा बहुत खराब स्तर पर पहुंच गई है. दिल्ली के आसमान में 15 अक्टूबर के पास ही धुंध नजर आने लगी है.
आईटीओ में सबसे अधिक 372 एक्यूआई रिकॉर्ड किया गया. विवेक विहार में एक्यूआई 370, शादीपुर में 359 रिकॉर्ड किया गया. दिल्ली में सुबह 11.10 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 315 दर्ज किया. हवा की गुणवत्ता इतने खराब स्तर पर फरवरी में थी. बुधवार को 24 घंटे की औसत एक्यूआई बुधवार को 276 थी, जो खराब की श्रेणी में था. वहीं, इससे पहले 13 अक्टूबर का औसत एक्यूआई 300, 12 अक्टूबर का औसत एक्यूआई 261, 11 अक्टूबर का 216, 10 अक्टूबर को औसत एक्यूआई 221 था.
केवल दिल्ली ही नहीं, एनसीआर के अन्य शहरों की हवा का हाल भी कुछ ऐसा ही है. फरीदाबाद में हवा की गुणवत्ता 317, गाजियाबाद में 326, ग्रेटर नोएडा में 344, नोएडा में एक्यूआई 314 रिकॉर्ड की गई. यह भी रेड जोन में है. मौसम विज्ञान विभाग के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा कि हवा की गुणवत्ता में गिरावट के लिए हवा की धीमी गति कारण हो सकता है, जिसकी वजह से प्रदूषकों का संचय हुआ.
उच्चतम स्तर पर पहुंचा पीएम 10 का स्तर
पीएम 10 का स्तर भी दिल्ली एनसीआर में उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है. सुबह 9.30 बजे पीएम 10 का स्तर 300 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रिकॉर्ड किया गया. यह इस सीजन का अब तक का उच्चतम स्तर है. भारत में पीएम 10 का स्तर 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक सुरक्षित माना जाता है. नासा ने उपग्रह इमेजरी जारी की है, जिसमें पंजाब के अमृतसर, फिरोजपुर और फरीदकोट के समीप और हरियाणा के पटियाला, अंबाला और राजपुरा के समीप बड़े पैमाने पर
पराली जलाए जाते नजर आ रहे थे. हालांकि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु गुणवत्ता चेतावनी प्रणाली ने कहा कि दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर इसका प्रभाव मामूली था.