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CAG रिपोर्ट आज आएगी, दिल्ली में खलबली मचाएगी... शराब नीति घोटाले और CM आवास पर होंगे बड़े खुलासे!

दिल्ली में 6 फ्लैग स्टाफ रोड स्थित सीएम आवास के रिनोवेशन के लिए जब टेंडर आवंटित हुआ तो अनुमानित लागत 7.91 करोड़ से बढ़कर 8.62 करोड़ रुपये हो गई, जो 13.21 प्रतिशत अधिक था. जब काम पूरा हुआ, तो इस पर कुल 33.66 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो एस्टीमेटेड कॉस्ट से 342.31 प्रतिशत अधिक था.

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दिल्ली विधानसभा में 25 फरवरी को कैग की 14 पेंडिंग रिपोर्ट पेश की जाएंगी. (PTI Photo)
दिल्ली विधानसभा में 25 फरवरी को कैग की 14 पेंडिंग रिपोर्ट पेश की जाएंगी. (PTI Photo)

दिल्ली विधानसभा में आज पेश होने वाली सीएजी रिपोर्ट (CAG Report) में '6 फ्लैग स्टाफ रोड' पर मुख्यमंत्री आवास के नवीनीकरण में गंभीर अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया है. बता दें कि यह वही बंगला है, जिसमें दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल रहते थे. रिपोर्ट में कहा गया है कि 6 फ्लैग स्टाफ रोड वाले बंगले को और बड़ा करने के लिए नियमों का उल्लंघन करके कैंप ऑफिस और स्टाफ ब्लॉक को भी उसमें मिला लिया गया था. 

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रिपोर्ट के मुताबिक 6 फ्लैग स्टाफ रोड पर मुख्यमंत्री आवास के मरम्मत कार्य के लिए, लोक निर्माण विभाग (PWD) ने टाइप VII और VIII आवास के लिए केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) द्वारा प्रकाशित प्लिंथ एरिया दरों को अपनाकर 7.91 करोड़ रुपये का बजट एस्टीमेट बनाया था. दिल्ली लोक निर्माण विभाग द्वारा इस कार्य को अति आवश्यक घोषित किया गया था. इस बंगले के रिनोवेशन का पूरा काम कोरोना काल के दौरान संपन्न हुआ था.

एस्टीमेट से 342% ज्यादा खर्च में बना CM बंगला

हालांकि, जब इस काम के लिए जब टेंडर आवंटित हुआ तो लागत बढ़कर 8.62 करोड़ रुपये हो गई, जो एस्टीमेटेड बजट से 13.21 प्रतिशत अधिक था. 6 फ्लैग स्टाफ रोड स्थित सीएम आवास के रिनोवेशन का जब काम पूरा हुआ, तो इस पर कुल 33.66 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो एस्टीमेटेड कॉस्ट से 342.31 प्रतिशत अधिक था. ऑडिट में पाया गया कि कंसल्टेंसी वर्क के लिए पीडब्ल्यूडी ने तीन कंसल्टेंसी फर्मों का चयन रिस्ट्रिक्टेड बीडिंग के जरिए करने के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं किया.

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बंगले के रिनोवेशन में हुए खर्च को उचित ठहराने के लिए PWD ने कंसल्टेंसी वर्क की एक वर्ष पुरानी दरों को अपनाया और इसे 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिया. रिनोवेशन वर्क के लिए PWD ने फिर से रिस्ट्रिक्टेड बीडिंग का सहारा लिया और वीआईपी क्षेत्रों में ऐसे बंगले बनाने का अनुभव रखने वाले 5 कॉन्ट्रैक्टर्स का चयन उनकी वित्तीय स्थिति और संसाधनों के आधार पर कर लिया. हालांकि ऑडिट में पाया गया कि जिन 5 ठेकेदारों को सीएम आवास के मरम्मत का कार्य सौंपा गया था, उनमें से सिर्फ एक के पास ऐसा बंगला बनाने का अनुभव था, जो दर्शाता है कि रिस्ट्रिक्टेड बीडिंग के लिए ​अन्य 4 कॉन्ट्रैक्टर्स का चयन मनमाने ढंग से किया गया था.

सीएम आवास के दायरे को 36 प्रतिशत बढ़ाया गया

कैग की ऑडिट में पाया गया कि दिल्ली लोक निर्माण विभाग ने बंगले का दायरा 1,397 वर्ग मीटर से 1,905 वर्ग मीटर (36 प्रतिशत) तक बढ़ा दिया. और लागत को कवर करने के लिए, पीडब्ल्यूडी ने एस्टीमेटेड कॉस्ट को चार बार संशोधित किया. इसके अलावा बंगले में महंगे और लग्जरी आइटम्स लगाए गए. पीडब्ल्यूडी ने बंगले के रिनोवेशन में एस्टीमेट से अलग जो अतिरिक्त कार्य कराए गए, उसके लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाने की जहमत भी नहीं उठाई और करीब 25.80 करोड़ रुपये के कार्य सेम कॉन्ट्रैक्टर द्वारा किए गए. 

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ऑडिट के मुताबिक बंगले की साज-सज्जा और घरेलू उपकरण लगाने में पीडब्ल्यूडी ने 18.88 करोड़ रुपये खर्च किए और इन्हें एस्टीमेटेड कॉस्ट से अलग एक्स्ट्रा आइटम्स के रूप में दिखाया. स्टाफ ब्लॉक/कैंप कार्यालय के रिनोवेशन के लिए कॉन्ट्रैक्ट 18.37 करोड़ की अनुमानित लागत के मुकाबले 16.54 करोड़ रुपये में आवंटित किया गया. इसके लिए भी रिस्ट्रिक्टेड ​बीडिंग की प्रक्रिया अपनाई गई. रिस्ट्रिक्टेड बीडिंग के तहत वर्क टेंडर का आवंटन क्यों किया गया इसके कारणों का ऑडिट में पता नहीं लगाया जा सका, क्योंकि इससे संबंधित रिकॉर्ड कैग को उपलब्ध नहीं कराए गए.

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बजट स्वीकृत हो गया, लेकिन स्टाफ ब्लॉक बना नहीं

कैग की ऑडिट में पाया गया कि स्टाफ ब्लॉक और कैम्प ऑफिस के निर्माण के लिए स्वीकृत 19.87 करोड़ रुपये की राशि में से कुछ धनराशि का उपयोग अन्य कार्यों के लिए किया गया. स्टाफ ब्लॉक का निर्माण हुआ ही नहीं और इसके लिए स्वीकृत धनराशि में से, सात सर्वेंट क्वार्टर का निर्माण किसी अन्य स्थान पर किया गया था, जो मूल कार्य से संबंधित नहीं था. अब 25 फरवरी को कैग की 14 पेंडिंग रिपोर्ट्स दिल्ली विधानसभा के पटल पर रखी जाएंगी, तो कई और खुलासे होंगे. 

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दिल्ली की नई मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ-साफ कहा है कि पिछली सरकारों (आम आदमी पार्टी और कांग्रेस) ने जनता की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग किया है. जनता के खून-पसीने की कमाई ​जिन सरकारों ने लूटा है, उन्हें एक-एक पाई का हिसाब देना होगा. कैग रिपोर्ट में बताया गया है कि आम आदमी पार्टी की सरकार की गलत शराब नीति के कारण दिल्ली को 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ा. बता दें कि आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान 2016 से दिल्ली विधानसभा में कैग की एक भी रिपोर्ट नहीं पेश हुई थी. 

शराब नीति घोटाले पर कैग रिपोर्ट में क्या?

1- शराब नीति में खामियों के कारण सरकार को ₹2,026 करोड़ का नुकसान हुआ.

2- शराब नीति बनाने से पहले विशेषज्ञों की सलाह ली गई थी, लेकिन उनकी सिफारिशों को माना नहीं गया.

3- जिन कंपनियों की शिकायतें थीं या जो घाटे में चल रही थीं, उन्हें भी लाइसेंस दिए गए.

4- कैबिनेट और उपराज्यपाल यानी एलजी से कई बड़े फैसलों पर मंजूरी नहीं ली गई .

5- शराब नीति के नियमों को विधानसभा में पेश भी नहीं किया गया.

6- कोविड-19 के नाम पर ₹144 करोड़ की लाइसेंस फीस माफ कर दी गई, जबकि ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं थी.

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7- सरकार ने जो लाइसेंस वापस लिए, उन्हें फिर से टेंडर प्रक्रिया के जरिए आवंटित नहीं किया, जिससे ₹890 करोड़ का नुकसान हुआ. 

8- जोनल लाइसेंस धारकों को छूट देने से ₹941 करोड़ का और नुकसान हुआ.

9- सिक्योरिटी डिपॉजिट राशि ठीक से ना वसूलने के कारण ₹27 करोड़ का नुकसान हुआ.

10- शराब की दुकानें हर जगह समान रूप से नहीं बांटी गईं.

कैग रिपोर्ट में मोहल्ला क्लीनिक को लेकर क्या?

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) 2016-23 के दौरान प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (मोहल्ला क्लीनिक) के निर्माण के लिए आवंटित 35.16 करोड़ रुपये के बजट में से सिर्फ 9.78 करोड़ (28 प्रतिशत) ही खर्च कर सका. 31 मार्च 2017 तक 1000 आम आदमी मोहल्ला क्लीनिक स्थापित करने के लक्ष्य के मुकाबले, विभाग केवल 523 मोहल्ला क्लीनिक (31 मार्च, 2023) ही स्थापित कर सका, जिसमें 31 इवनिंग शिफ्ट वाली मोहल्ला क्लीनिक शामिल थीं. कैग की ऑडिट में पाया गया कि दिल्ली के चार जिलों में 218 में से 41 मोहल्ला क्लीनिक डॉक्टरों की कमी और स्टाफ के छुट्टी पर होने के कारण महीने में 15 दिन से लेकर 23 दिन तक की अवधि के लिए बंद रहे.

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मोहल्ला क्लीनिक्स में बुनियादी चिकित्सा उपकरणों जैसे पल्स ऑक्सीमीटर, ग्लूकोमीटर, एक्स-रे व्यूअर, थर्मामीटर, बीपी मॉनिटरिंग मशीन आदि की कमी पाई गई. रिव्यू के दौरान 74 मोहल्ला क्लीनिक्स ऐसे मिले, जिनमें आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल 165 मेडिसिन की शत-प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई थी. वहीं अक्टूबर 2022 से मार्च 2023 की अवधि के दौरान मोहल्ला क्लीनिक्स में आने वाले 70 प्रतिशत मरीजों को एक मिनट से भी कम समय का मेडिकल कंसल्टेशन मिला. ऑडिट में कहा गया है कि मोहल्ला ​क्लीनिक्स के निरीक्षण में भी पारदर्शिता नहीं बरती गई. मार्च 2018 से मार्च 2023 के दौरान चार चयनित जिलों में केवल 2 प्रतिशत मोहल्ला क्लीनिक्स का निरीक्षण किया गया. सभी मोहल्ला क्लीनिक्स में डॉक्टरों, पब्लिक हेल्थ नर्सिंग ऑफिसर, मिड-वाइफ (एएनएम) और फार्मासिस्ट जैसे स्टाफ की कमी थी.

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