दिल्ली बीजेपी पिछले कई दिनों से अन्ना हजारे के बहाने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधने में लगी है. हाल ही में दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने अन्ना हजारे को एक चिट्ठी भी लिखी है. जिसमें केजरीवाल के खिलाफ आंदोलन करने का अनुरोध किया गया है. जिसके बाद अब अन्ना हजारे ने आदेश गुप्ता की चिट्ठी का जवाब दिया है और बीजेपी पर ही निशाना साधा है.
आदेश गुप्ता को लिखे गए पत्र में अन्ना हजारे ने कहा है कि आपकी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पिछले 6 साल से ज्यादा वक्त से देश की सत्ता संभाल रही है. आपकी पार्टी में बड़ी संख्या में युवक होते हुए और विश्व में सबसे ज्यादा पार्टी सदस्य होने का दावा करने वाली पार्टी के नेता मंदिर में 10 बाय 12 फीट के कमरे में रहने वाले 83 साल के अन्ना हजारे जैसे फकीर आदमी को जिसके पास धन-दौलत और सत्ता नहीं है, ऐसे आदमी को दिल्ली में आंदोलन करने के लिए बुला रहे हैं. इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण बात और क्या हो सकती है.
अन्ना हजारे ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि केंद्र में आपकी सरकार है. दिल्ली सरकार के भी कई विषय केंद्र सरकार के अंतर्गत हैं. भ्रष्टाचार मिटाने के लिए कठोर कदम केंद्र सरकार ने उठाए, ऐसा दावा हमेशा प्रधानमंत्री करते हैं. अगर ऐसा है और अगर दिल्ली सरकार ने भ्रष्टाचार किया है तो क्यों उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई आपकी ही सरकार नहीं करती? या भ्रष्टाचार निर्मूलन के केंद्र सरकार के सब दावे खोखले हैं? अन्ना हजारे ने कहा कि उन्होंने किसी पक्ष और पार्टी को देखते हुए आंदोलन नहीं किया है. पक्ष और पार्टी का कोई लेनदेन नहीं है. सिर्फ गांव, समाज और देश की भलाई का सोचकर की आंदोलन किया है.
'जनता की परेशानी में कोई कमी नहीं'
अन्ना हजारे ने कहा कि जिस पार्टी को हमारे आंदोलन से नुकसान होता है, वह मेरे बारे में समाज में गलतफहमी फैलाते हैं कि मैं दूसरी पार्टी का हस्तक हूं. 2011 में बढ़े हुए भ्रष्टाचार के कारण हुए आंदोलन के कारण दिल्ली और देश की जनता सड़क पर उतर आई. इसके बाद 2014 में आपकी सरकार भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना दिखाकर सत्ता में आई. लेकिन जनता की परेशानी में कोई कमी नहीं हुई. एक पक्ष को सिर्फ दूसरे पक्ष की पार्टी के दोष दिखते हैं. कभी खुद में भी झांककर देखना चाहिए और खामियों के खिलाफ बोलना चाहिए.
व्यवस्था परिवर्तन से बदलाव- अन्ना
अन्ना हजारे ने कहा कि वर्तमान हालात में देश की कोई भी पार्टी देश को उज्जवल भविष्य दे पाएगी, ऐसा मुझे नहीं लगता. सत्ता से पैसा और पैसों से सत्ता, इस चक्र में बहुत-सी पार्टियां लगी हुई हैं. सत्ता कोई भी पक्ष या पार्टी की क्यों न हो, जब तक व्यवस्था नहीं बदलेगी, तब तक लोगों को राहत नहीं मिलेगी. इसलिए मेरे फिर से दिल्ली आने से कोई फर्क नहीं आएगा, ऐसी मेरी धारणा है. देश में बदलाव सिर्फ पक्ष की पार्टी से बदलाव नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन से आएगा.