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केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ केजरीवाल ने खोला तीन तरफा मोर्चा, इन 10 पार्टियों का भी मिला समर्थन

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल इस अध्यादेश को राज्यसभा में चुनौती देने की तैयारी में हैं और इसी सिलसिले में वो कई भाजपा विरोधी पार्टियों के प्रमुख से मुलाकात कर रहे हैं. अब उन्हें सपा प्रमुख अखिलेश यादव का भी समर्थन मिल चुका है. इस तरह केजरीवाल को अब तक 10 पार्टियों का साथ मिल चुका है. वहीं केजरीवाल ने अध्यादेश को हराने के लिए तीन तरफा मोर्चा खोल दिया है.

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अरविंद केजरीवाल केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ विपक्ष का लामबंद कर रहे हैं
अरविंद केजरीवाल केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ विपक्ष का लामबंद कर रहे हैं

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल केंद्र सरकार के अध्यादेश के खिलाफ लामबंदी में जुटे हैं. इसके तहत वह विपक्ष के नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं. उन्होंने बुधवार को समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की. अखिलेश ने केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ केजरीवाल को अपनी पार्टी का समर्थन देने का ऐलान कर दिया है. केजरीवाल को अब तक टीएमसी, डीएमके, शिवसेना (उद्धव), जेडीयू, आरजेडी, झारखंड मुक्ति मोर्चा और समाजवादी पार्टी समेत 10 विपक्षी पार्टियों का समर्थन मिल चुका है. केजरीवाल इस अध्यादेश को राज्यसभा में चुनौती देने की तैयारी में हैं और इसी सिलसिले में वो कई भाजपा विरोधी पार्टियों के प्रमुख से मुलाकात कर रहे हैं.

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लखनऊ में एक संवाददाता सम्मेलन में अखिलेश यादव ने कहा कि यह अध्यादेश अलोकतांत्रिक है. अखिलेश ने घोषणा की कि समाजवादी पार्टी राज्यसभा में दिल्ली सेवा विधेयक का विरोध करने जा रही है. केजरीवाल पिछले कुछ समय से देशव्यापी अभियान पर हैं. उन्होंने कई विपक्षी नेताओं, विपक्षी दलों के प्रमुखों और तमिलनाडु, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मुलाकात की है. AAP प्रमुख विपक्षी दलों से राज्यसभा में दिल्ली सेवा विधेयक का विरोध करने का आग्रह कर रहे हैं.

अखिलेश ने केजरीवाल को समर्थन देने का ऐलान किया है

अखिलेश से मुलाकात के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन हुआ. इसमें अखिलेश यादव, केजरीवाल और भगवंत मान शामिल हुए. इसमें अखिलेश ने आम आदमी पार्टी को अपना समर्थन देने का वादा किया. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में AAP द्वारा किए जा रहे अच्छे काम को भाजपा बर्दाश्त नहीं कर पा रही है. अखिलेश ने घोषणा की कि उसके सभी सांसद संसद में AAP का समर्थन करेंगे. बता दें कि सपा के पास 3+1 राज्यसभा सदस्य हैं. जबकि भाजपा को लोकसभा में भारी बहुमत प्राप्त है. केजरीवाल को उम्मीद है कि यदि सभी विपक्षी दल एक साथ मिलकर राष्ट्रीय राजधानी कैडर सेवा प्राधिकरण (एनसीसीएसए) का विरोध करते हैं तो इस विधेयक को राज्यसभा में हराया जा सकता है.

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ममता ने भी केजरीवाल को समर्थन देने की घोषणा की है

अध्यादेश के खिलाफ केजरीवाल ने तीन तरफा मोर्चा खोला

केजरीवाल की AAP केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ तीन तरफा लड़ाई लड़ रही है. सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई, सड़क पर लड़ाई और एक मजबूत संसदीय रणनीति का निर्माण. जहां दिल्ली सरकार शीर्ष अदालत की छुट्टियां खत्म होने पर एनसीसीएसए अध्यादेश की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए तैयार है, वहीं आम आदमी पार्टी ने 11 जून को रामलीला मैदान में एक मेगा रैली के लिए जमीन तैयार की है. इसके साथ ही वह संसदीय रणनीति के लिए विपक्षी पार्टियों के पास पहुंच रहे हैं.

क्या मैसेज देना चाह रहे केजरीवाल?

केजरीवाल लगातार ये कहते आ रहे हैं कि यदि सभी भाजपा विरोधी दल एकजुट हो जाते हैं और राज्यसभा में अध्यादेश को हरा देते हैं, जहां भाजपा बहुमत में नहीं है, तो यह अगले साल के चुनावों का सेमीफाइनल होगा और देश को एक मजबूत संदेश देगा. केजरीवाल ने लखनऊ में भी यही बात दोहराई.

AAP प्रमुख को JDU-RJD का भी साथ मिल चुका है

राज्यसभा में समर्थन के लिए सीटों का गणित

केजरीवाल को अब तक टीएमसी, डीएमके, शिवसेना (उद्धव), जेडीयू, आरजेडी, झारखंड मुक्ति मोर्चा और समाजवादी पार्टी समेत 10 विपक्षी पार्टियों का समर्थन मिल चुका है. इसका मतलब है कि आम आदमी पार्टी कई राज्यों में फैले राज्यसभा सांसदों का  समर्थन ले सकती है. 

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टीएमसी - 12 (TMC कोटे की एक सीट राज्यसभा में खाली है)
डीएमके- 10
बीआरएस - 7
राजद - 6
जदयू- 5
सीपीएम - 5
एनसीपी-4
शिवसेना (UBT) - 3
एसपी - 3+1
झामुमो - 2

जबकि केजरीवाल आरएलडी (1) और सीपीआई (2) पर रिले कर सकते थे, AAP के पास राज्यसभा में भी 10 सदस्य हैं. अगर इन नंबरों को एक साथ रखा जाए तो AAP केंद्र के दिल्ली विधेयक के खिलाफ करीब 71 सांसद ला सकती है. 

केजरीवाल ने हेमंत सोरेन से मुलाकात कर समर्थन मांगा था


बिल को हराने के लिए कांग्रेस की जरूरत क्यों?

केंद्र के बिल को राज्यसभा में हराने के लिए केजरीवाल को अभी भी कांग्रेस के समर्थन की जरूरत है, क्योंकि कांग्रेस के 31 राज्यसभा सांसद हैं, यदि वे केजरीवाल की पार्टी का समर्थन करते हैं, तो राज्ससभा में  NCCSA को हराया जा सकता है. लेकिन कांग्रेस के रुख के बारे में तस्वीर तभी स्पष्ट होगी, जब खड़गे- राहुल गांधी केजरीवाल को समर्थन देने के लिए सहमत होंगे. हालांकि 26 मई को AAP प्रमुख केजरीवाल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से दिल्ली सेवा अध्यादेश के खिलाफ समर्थन मांगने पहुंचे थे. लेकिन AAP को अभी तक कांग्रेस से हरी झंडी नहीं मिली है. रिपोर्टों के अनुसार इस मुद्दे पर वह पहले ही अपनी राज्य इकाई से परामर्श कर चुकी है, लेकिन कांग्रेस ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं. 

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किस बात से उपजा विवाद?

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ‘प्रशासन पर नियंत्रण’ को लेकर दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच चल रहे मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया था. कई साल से चले आ रहे इस मामले में आम आदमी पार्टी को बड़ी जीत मिली. मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने दिल्ली हाईकोर्ट के पांच साल पुराने फैसले को पलटते हुए दिल्ली सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया और उसे नौकरशाही पर नियंत्रण का हक दिया. लेकिन इस फैसले के कुछ दिन बाद ही केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार के अधिकारों पर 'राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण' बनाने का अध्यादेश लेकर आ गई. इस अध्यादेश ने दिल्ली में अफसरों की ट्रांसफर और पोस्टिंग का अधिकार फिर से उपराज्यपाल को दे दिया है. इसका मतलब यह है कि दिल्ली की चुनी हुई सरकार का अपने अधीन काम करने वाले अधिकारियों के तबादले और तैनाती पर पूरा नियंत्रण नहीं है.

 

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