दिल्ली विधानसभा सत्र के दूसरे दिन सदन की कार्यवाही उपराज्यपाल वीके सक्सेना के अभिभाषण के साथ शुरू हुई. इसके बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 14 पेंडिंग कैग रिपोर्ट्स में से आज नई उत्पाद शुल्क नीति बनाने में बरती गईं अनियमितताओं से जुड़ी रिपोर्ट सदन के पलट पर रखी. यह नीति पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी की सरकार ने बनाई थी. कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि नई उत्पाद शुल्क नीति बनाने में नियमों के उल्लंघन, बेवजह की छूट देने और नीतिगत खामियों के कारण राज्य के खजाने को 2,002 करोड़ रुपये की चपत लगी.
हालांकि, दिल्ली विधानसभा में AAP विधायक दल की नेता (लीडर ऑफ अपोजिशन) आतिशी ने अरविंद केजरीवाल के मुख्यमंत्रित्व काल में बनाई गई नई उत्पाद शुल्क नीति का बचाव किया है, जिसे तत्कालीन सरकार ने अनियमितताओं का आरोप लगने के बाद वापस ले लिया था. आतिशी ने कहा कि 2017 से 2021 तक की एक्साइज ऑडिट रिपोर्ट सदन में पेश हुआ. इसमें पुरानी शराब नीति की खामियां उजागर की गई हैं. हम कहते रहे हैं कि हमने पुरानी उत्पाद नीति का पर्दाफाश किया, क्योंकि कालाबाजारी हो रही थी. दिल्ली में यूपी, हरियाणा से शराब की तस्करी हो रही थी. नई शराब नीति ने इस कालाबाजारी पर रोक लगाई थी और दिल्ली सरकार को हो रहे राजस्व घाटे को रोका था.
नई एक्साइज पॉलिसी लागू नहीं करने से हुआ नुकसान: आतिशी
आतिशी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि कैग की रिपोर्ट का आठवां चैप्टर कहता है कि नई नीति पारदर्शी थी, इसमें कालाबाजारी रोकने के प्रावधान शामिल किए गए थे और इससे राजस्व बढ़ना चाहिए था. जब यही नीति पंजाब में लागू की गई तो वहां भी एक्साइज रेवेन्यू में बढ़ोतरी हुई. इस नीति के कारण 2021 से 2025 तक पंजाब के एक्साइज रेवेन्यू में 65 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर नई नीति ठीक से लागू की जाती तो सिर्फ एक साल में राजस्व 4,108 करोड़ से बढ़कर 8,911 करोड़ हो जाता.
यह भी पढ़ें: CAG Report Delhi: केजरीवाल के 'शराब घोटाले' की CAG रिपोर्ट पेश, जानें BJP ने क्या कहा
उन्होंने कहा कि नई उत्पाद शुल्क नीति लागू नहीं हुई, इसलिए दिल्ली के एक्साइज रेवेन्यू में 2,000 करोड़ रुपये की कमी हुई. इसकी जांच होनी चाहिए कि इसे किसने लागू नहीं होने दिया. इसके लिए तीन लोग जिम्मेदार हैं: दिल्ली एलजी, सीबीआई और ईडी... यह नीति स्पष्ट करती है कि AAP सरकार ने पुरानी नीति को हटाकर सही निर्णय लिया था. हमारी मांग है कि इस सीएजी रिपोर्ट के आधार पर दिल्ली के उपराज्यपाल, सीबीआई और ईडी की जांच कराई जाए, एफआईआर दर्ज की जाए और कार्रवाई की जाए.
CAG रिपोर्ट पेश होने के बाद अब आगे क्या?
सूत्रों की मानें तो दिल्ली विधानसभा की लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee or PAC) एक्साइज पॉलिसी पर कैग की रिपोर्ट का संज्ञान ले सकती है. जरूरत पड़ने पर पीएसी दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व मंत्रियों और शराब नीति केस केस से जुड़े अन्य आरोपियों को समन जारी कर सकती है. इससे पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और दिल्ली एक्साइज पॉलिसी बनाने वाले जीओएम (ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स) की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
यह भी पढ़ें: शराब घोटाले से दिल्ली को 2002 करोड़ की चपत, CAG रिपोर्ट से सामने आया पाई-पाई का हिसाब
दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता पीएसी का गठन कर सकते हैं, जिसमें 12 सदस्य होंगे. अगर पीएसी का गठन होता है तो इसमें भाजपा विधायकों के अलावा और AAP के कुछ विधायक भी शामिल किए जाएंगे. दिल्ली शराब घोटाला केस में कैग रिपोर्ट में हुए खुलासे के आधार पर पीएसी जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी और दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करेगी. पीएसी रिपोर्ट दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष को सौंपी जाएगी. सदन इस बात पर फैसला करेगा कि सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जा सकती है.
दिल्ली शराब घोटाले पर क्या कहती है कैग रिपोर्ट?
शराब घोटाले में दिल्ली को हजारों करोड़ रुपए की चपत लगी. ये चपत कई अलग-अलग छूट और नियमों के उल्लंघन के कारण लगी है. इस घोटाले को लेकर आज कई बड़े खुलासे CAG की रिपोर्ट में हुए हैं. आइए जानते हैं दिल्ली के सरकारी खजाने को नई उत्पाद शुल्क नीति के कारण कैसे हुआ दो हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान?
> गैर-अनुरूप क्षेत्र में शराब की दुकानें न खोलने से ₹941.53 करोड़ का घाटा हुआ.
> छोड़े गए लाइसेंस को री-टेंडर न करने से ₹890 करोड़ का नुकसान हुआ.
> COVID-19 के नाम पर लाइसेंस फी छूट देने से ₹144 करोड़ का नुकसान हुआ.
> सिक्योरिटी डिपोजिट सही से कलेक्ट न करने के कारण ₹27 करोड़ का नुकसान हुआ.
> नियम 35 (दिल्ली आबकारी नीति, 2010) को सही से लागू नहीं किया गया.
> जिन लोगों की रुचि मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल में थी, उन्हें होलसेल लाइसेंस दे दिए गए.
> इससे पूरी लिकर सप्लाई चेन में एक तरह के ही लोगों का फायदा हुआ.
> होलसेलर के मार्जिन को 5 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी कर दिया गया.
> सरकार ने कहा कि क्वालिटी चेक के लिए वेयरहाउस में लैब्स बनाई जाएंगी, लेकिन कोई लैब नहीं बनी.
> इससे होलसेलर्स का प्रोफिट बढ़ा और सरकार को रेवेन्यू में नुकसान हुआ.
> स्क्रीनिंग नहीं की गई, अपफ्रंट कॉस्ट इग्नोर की गई.
> लिकर जोन चलाने के लिए ₹100 करोड़ की जरूरत थी, लेकिन सरकार ने कोई फाइनेंशियल चेक नहीं किया.
> कई बिड लगाने वालों की पिछले 3 साल की इनकम बहुत कम या जीरो थी.
> इससे प्रॉक्सी ऑनरशिप और पॉलिटिकल फेवरिज्म की संभावना बढ़ गई.
> AAP सरकार ने अपनी ही एक्सपर्ट कमेटी की सलाह को इग्नोर किया और पॉलिसी में मनमाने बदलाव किए.
> पहले एक व्यक्ति को सिर्फ 2 दुकानें रखने की अनुमति थी, लेकिन नई पॉलिसी में बढ़ाकर 54 कर दी गई.
> पहले सरकार की 377 दुकानें थीं, लेकिन नई पॉलिसी में 849 लिक वेंडर्स बना दिए गए, जिनमें से सिर्फ 22 प्राइवेट प्लेयर्स को लाइसेंस मिले.
> इससे मोनोपोली और कैटेगराइजेशन को बढ़ावा मिला.
> मैन्यूफैक्चरिंग करने वाले को सिर्फ एक होलसे के साथ टाइ-अप करने की बाध्यता थी.
> 367 रजिस्टर IMFL ब्रांड में से सिर्फ 25 ब्रांड ने कुल शराब बिक्री का 70% हिस्सा कवर किया.
> सिर्फ तीन होलसेलर्स (Indospirit, Mahadev Liquors, और Brindco) ने 71% सप्लाई कंट्रोल कर ली.
> इससे शराब की कीमत मैनिपुलेट की गई और ग्राहक के पास कम विकल्प बचे.
शराब घोटाले में शामिल हैं बड़े लोगों के यार-रिश्तेदार: मालीवाल
आम आदमी पार्टी की बागी राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने X पर एक पोस्ट में लिखा, 'जब 2021 में दिल्ली के गली-मोहल्लों में, मंदिर-गुरुद्वारों के पास शराब के ठेके खोले जा रहे थे, तब भी मैंने DCW अध्यक्ष रहते हुए कई ठेकों को बंद करवाने का प्रयास किया था. कुछ ठेके सरकार को बंद भी करने पड़े थे. मैंने गलत के खिलाफ आवाज हमेशा से उठाई है. CAG रिपोर्ट के अनुसार 2000 करोड़ से अधिक का नुकसान सरकार को हुआ. इस शराब घोटाले में बहुत किरदार हैं, बड़े-बड़े लोगों के यार-रिश्तेदार हैं.'
यह भी पढ़ें: शराब घोटाले से दिल्ली सरकार को कैसे हुआ 2000 करोड़ का नुकसान? CAG रिपोर्ट की 15 बड़ी बातें
आज तो सिर्फ एक रिपोर्ट आई है, अभी 13 बाकी हैं: वीरेंद्र सचदेवा
दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, 'आखिर वो दिन आ ही गया, अरविंद केजरीवाल, आतिशी और मनीष सिसोदिया जिसे नजरअंदाज करने की कोशिश कर रहे थे. आज सीएम रेखा गुप्ता ने कैग की रिपोर्ट को जनता के सामने ला दिया है, अब AAP नेतृत्व का काला चेहरा जनता के सामने आ गया है. उन्होंने सारे नियम-कायदे तोड़े और गलत कानून बनाए. कोविड काल के दौरान उन्होंने शराब से होने वाला मुनाफा अपनी जेब में डाला. अरविंद केजरीवाल आपको जवाब देना होगा. कैग रिपोर्ट से साबित हो गया है कि AAP नेताओं ने किस तरह से दिल्ली को लूटा है. AAP विधायकों को अराजकता का पाठ पठाया गया है. हम संवैधानिक तरीके से काम करेंगे. उनके सारे दुष्कर्म सामने आएंगे. आज तो सिर्फ एक रिपोर्ट आई है, अभी 13 बाकी हैं.'