सुप्रीम कोर्ट ने रैपिडो और ओला बाइक टैक्सी सेवा पर रोक लगा दी है. कोर्ट का ऐसा फैसला आने के बाद दूसरे राज्यों से दिल्ली में आकर कई बाइक टैक्सी चालक के रूप में काम करने वाले लोग अब वापस अपने घर लौटने लगे हैं. ऐसे ही एक शख्स हैं आनंद राय. वह दिल्ली सरकार द्वारा फरवरी 2023 में ओला, उबर और रैपिडो जैसी कैब एग्रीगेटर कंपनियों की बाइक सर्विस पर रोक लगाने के बाद आजमगढ़ लौट गए थे. हालांकि दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार के फैसले पर रोक लगाते हुए पॉलिसी आने तक कैब एग्रीगेटर कंपनियों को बाइक सर्विस की इजाजत दे दी थी. इस आदेश को अब सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया है.
- आनंद राय ने न्यूज एजेंसी ‘पीटीआई-भाषा’ को फोन पर बताया,‘मैं दिल्ली सरकार की कार्रवाई के बाद आजमगढ़ वापस आ गया था. हालांकि मैं हाई कोर्ट के फैसले के बाद वापस दिल्ली लौटने का मन बना रहा था लेकिन अब फिर से बुरी खबर आ गई. मैंने कुछ गहने गिरवी रखकर एक बाइक खरीदी थी, लेकिन अब मुझे कार खरीदकर उसे कॉमर्शियल रूप से चलाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार की कार्रवाई से बाइक-टैक्सी चलाना बेहद मुश्किल हो गया है. उन्होंने कहा,‘हमने उस समय गुरुग्राम, नोएडा और गाजियाबाद से सवारी लेना शुरू कर दिया था, लेकिन वहां भी पुलिसकर्मी हमें परेशान करते थे.’ पत्नी के अलावा मेरे दो बच्चे हैं.
- पांच महीने की एक बेटी के पिता ज्ञानेश का कहना है कि वह उत्तर प्रदेश में अपने गृह नगर वापस जाएंगे क्योंकि दिल्ली में उनके लिए अब कोई काम नहीं है. उन्होंने कहा,‘मैं पिछले ढाई साल से बाइक-टैक्सी चलाकर अच्छी कमाई कर रहा था. मेरी पत्नी और परिवार हमारे गृह नगर रहते हैं और मैं उन्हें पैसे भेजता था. अब आय का यह स्रोत समाप्त हो गया है, तो मैं घर वापस जाऊंगा और वहीं कुछ करूंगा.’
- गाजियाबाद के रहने वाले मोहम्मद आमिर (23) ने कहा कि अदालत के नवीनतम आदेश से कई लोगों का रोजगार प्रभावित होगा.
दिल्ली ऑटो रिक्शा संघ के महासचिव राजेंद्र सोनी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि यह सही समय पर आया है. उन्होंने कहा, ‘इन बाइक-टैक्सी को निजी नंबरप्लेट होने के बावजूद कारोबार में लगाया गया है. इसने बड़ी संख्या में ऑटोरिक्शा चालकों का रोजगार छिन गया और सरकार को नुकसान पहुंचा क्योंकि उन्हें कोई कर नहीं देना पड़ता था. हम मांग करते हैं कि सड़कों पर बाइक-टैक्सी चलती पाए जाने पर एग्रीगेटर्स पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाना चाहिए.’
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बाइक टैक्सी सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनी उबर के वकील नीरज किशन कौल ने दलील दी थी कि हर राज्य सरकार को इस संबंध में नीति बनाने की शक्ति का प्रावधान संविधान में है, लेकिन दिल्ली सरकार ने इसके बावजूद कोई गाइडलाइन या नीति बनाई ही नहीं है जबकि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 66 में साफ लिखा है कि बिना वैध लाइसेंस के किसी भी व्यवसायिक वाहन के मालिक को वाहन नहीं दिया जा सकता.
कौल ने कहा था कि बिना नीति के अचानक बाइक टैक्सी बंद कर देने से दिल्ली एनसीआर में 35000 से ज्यादा लोग बेरोजगार हो जाएंगे. उन्होंने कहा था कि 31 जुलाई तक छूट दी जाए क्योंकि वही बाइक इनकी आजीविका का एकमात्र साधन है. इस पर कोर्ट ने कहा कि प्रभावित और असंतुष्ट पक्षकारों को कोर्ट में आने तो दीजिए.
HC से इसलिए मिल गई थी राहत
इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने बाइक टैक्सी कंपनियों को राहत देते हुए दिल्ली परिवहन विभाग की ओर से इन एग्रीगेटर को लेकर जारी किए गए नोटिस पर रोक लगाई थी. दरअसल हाई कोर्ट ने कहा था कि जब तक इस संबंध में पॉलिसी नहीं बन जाती, तब तक रैपिडो और दूसरे एग्रीगेटर कंपनियों पर किसी तरह की सख्त कार्रवाई नहीं हो. इस वजह से दिल्ली सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की थी.
बाइक टैक्सी एग्रीगेटर्स की मांग थी कि इस संबंध में पॉलिसी बनने तक उन्हें ऑपरेट करने दिया जाए. बता दें कि फरवरी 2023 में दिल्ली परिवहन विभाग ने अपनी बाइक टैक्सी सेवाओं को तुरंत प्रभावी रूप से बैन करने के लिए एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया था. पिछले महीने दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था कि जब तक दिल्ली सरकार मोटर वाहन अधिनियम के तहत आवश्यक नियमों को अधिसूचित नहीं करती है, तब तक दो बाइक टैक्सी एग्रीगेटर्स और उसके सवारों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए.