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Bilkis Bano case: गोविंद नाई ने किया SC का रुख, जेल में सरेंडर के लिए मांगा वक्त; सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की थी सजा माफी

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद बिलकिस बानो केस में 11 दोषियों में से एक गोविंद नाई ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल की है. उन्होंने याचिका में अपने माता-पिता की देखभाल की बात करते हुए सरेंडर के लिए दो हफ्ते के बजाए चार हफ्ते की मोहलत देने की मांग की है.

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बिलकिस बानो केस में दोषी गोविंद नाई ने SC में दायर की याचिका. (फाइल फोटो)
बिलकिस बानो केस में दोषी गोविंद नाई ने SC में दायर की याचिका. (फाइल फोटो)

बिलकिस बानो मामले में आजीवन कारावास की सजा पूरी होने से पूर्व ही रिहा किए गए ग्यारह दोषियों में से एक गोविंदभाई नाई ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी में अपने आत्मसमर्पण के लिए कुछ मोहलत मांगी है.

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गोविंद ने मांगा सरेंडर के लिए वक्त

जानकारी के अनुसार, बिलकिस बानो मामले में आजीवन कारावास की सजा पूरी होने से पहले गुजरात सरकार द्वारा रिहा कई गए 11 दोषियों में से एक गोविंद नाई ने सुप्रीम कोर्ट में अपने आत्मसमर्पण के वक्त की गुहार लगते हुए याचिका का दायर की है.

माता-पिता की देखभाल का दिया हवाला

उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि वह अपने 88 वर्षीय पिता और 75 वर्षीय मां की देखभाल कर रहे हैं. साथ ही उन्होंने दावा किया कि वह अपने माता-पिता की देखभाल करने वाले एकमात्र व्यक्ति हैं. गोविंद नाई ने अपनी याचिका में उच्चतम न्यायालय से दो हफ्ते के बजाए चार हफ्ते का वक्त मांगा है.

SC ने रद्द किया गुजरात सरकार का फैसला

बता दें कि आठ जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो रेप और उसके परिजनों की हत्या मामले में समय से पहले बरी किए गए 11 दोषियों दी गई रिहाई को रद्द करते हुए उन्हें दो हफ्ते में जेल में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था.

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने आठ जनवरी को बिलकिस बानो बलात्कार के 11 दोषियों की सजा माफ करने वाले गुजरात सरकार के फैसले को रद्द कर दिया था.

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उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि दोनों राज्यों (महाराष्ट्र-गुजरात) के लोअर कोर्ट और हाई कोर्ट फैसले ले चुके हैं. ऐसे में कोई आवश्यकता नहीं लगती है कि इसमें...किसी तरह का दखल दिया जाए. अब  दो हफ्ते के अंदर दोषियों को सरेंडर करना होगा. कोर्ट का कहा कि ये साफ होना चाहिए कि दोषी कैसे माफी के योग्य पाए और सरकार को फटकार भी लगाई.

क्या है मामला

27 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस के कोच को जला दिया गया था. इस ट्रेन से कारसेवक लौट रहे थे. इससे कोच में बैठे 59 कारसेवकों की मौत हो गई थी. इसके बाद दंगे भड़क गए थे. दंगों की आग से बचने के लिए बिलकिस बानो अपनी बच्ची और परिवार के साथ गांव छोड़कर चली गई थीं. बिलकिस बानो और उनका परिवार जहां छिपा था, वहां 3 मार्च 2002 को 20-30 लोगों की भीड़ ने तलवार और लाठियों से हमला कर दिया. भीड़ ने बिलकिस बानो के साथ बलात्कार किया. उस समय बिलकिस 5 महीने की गर्भवती थीं और उनके परिवार के 7 सदस्यों की हत्या भी कर दी थी.

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