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आम बजट से निराश हुए दिल्ली के व्यापारी और CA, गिनाईं खामियां

देश की राजधानी में आम बजट से उम्मीद लगाए बैठे व्यापारियों और चार्टर्ड एकाउंटेंट्स को निराशा हाथ लगी है. सीटीआई ने इस साल के बजट को व्यापारियों के लिए परेशानी बढ़ाने वाला बताया है.

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सीटीआई अध्यक्ष ने स्क्रैप पॉलिसी का किया समर्थन
सीटीआई अध्यक्ष ने स्क्रैप पॉलिसी का किया समर्थन
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सीटीआई ने किया स्क्रैप पॉलिसी का समर्थन
  • सीए बोले- जीएसटी को लेकर नहीं मिली राहत

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को संसद में आम बजट पेश किया. उछाल के साथ सेंसेक्स ने बजट को सलामी दी, लेकिन दिल्ली के व्यावसायियों और चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ने बजट की खामियां गिनाई हैं. देश की राजधानी में आम बजट से उम्मीद लगाए बैठे व्यापारियों और चार्टर्ड एकाउंटेंट्स को निराशा हाथ लगी है. दिल्ली में चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने इस साल के बजट को व्यापारियों के लिए परेशानी बढ़ाने वाला बताया है.

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सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने बजट की कमियां गिनाईं और एक अच्छाई भी बताई. उन्होंने बजट में पुराने वाहनों के लिए घोषित स्क्रैप पॉलिसी का समर्थन किया है. गोयल ने कहा कि पुरानी गाड़ियों के स्क्रैप होने से बाजार में नई गाड़ियों की डिमांड बढ़ेगी. इस नीति के लागू होने पर जो गाड़ियां फिट हैं, उन गाड़ियों के स्क्रैप होने का डर भी खत्म हो जाएगा और पर्यावरण में बढ़ रहे प्रदूषण में भी कमी आएगी.

सीटीआई अध्यक्ष ने गिनाईं ये खामियां-

  1. इनकम टैक्स स्लैब की चर्चा न होने से मिडिल क्लास को निराशा हाथ लगी है. मिडिल क्लास को छूट सीमा में राहत मिलने की उम्मीद थी.
  2. टैक्स ऑडिट की तीन लिमिट थी- 1 करोड़, 2 करोड़ और 5 करोड़. बजट में बड़ी कंपनियों के लिए टैक्स ऑडिट की लिमिट 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ कर दी गई है लेकिन ज्यादातर टैक्स ऑडिट 1 करोड़ से 2 करोड़ के दायरे में आते हैं और इस पर सरकार ने कोई लिमिट नहीं बढ़ाई है. 
  3. बजट में मोबाइल फोन और चार्जर पर ड्यूटी बढ़ा दी गई है. डिजिटल इंडिया की बात करने वाली सरकार की ओर से मोबाइल पार्ट्स पर ड्यूटी बढ़ाए जाने के कारण महंगाई की मार पड़ेगी.
  4. मंदी के दौर से गुजर रहे रीयल स्टेट सेक्टर को होम लोन पर टैक्स छूट का दायरा बढ़ने की उम्मीद थी. साथ ही रीयल स्टेट सेक्टर में जीएसटी कम किए जाने की उम्मीद थी. सीमेंट और स्टील पर भी जीएसटी कम होने से राहत मिलती लेकिन रीयल स्टेट सेक्टर को बड़ा झटका लगा है.
  5. बजट में विदेशों से आने वाले कच्चे माल पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटने की उम्मीद थी लेकिन सरकार ने ऑटोपार्ट्स पर भी ड्यूटी बढ़ा दी है. इससे मेक इन इंडिया और वोकल फॉर लोकल प्रोत्साहित नहीं होगा. टेक्सटाइल, खिलौने, मोबाइल देश मे बनाए जा सकते हैं लेकिन ऑटो पार्ट्स विदेश से आयात किए जाते हैं.
  6. केंद्र सरकार ने अलग अलग सेक्टर के लिए बजट में बड़ा अमाउंट गिनाया है लेकिन सवाल ये है कि इतनी रकम कहां से एकत्रित होगी.
  7. एलआईसी, पीपीएफ, एफडीआर (80 सी) में छूट की लिमिट पिछले कई साल से 1.5 लाख रुपये है. इसे बढ़ाकर 2 लाख किया जाना चाहिए था. हालांकि, बजट में ऐसी घोषणा न होने से बीमा योजना का लाभ लेने वालों को निराशा हाथ लगी है.

सीए ने भी उठाए सवाल

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दिल्ली के चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ने बजट में जीएसटी को लेकर राहत न मिलने पर भी सवाल उठाए हैं. सीए राकेश गुप्ता ने कहा कि पूरे बजट में जीएसटी के बारे में सिर्फ 2 पेज ही लिखे गए हैं. उन्होंने कहा कि जीएसटी में आ रही परेशानियों को ठीक करने का जिक्र किया तो गया है लेकिन दावे के बावजूद पिछले 4 साल से इसका सरलीकरण नहीं हो पाया है.

राकेश गुप्ता ने आगे कहा कि साल 2014 से 2021 तक टैक्स में छूट की लिमिट 2.5 लाख रुपये ही है. 75 साल से अधिक उम्र के लोगों को टैक्स में छूट के ऐलान में ब्याज और पेंशन वालों के लिए लिमिट हटा देनी चाहिए. उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने बजट में कॉरपोरेट के इनकम टैक्स रेट को दुनिया में सबसे बेहतर बताया है. सरकार पर कॉरपोरेट की तरफ झुकाव का आरोप लगता रहा है. कॉरपोरेट सेक्टर में टैक्स रेट कम हैं, ऐसे में छोटे टैक्सपेयर्स में नाराजगी बने रहने की संभावना है.

 

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