दिल्ली सरकार में समाज कल्याण मंत्री और आम आदमी पार्टी के दलित नेता 'राजकुमार आनंद' ने बुधवार को अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया. राजकुमार आनंद, केजरीवाल के सबसे पुराने सहयोगियों में से एक थे. वे तब से केजरीवाल के साथ जुड़े हुए थे, जब उन्होंने वर्ष 2011 में अन्ना आंदोलन में हिस्सा लिया था. वर्ष 2012 में जब केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी बनाई, तब राजकुमार आनंद अपनी पत्नी वीना आनंद के साथ आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे और उनकी पत्नी ने वर्ष 2013 में उसी पटेल नगर सीट से विधानसभा का चुनाव जीता था, जिस सीट से राजकुमार आनंद अभी विधायक हैं. 57 साल के राजकुमार आनंद ने चाइल्ड लेबर से बड़े रैक्सीन मैन्युफैक्चर और फिर मंत्री बनने का सफर तय किया है. जानिए उनकी पूरी कहानी...
राजकुमार आनंद को केजरीवाल को बेहद भरोसेमंद नेताओं के रूप में गिना जाता है. यह भरोसा इतना था कि जब वर्ष 2022 में सीएम केजरीवाल ने अपने पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम का इस्तीफा लिया तो उन्होंने उनकी जगह राजकुमार आनंद को मंत्री बनाने का फैसला किया और उन्हें सात मंत्रालय और विभागों की जिम्मेदारी भी सौंपी. हालांकि यहां एक तथ्य ये भी है कि राजकुमार आनंद ने दूसरी बार आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दिया है. इससे पहले वो वर्ष 2015 में भी पार्टी छोड़कर चल गए थे. फिर वर्ष 2019 में उन्हें दोबारा आम आदमी पार्टी में शामिल कराया गया था.
'राजकुमार ने ताला फैक्ट्री में बाल मजदूरी की'
दिल्ली सरकार के पोर्टल के अनुसार, 57 वर्षीय नेता राजकुमार आनंद का जीवन संघर्षों से भरा रहा. यहां तक कि राजकुमार को अलीगढ़ की एक ताला फैक्ट्री में बाल मजदूर के रूप में काम करना पड़ा. बाद में वो एक बिजनेसमैन के रूप में सफल हुए. कारखानों में फेंके गए फोम का उपयोग करके तकिए बनाने से लेकर रेक्सिन लेदर के एक सफल व्यवसायी बनने तक की राजकुमार की यात्रा आसान और सरल लग सकती है, लेकिन वास्तव में यह कई कठिनाइयों और उतार-चढ़ाव से गुजरी है. दरअसल, राजकुमार का बचपन अभाव और गरीबी में गुजरा. माता-पिता को गरीबी के कारण बेटे को उसके नाना-नानी के पास अलीगढ़ भेजना पड़ा. वहां राजकुमार के नाना कबाड़ी का काम करते थे. यानी नाना की भी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि वो अपने पोते (राजकुमार) को पढ़ा सकें.
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'सफल कारोबारी हैं राजकुमार आनंद'
राजकुमार को शुरुआती शिक्षा हासिल करने के लिए बाल मजदूरी भी करनी पड़ी. अलीगढ़ की ताला फैक्ट्री में काम किया और कुछ पैसे जुटाए, जिससे अध्ययन कार्य चलता रहा. बाद में उन्होंने ट्यूशन पढ़ाकर भी अपने खर्चे चलाए. राजकुमार ने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से आर्ट (राजनीति विज्ञान) में पोस्ट ग्रेजुएशन किया. बाद में अपना काम-धंधा शुरू किया और फैक्ट्रियों के बाहर फेके गए फोम से तकिया बनाना शुरू किया. मेहनत का ही नतीजा था कि वो रैक्सीन लेदर के एक सफल कारोबारी बन गए. 2020 में दिल्ली विधानसभा चुनाव के हलफनामे में राजकुमार ने अपनी संपत्ति 78.9 करोड़ रुपये होने का दावा किया है.
'2022 में मंत्री बनाए गए थे राजकुमार'
राजकुमार साल 2012 में आम आदमी पार्टी (AAP) में शामिल हुए थे. उन्हें 2020 के विधानसभा चुनावों में पटेल नगर (रिजर्व) से मैदान में उतारा गया. उन्होंने बीजेपी के उम्मीदवार को हराकर जीत हासिल की थी. नवंबर 2022 में वो दिल्ली कैबिनेट में शामिल हुए और समाज कल्याण, एससी और एसटी, सहकारिता विभाग समेत जिम्मेदारियां संभाल रहे थे.
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राजकुमार ने AAP छोड़ने की क्या वजह बताई?
राजकुमार ने इस इस्तीफे के पीछे चार बड़ी वजह बताईं. पहली वजह- हाई कोर्ट के फैसले के बाद भी केजरीवाल का मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा नहीं देना. दूसरा- शराब घोटाले में खुद को बचाने के लिए आम आदमी पार्टी का गलत इस्तेमाल करना. तीसरा- दीवार पर डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर लगाकर एक भी दलित नेता को राज्यसभा का सांसद नहीं बनाना और दलित नेताओं का पार्टी में अपमान करना. चौथा- भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में आम आदमी पार्टी का अपने लक्ष्य से भटक जाना.
पांच महीने पहले ईडी ने मारा था छापा
आज से पांच महीने पहले नवंबर 2023 में ED ने राजकुमार आनंद के ठिकानों पर छापा मारा था और ये बताया था कि राजकुमार आनंद पर 7 करोड़ रुपये से ज्यादा की मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला के जरिए लेन-देन के संगीन आरोप हैं. ED की उस कार्रवाई के बाद खुद राजकुमार आनंद ने ये कहा था कि बीजेपी आम आदमी पार्टी को खत्म करना चाहती है, इसीलिए वो ED की मदद से उसके नेताओं पर कार्रवाई करवा रही है. लेकिन बाद में जब ED ने ये बताया कि Directorate of Revenue Intelligence ने राजकुमार आनंद के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है और इसी 'चार्जशीट' के आधार पर ED ने उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है तो राजकुमार आनंद की मुश्किलें काफी बढ़ गई थी. बड़ी बात ये है कि जब ED इस मामले में अभी उनके खिलाफ जांच कर रही है, तब उन्होंने इस सबके बीच दिल्ली सरकार और आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दे दिया. इससे भी बड़ी बात ये है कि इस्तीफा देने से सिर्फ दो घंटे पहले यही राजकुमार आनंद एक्स पर ये लिख रहे थे कि कितनी हास्यास्पद बात है कि एक चुने हुए मुख्यमंत्री और सांसद को मुलाकात के लिए टोकन नंबर दिया जाता है और मुलाकात को रद्द कर दिया जाता है. तिहाड़ जेल के अधिकारी मोदी सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं.
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'ईडी के डर से पार्टी नहीं छोड़ी'
वहीं, अब आम आदमी पार्टी ये कह रही है कि इस इस्तीफे के पीछे ED और बीजेपी है. AAP के आरोपों के बाद राजकुमार आनंद ने सफाई दी और कहा, मैंने ED से डर के इस्तीफा नहीं दिया. ED ने अपनी स्टेटमेंट कहा है कि मेरे यहां कोई मनी ट्रेल साबित नहीं हुई है. दलित बेचारे नहीं हैं. दलितों के वजह से दिल्ली और पंजाब में सरकार चल रही है.