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CM अरविंद केजरीवाल के धरने के खिलाफ सभी याचिकाओं का निपटारा

जिन याचिकाओं ने केजरीवाल के धरने के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था. वह धरने की संवैधानिकता और इसको लेकर दिशा-निर्देश जारी करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका लगा चुके हैं, लेकिन जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी याचिकाकर्ताओं को दोबारा हाईकोर्ट भेज दिया था.

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दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट

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दो महीने पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के उपराज्यपाल के घर धरने पर बैठने के दौरान लगाई गईं सभी याचिकाओं का दिल्ली हाइकोर्ट ने निपटारा कर दिया है. हाईकोर्ट ने कहा कि धरना ख़त्म हो चुका है. लिहाजा इस मामले में आगे सुनवाई की जरूरत नहीं है.

हालांकि याचिकाकर्ताओं की तरफ से कहा गया कि धरना भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन कोर्ट को धरना संवैधानिक था या नहीं, इस पर अपना फैसला सुनाना चाहिए ताकि आगे भी इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति हो तो कानून और कोर्ट का रुख साफ रहे.

केजरीवाल के धरने से जुड़ी चार याचिकाएं दिल्ली हाईकोर्ट में लगाई गई थीं. एक याचिका में धरने को लेकर क्या दिशा-निर्देश होने चाहिए यह भी कोर्ट को तय करने की गुहार लगाई गई थी. मगर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गीता मित्तल और श्री हरि शंकर ने कहा कि उप राज्यपाल के घर धरना संवैधानिक था या नहीं, हम अब इन याचिकाओं पर सुनवाई नहीं करना चाहते. दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री दोबारा धरने पर बैठते हैं तो फिर याचिकाकर्ता दोबारा कोर्ट का रुख़ कर सकते हैं.

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कोर्ट ने कहा, यूं तो धरने का अधिकार सभी नागरिकों के पास है, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका इसलिए लगाई गई थी कि दिल्ली के मुख्यमंत्री ही अपने मंत्रियों के साथ उप-राज्यपाल के घर में धरने पर बैठ गए थे. अगर मुख्यमंत्री धरने पर नहीं बैठते तो यह याचिकाएं भी कोर्ट में नहीं लगाई जातीं. धरना खत्म हो चुका है तो इस पर आगे की सुनवाई की जरूरत हमें नहीं लगती.

इस मामले में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी ने कहा, हम कांग्रेस की तर्ज पर इस तरह की याचिकाओं को लगातार सुनवाई के पक्ष में नहीं हैं. धरना भी खत्म हो चुका है. लिहाजा याचिकाओं पर आगे सुनवाई की जरूरत है या नहीं ये कोर्ट खुद तय करे.

गौरतलब है कि जिन याचिकाओं ने केजरीवाल के धरने के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था. वह धरने की संवैधानिकता और इसको लेकर गाइडलाइंस बनाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका लगा चुके हैं, लेकिन जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी याचिकाकर्ताओं को दोबारा हाईकोर्ट भेज दिया था.

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