दिल्ली में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं और आम आदमी पार्टी लगातार चौथी बार सत्ता में आने के लिए पूरा जोर लगा रही है. हालांकि, विपक्षी दलों ने भी AAP के विजयी रथ को रोकने के लिए मोर्चेबंदी शुरू कर दी है. कांग्रेस ने मंगलवार को दिल्ली में बड़ा ऐलान किया है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने घोषणा की कि पार्टी अगर दिल्ली की सत्ता में आती है तो 400 यूनिट फ्री बिजली दी जाएगी.
दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार 2013 से है. हालांकि, तब AAP को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था और कुल 28 सीटें जीत पाई थी. लेकिन, कांग्रेस के समर्थन से AAP ने केजरीवाल के नेतृत्व में सरकार बना ली थी. उस समय कांग्रेस ने बीजेपी को रोकने के लिए AAP से समझौता कर लिया था और पार्टी के 8 विधायकों ने AAP को बाहर से समर्थन देकर सरकार बनवा दी थी. हालांकि, ये समझौता ज्यादा दिनों तक नहीं चला और 49 दिन में सरकार गिर गई. दिल्ली में 2015 में फिर विधानसभा चुनाव कराए गए और AAP ने प्रचंड बहुमत हासिल किया था.
दिल्ली में AAP ने कांग्रेस से छीनी थी सत्ता
AAP ने 2015 में 67 और बीजेपी ने 3 सीटें जीतीं थीं. दिल्ली में कुल 70 सीटें हैं. 2020 में भी AAP ने 62 सीटें जीतीं और बीजेपी ने 8 सीटों पर जीत हासिल की. लेकिन कांग्रेस का लगातार दूसरी बार खाता नहीं खुल सका था. इससे पहले दिल्ली की गद्दी पर कांग्रेस का कब्जा रहा है. कांग्रेस ने 1998, 2003 और 2008 में लगातार जीत दर्ज की. यहां कांग्रेस की शीला दीक्षित मुख्यमंत्री रहीं. 2013 के चुनाव में AAP ने कांग्रेस से सत्ता छीनी थी.
अब एक बार फिर कांग्रेस सत्ता में आने के लिए जोर लगा रही है. दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने मंगलवार को ऐलान किया है कि अगर कांग्रेस दिल्ली में सत्ता में आती है तो वो हर महीने 400 यूनिट मुफ्त बिजली देंगे.
'कांग्रेस पूरे करती है वादे'
यादव ने यह भी कहा कि डिस्कॉम द्वारा बढ़े हुए बिजली बिलों के जरिए बिजली उपभोक्ताओं को लूटा जा रहा है. कांग्रेस सत्ता में आते ही इस लूट को भी रोकेगी. 400 यूनिट बिजली मुफ्त सुनिश्चित करने के लिए बिजली वितरण कंपनियों को सख्त जांच और संतुलन निर्धारित किया जाएगा. यादव का कहना था कि कांग्रेस ने हर राज्य में अपने सभी चुनावी वादे पूरे किए हैं.
देवेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल दिल्ली में मुफ्त योजनाओं को लागू करने में विफल रहे हैं और उन्होंने सिर्फ बहाने बनाए और उपराज्यपाल और अन्य को दोषी ठहराते रहते हैं.
'केजरीवाल ने सिर्फ वादे किए हैं...'
उन्होंने कहा, केजरीवाल ने दिल्ली को पेरिस और लंदन बनाने का वादा किया था. केजरीवाल ने 2022 के दिल्ली नगर निगम चुनाव से पहले यह भी दावा किया था कि जैसे ही AAP निगम की सत्ता में आएगी तो राष्ट्रीय राजधानी के तीन कूड़े के ढेर साफ कर देगी. हालांकि कूड़ा हर जगह बिखरा रहता है, जिससे लोगों का जीवन दूभर हो गया है.
'दिल्ली में AAP सरकार देती है मुफ्त बिजली'
दिल्ली चुनाव से पहले कांग्रेस का यह ऐलान चर्चा में आ गया है. दिल्ली में AAP के नेतृत्व वाली आतिशी सरकार वर्तमान में प्रति माह 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान करती है. दिल्ली सरकार के लिए यह योजना गेमचेंजर साबित होते आई है. मार्च 2024 में AAP सरकार ने ऐलान किया था कि दिल्ली के उपभोक्ताओं को मिलने वाली फ्री बिजली की सुविधा मार्च 2025 तक जारी रहेगी. AAP सरकार ने इमरजेंसी कैबिनेट बैठक में बिजली सब्सिडी योजना को 31 मार्च 2025 तक के लिए पास कर दिया था.
मार्च 2024 में AAP संयोजक केजरीवाल ने बताया था कि दिल्ली में 24 घंटे बिजली (जीरो पावर कट) और फ्री बिजली 31 मार्च 2025 तक के लिए बढ़ा दी गई है. इसमें वकीलों के चैंबर की फ्री बिजली भी शामिल है. बिजली सब्सिडी को लेकर कई लोगों के मन में संशय था- अगले साल मिलेगी, नहीं मिलेगी? आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि 24 घंटे बिजली और फ्री बिजली सिर्फ दिल्ली और पंजाब में मिलती है. बाक़ी पूरे देश में लंबे लंबे पावर कट लगते हैं और हजारों रुपये के बिजली बिल भरने पड़ते हैं.
AAP सरकार का दावा है कि पिछले 9 साल से सरकार फ्री बिजली दे रही है. दिल्ली इकलौता राज्य है जहां 24 घंटे बिजली आती है और 22 लाख लोगों का बिजली का बिल जीरो आता है. 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त, 400 यूनिट तक बिजली का बिल आधा, दिल्ली के वकीलों, किसानों और 1984 के दंगा पीड़ितों को पिछले साल की तरह इस साल भी मुफ्त बिजली सब्सिडी मिलती रहेगी.
दिल्ली में 58 लाख 86 हजार घरेलू बिजली उपभोक्ता हैं और इनमें से 68.33% उपभोक्ता सब्सिडी का फायदा ले रहे हैं. साल 2023 में लगभग 3 करोड़ 40 लाख उपभोक्ताओं को ज़ीरो बिजली के बिल जारी किए गए थे. दिल्ली सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, इस समय 40 लाख 22 हजार घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी का लाभ मिल रहा है.
क्या रहा दिल्ली की सत्ता का इतिहास?
1998 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 52 सीटें जीतीं थीं. बीजेपी 15 पर सिमट गई थी. 2003 में कांग्रेस को 47 और बीजेपी को 20 सीटें मिली थीं. 2008 में भी कांग्रेस ने 43 सीटों पर जीत हासिल की थी और बीजेपी को सिर्फ 23 सीटें ही मिली थीं.
इससे पहले 1993 में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी और 49 सीटें हासिल की थीं. कांग्रेस ने 14 सीटें जीती थीं. 1983 में कांग्रेस ने सबसे ज्यादा 34 और बीजेपी ने 19 सीटें जीती थीं.