स्वच्छ गंगा योजना की संभावनाओं और चुनौतियों पर चर्चा के लिए गंगा सम्मेलन का आयोजन किया गया. शुक्रवार को दिल्ली के हैबिटैट सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में सरकारी संस्थाओं और उद्योग जगत के डेढ़ सौ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.
आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर डॉ. विनोद कारे सम्मेलन के अध्यक्ष थे. स्वच्छ गंगा अभियान और गंगा नदी बेसिन प्रबंधन पर बोलते हुए डॉ. तारे ने सिनर्जी पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि देश के जल संसाधनों का मिशन के विकास और प्रबंधन की दिशा में इस्तेमाल करना चाहिए.
सम्मेलन में पानी की क्वालिटी परीक्षण और निगरानी, सीवेज, इफ्युलेंट ट्रीटमेंट और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज की नई टेक्नोलॉजी के बारे में बताया गया. इसके साथ ही पैनल डिस्कशन का आयोजन भी किया गया. इस पैनल डिस्कशन में बतौर मुख्य वक्ता विश्व बैंक की जल और स्वच्छता विशेषज्ञ पूनम अहलुवालिया, एनजेएस इंजीनियर्स इंडिया के एमडी उदय केलकर और कनाडा हाई कमीशन की ट्रेड कमिश्नर टीना शीह मौजूद थीं.
सम्मेलन में ‘स्वच्छ गंगा अभियान और संभावनाएं’ नाम की पत्रिका भी लॉन्च की गई. इसमें स्वच्छ गंगा अभियान से जुड़ी नीतियों, अभियान के अपडेट और चुनौतियों के बारे में जानकारी दी गई है.
ईए वॉटर प्राइवेट लिमिटेड की ओर आयोजित इस कार्यक्रम में नीदरलैंड के राजदूत अलफोनसुस, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष ए.बी. पांड्या, अपर यमुना बोर्ड के अपर सचिव एच.के.साहू और ईए वॉटर प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य संचालन अधिकारी एच. सुब्रहमण्यम भी मौजूद थे.