दिल्ली में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. ऐसे में लोगों के बीच दिल्ली के बाजार बंद होने को लेकर चर्चा थी. अब इस पर स्थिति साफ हो गई है और फिलहाल राजधानी दिल्ली के बाजार खुले रहेंगे. दिल्ली में कोरोना की मौजूदा स्थिति पर देश के गृह मंत्री अमित शाह की मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और एलजी अनिल बैजल के साथ बैठक भी हुई थी.
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कोरोना के चलते किसी बाजार में स्थिति अगर चिंताजनक होती है तो बाजार के विषय में ऑड-ईवन या हफ्ते में चार दिन दुकानें खोलने का निर्णय भी व्यापारी संगठन ले सकते हैं. फिलहाल बाजारों को पहले की तरह खोलने का निर्णय दिल्ली के व्यापारी नेताओं की एक वीडियो कॉन्फ्रेंस में लिया गया जिसमें लगभग 275 व्यापारी नेता शामिल थे.
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कारोबारी संगठन कंफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा, 'दिल्ली में बढ़ते कोरोना मामलों और मेडिकल परीक्षण की दयनीय स्थिति पर नियंत्रण के लिए गृह मंत्री अमित शाह द्वारा कई कदम उठाए गए. इससे दिल्ली के व्यापारियों को बहुत उम्मीद है कि जल्द ही दिल्ली में स्थिति सुधरेगी.'
व्यापारी संगठन स्थिति के हिसाब से लेंगे निर्णय
राजधानी दिल्ली में स्वास्थ्य सुविधाओं की जबरदस्त किल्लत और इलाज से परेशान लोगों की स्थिति पर कैट ने अमित शाह, अनिल बैजल, शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी और अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखा है. पत्र में कोरोना के खिलाफ एक मजबूत चिकित्सा व्यवस्था स्थापित करने का आग्रह किया था और व्यापारियों की परेशानियों से अवगत कराया था.
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प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि पिछले 10 दिनों में दिल्ली की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई थी और खासतौर पर जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जुलाई तक दिल्ली में 5.32 लाख केस हो जाएंगे और उसको लेकर न केवल व्यापारियों में बल्कि आम लोगों में भी कोरोना को लेकर भय व्याप्त हो गया था.
खंडेलवाल ने संतोष व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने समय रहते हस्तक्षेप किया जिसके चलते गृह मंत्री शाह ने कोरोना वायरस पर निगाह रखने, कोरोना परीक्षण को बढ़ाने के लिए घोषित कदम निश्चित रूप से फायदेमंद साबित होंगे और साथ ही केंद्र सरकार की संयुक्त देखरेख में अस्पताल और चिकित्सा सुविधाओं के बढ़ने से कोविड रोगियों के लिए सुविधाओं में तेजी आएगी.
30 जून तक बंद हैं कई बाजार
खंडेलवाल ने आगे कहा कि कुछ बाजारों ने 30 जून तक पूरी तरह से बंद करने का पहले ही फैसला लिया हुआ है, कुछ बाजार वैकल्पिक दिनों में काम कर हैं जबकि कुछ सप्ताह में 4 दिन काम करना चाहते हैं या ऑड-ईवन को अपनाया हुआ है. प्रत्येक थोक या खुदरा बाजार में ग्राहक प्रवाह के संदर्भ में अलग-अलग गतिशीलता है और प्रत्येक मार्केट को अपने हिसाब से बाजार में सुरक्षा के उपाय अपनाने हैं, इस बात को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक व्यापारी संगठन अपने बाजार की स्थिति के हिसाब से समय से निर्णय लेगा.
वहीं, कैट के संयोजक बृजेश गोयल ने कहा कि बाजार बंद करने का निर्णय दिल्ली सरकार पर छोड़ने की सहमति बनी. 170 में से 157 संगठनों के प्रतिनिधियों का मत था कि दुकानें खुली रहनी चाहिए, जबकि 13 संगठन बाजार बंद करने के पक्ष में थे. उन्होंने कहा कि अधिकतर प्रतिनिधियों ने दोबारा बंद होने पर नुकसान नहीं झेल पाने का तर्क दिया, वहीं कई का कहना था कि अब बंद की स्थिति में बचे मजदूर भी लौट जाएंगे. इन्हें रोकना मुश्किल हो जाएगा. गोयल ने कहा कि व्यापारियों का ये भी कहना था कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के दुकानदारों को अभी दुकान नहीं जाना चाहिए.