दिल्ली में कोरोना संकट से उबरने के लिए लॉकडाउन लगातार बढ़ाया जा रहा है. लॉकडाउन में राशन की दुकानों पर अनाज बांटने की मुहिम को तेज करते हुए केंद्र सरकार ने राशन की दुकानों को महीने के सभी दिन और देर रात खोलने का निर्देश भले दिया हो लेकिन इस मुहिम को दिल्ली में झटका लगा है.
राजधानी दिल्ली के सर्किल 63 सीमापुरी के 42 कोटाधारकों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है. इनकी ओर से संचालित राशन की दुकानों से करीब 30,000 लोग राशन ले रहे थे.अब केंद्र और दिल्ली सरकार का वितरण के लिए रखा राशन डंप पड़ा है.
दिल्ली सरकारी राशन कार्ड डीलर संघ के सचिव विनोद पाल ने कहा, 'मैं घर में अकेला कमाने वाला हूं. जब तक कोरोनाकाल है तब तक मैनुअल राशन वितरण की छूट दे दी जाए. पिछले महीने बायोमेट्रिक मशीन से राशन बांटा गया था तो कई दुकानदारों की मांग थी कि जब तक कोरोना राजधानी में कंट्रोल में न हो तब तक मैनुअल राशन बांटा जाए.'
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संक्रमण फैलने का खतरा
दरअसल ई-पॉश मशीन की एक बायोमेट्रिक प्रणाली है, जिसके अंतर्गत सीमापुरी विधानसभा का कोई भी राशन कार्ड धारी किसी भी दुकान से राशन ले सकता है. वन नेशन वन राशन कार्ड प्रणाली के तहत दिल्ली से बाहर का भी कोई शख्स राशन ले सकता है. विरोध इस बात को लेकर है कि दुकानदार अंगूठे के जरिए पहले मशीन खोलेगा. डर है कोई संक्रमित अंगूठा लगाता है तो पीछे वाला संक्रमित न हो जाए.
'जीवन रहेगा तो होगा व्यापार'
70 विधानसभा के 69 सर्किल में राशन के मैनुअल वितरण की मंजूरी है. कोटेदारों का कहना है कि जब सरकारी विभागों में बायोमेट्रिक हाजिरी तक बंद कर दी गई है तो कोटाधारकों और राशनकार्ड धारकों की जान क्यों जोखिम में डाली जा रही है? कोटाधारकों का यह भी आरोप है कि खाद्यमंत्री और उपराज्यपाल को पत्र लिखने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई है, लिहाजा सामूहिक इस्तीफा जीवन को बचाने के लिए उठाया गया कदम है. क्योंकि जीवन रहेगा तभी व्यापार भी कर सकेंगे. आपको बता दें कि राशन कार्ड धारकों को गेहूं चावल फ्री दिया जा रहा है.
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