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दिल्ली: ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बेचने के नाम पर करते थे ठगी, पुलिस ने आरोपियों को ऐसे किया गिरफ्तार

दिल्ली में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के नाम पर ठगी करने वाले 3 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. आरोपी नकली दवाइयां और जीवन रक्षक उपकरणों को महंगे दामों में बेच रहे थे. इन आरोपियों के अलग-अलग बैकों में एकाउंट है, जिन्हें पुलिस ने फ्रीज कर दिया है.

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कोरोना काल में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की बढ़ी मागं.
कोरोना काल में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की बढ़ी मागं.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मार्केट में बेचते थे महंगी दवाइयां
  • जीवन रक्षक उपकरणों की कालाबाजारी
  • पुलिस ने बैंक खातों को भी कराया सीज

दिल्ली में राजौरी गार्डन थाना पुलिस ने 3 ऐसे आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो कोरोना काल में जीवन रक्षक उपकरणों के नाम पर धांधली करते थे. पुलिस ने नकली दवा बेचने और महंगे दामों पर जरूरी सामान बेचने वालों को गिरफ्तार किया है. पुलिस को मिली जानकारी के मुताबिक आरोपियों के अलग-अलग 6 बैंकों में खाते थे, जिन्हें फ्रीज करा दिया गया है.

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आरोपियों के पास से पुलिस ने 2 डेबिट कार्ड और डेढ़ लाख कैश बरामद किया है. पुलिस का कहना है कि सभी आरोपी एक लाख से ज्यादा मूल्य के मोबाइल फोन्स का इस्तेमाल कर रहे थे. ये मोबाइल भी ठगी के पैसे से खरीदे गए थे.

दरअसल दिल्ली पुलिस से प्रभजीत सिंह नाम के एक शख्स ने शिकायत की थी कि उन्हें व्यापार के लिए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की जरूरत थी. इसी दौरान उनकी मुलाकात कुछ लोगों से हुई, जिन्होंने खुद को एक मेडिकल एजेंसी का मैनेजर और एग्जीक्यूटिव के तौर पर पेश किया. प्रभजीत ने पुलिस को बताया कि उनके साथ उनकी 35 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की डील फाइनल हुई. यह डील कुल 27 लाख 50 हजार में फाइनल की गई.

ऑनलाइन ट्रांसफर हुए 12 लाख!

डील हो जाने के बाद आरोपियों ने शिकायकर्ता से ऑनलाइन पेमेंट के जरिए 12 लाख रुपये एडवांस ले लिए. पेमेंट के बाद भी जब तय वक्त में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर नहीं मिले तो प्रभजीत ने उन पर दबाव बनाया. उसी वक्त उनका फोन स्विच ऑफ हो गया. प्रभजीत की शिकायत पर दिल्ली के राजौरी गार्डन थाने में एसएचओ अनिल शर्मा ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी.

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जांच के दौरान पुलिस ने बैंक एकाउंट का डिटेल और मोबाइल नंबर के बारे में जानकारी हासिल की. पुलिस को पता लगा कि ठगी की रकम को तुरंत एक यूपीआई एकाउंट में ट्रांसफर किया गया, और फिर अलग अलग एटीएम से कैश निकाल लिया गया. जांच में पुलिस को 22 मोबाइल नंबर की भी जानकारी मिली. 

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पुलिस की गिरफ्त में खड़े आरोपी.

कैसे हुई आरोपियों की गिरफ्तारी?

पुलिस ने 22 मोबाइल नंबरों की जांच की तो फिर एक नंबर के जरिये वो सिरसा में एक आरोपी तक पहुंच गए. पुलिस के मुताबिक पकड़ में आने के बाद आरोपी ने अपना जुर्म कबूल लिया और अपने साथियों के नाम भी पुलिस को बता दिए. जानकारी के आधार पर पुलिस ने दूसरे आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया. दोनों के पास से एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं. पूछताछ में पता लगा कि ठगी के लिए बैंक एकाउंट नवीन नाम के शख्स ने मुहैया कराया था. 

पुलिस को खबर मिली कि नवीन चंडीगढ़ में एक होटल में छिपा है, जिसके बाद पुलिस की टीम चंडीगढ़ पहुंची और 30 होटलों में पड़ताल की तो कोई सुराग नहीं मिला. पुलिस ने वहीं पर 48 घंटे तक नजर बना कर रखी फिर पुलिस को नवीन सड़क पर घूमता दिखाई दिया. पुलिस ने नवीन को भी पकड़ लिया. पुलिस को इस मामले में अभी 2 और आरोपियों की तलाश है. मामले की जांच जारी है.

ब्लैक फंगस के काले कारोबारी गिरफ्तार!

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नकली ब्लैक फंगस में इस्तेमाल होने वाले लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन बनाने और बेचने के आरोप में 2 डॉक्टरों सहित 7 लोगों को गिरफ्तार किया है. इनके पास से नकली दवाइयां भी बरामद की गई हैं. निजामुद्दीन में डॉ. अल्तमस हुसैन के आवास से नकली 'इंजेक्शन' 3293 शीशिया भी बरामद की गई हैं.
 

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