कोरोना वायरस की महामारी के कारण देश में लॉकडाउन लागू है. मिल-फैक्ट्रियां बंद हैं, तो रोजी-रोजगार भी. ऐसे में रोज कमाकर खाने वालों के सामने रोटी का संकट पैदा हो गया है. इस संकट में उम्मीद की किरण बना सब्जी का व्यवसाय. आवश्यक वस्तुओं में शामिल सब्जी भी उस सूची में शामिल है, जो लॉकडाउन से अप्रभावित है. ऐसे दिहाड़ी मजदूरों ने सब्जी के ठेले लिए और व्यापार शुरू भी कर दिया, लेकिन यह भी उनके लिए इतना आसान नहीं है.
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की कई कॉलोनियों में सब्जी बेचने वालों से आधारकार्ड मांगा जा रहा है. उनका नाम पूछा जा रहा है. आरडब्ल्यूए से जुड़े लोग आधार चेक करते हैं, इसके बाद ही इन्हें कॉलोनियों में जाने दिया जा रहा. ठेले पर सब्जी और फल बेचने वाले साहिल खान ने बताया कि पहले कोई दिक्कत नहीं होती थी, पर कुछ दिनों से पूछताछ बढ़ गई है. कोई नाम पूछता है तो उसके बाद कॉलोनी में घुसने नहीं देता. कभी कोई आधार कार्ड मांगता है.इस संबंध में पूर्वी दिल्ली के कृष्णा नगर आरडब्ल्यूए अध्यक्ष वीएस वोहरा ने सांप्रदायिकता की भावना को वजह मानने से इनकार करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले कुछ वीडियो वायरल हुए. इसके बाद ही हम एक्टिव हुए ताकि ऐसी कोई घटना न हो और कोरोना के संक्रमण से बचा जा सके. उन्होंने कहा कि अतिरिक्त सावधानी इसलिए बरती जा रही है क्योंकि लोगों में डर है. आरडब्ल्यूए के सदस्यों ने कहा कि यह एमसीडी को देखना चाहिए कि जो लोग सब्जियां लेकर बेचने आ रहे हैं, उनसे किसी तरह का खतरा तो नहीं. वे कहां से आ रहे हैं.
लोग डर की वजह बताते हुए कह रहे हैं कि कहीं सब्जी विक्रेता हॉटस्पॉट एरिया से न आ आ रहा हो. गौरतलब है कि कुछ समय पहले दिल्ली का ही एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें सब्जी विक्रेताओं का धर्म पूछकर उन्हे कॉलोनी में एंट्री दी जा रही थी. तब पुलिस ने इस सिलसिले में मामला भी दर्ज किया था. बता दें कि दिल्ली में कोरोना पीड़ितों की तादाद और हॉटस्पॉट की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है.