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द‍िल्ली: साल में 200 दिन खतरनाक प्रदूषण, दीवाली तक होगी हालत गंभीर

पड़ोसी राज्यों से आने वाली खराब हवा दिल्ली के प्रदूषण को बढ़ाती है लेकिन यहां वाहनों से निकलने वाले धुएं से सबसे ज्यादा प्रदूषण होता है. इतना ही नहीं सैटेलाइट से ली गई तस्वीरें भी ये दिखाती हैं कि ठंड का मौसम आने के साथ द‍िल्ली में प्रदूषण बढ़ रहा है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर ( Photo:aajtak)
प्रतीकात्मक तस्वीर ( Photo:aajtak)

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ठंड शुरू होते ही पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के किसानों के पराली जलाने से दिल्ली का दम घुटना शुरू हो जाता है. दशहरे पर रावण का पुतला तो जल जाता है लेकिन दम घुटाने वाला धुआं दिल्ली के लोगों में घुटन बढ़ाता है. वहीं, दीवाली पर पटाखे पूरी तरह से दिल्ली को गैस चैंबर में बदल देते हैं. यही वजह है कि दिल्ली में हर साल करीब 200 दिन (करीब 65 प्रतिशत) प्रदूषण खतरनाक होता है.

इस प्रदूषण पीछे व्हीकल, डस्ट, इंडस्ट्री पॉल्यूशन के साथ ही पराली जलाने की वजह से होने वाला पॉल्यूशन भी शामिल है. पॉल्यूशन की मुख्य वजह कंस्ट्रक्शन और डिमोलिशन के साथ सड़क पर मौजूद डस्ट है. 25 से 30 प्रतिशत पॉल्यूशन, गाड़ियों के कारण होता है.

पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण-संरक्षण प्राधिकरण (ईपीसीए) के मुताबिक दिल्ली में उसे हर रोज कूड़ा और प्लास्टिक के जलने की सैकड़ों शिकायतें मिल रही हैं. साथ ही ईपीसीए और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने ये पाया है कि नरेला और नॉर्थ वेस्ट दिल्ली के बवाना में लगातार कूड़े के ढेरों को जलाया जा रहा है जिससे निकलने वाला जहरीला धुआं लगातार दिल्ली को प्रदूषित कर रहा है. इतना ही नहीं सैटेलाइट से ली गई तस्वीरें भी ये दिखाती हैं कि द्वारका में भी बड़ी मात्रा में कूड़ा जल रहा है और ये कूड़ा बीते 15 दिन से लगातार जल रहा है.

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दिल्ली में आजकल एक्यूआई यानि एयर क्वालिटी इंडेक्स का लेवल पूअर और वैरी पूअर कैटेगरी में होने के बाद दिल्ली में ग्रेडेड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान लागू है जिसके बाद शहर में जेनसेट नहीं चलाए जा सकते.

क्या कहते हैं पर्यावरणविद्

पर्यावरणविद्  विमलेंदु झा का कहना है क‍ि दिल्ली की भौगोलिक स्थिति ऐसी है क‍ि पड़ोसी राज्यों से आने वाली खराब हवा दिल्ली के प्रदूषण को बढ़ाती है लेकिन यहां वाहनों से निकलने वाले धुएं से सबसे ज्यादा प्रदूषण होता है. सरकार इस दिशा में कुछ नहीं कर रही है. दिल्ली में मेट्रो का किराया बढ़ चुका है और सार्वजनिक परिवहन हड़ताल और नीतिगत फैसलों के अभाव में दम तोड़ रहे हैं. अदालती चाबुक पड़ते ही सरकारें ऑड-ईवन लागू कर देती हैं पर असल में नतीजा सिफर ही रहता है. दिल्ली में पिछले 3 सालों में करीब 17 हजार पेड़ काटे जाने से दिल्ली इस वक्त ICU में है.

विमलेंदु आगे बताते हैं क‍ि नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम पर करीब 1 साल से काम हो रहा है लेकिन वो अभी ड्राफ्ट के ही लेवल पर है. इसके तहत राज्य सरकारों को ये सलाह दी जाएगी की वो अपने राज्य में साल में 35 प्रतिशत और 5 साल में 50 प्रतिशत पॉल्यूशन कम करें. 

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