उत्तरकाशी की सिल्कयारा टनल से 41 जंदगियां बचाने वाले रैट माइनर वकील हसन का आशियाना दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने बुधवार (28 फरवरी) को गिरा दिया था. ऐसे आरोप रैट माइनर की ओर से लगाए गए थे. इस पर हल्ला मचने के बाद DDA ने अपनी सफाई पेश की है. डीडीए ने कहा कि 2016 में दिल्ली विकास प्राधिकरण ने अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान खजूरी खास गांव में खसरा नंबर 247/1 से अपने 3 भूमि पार्सल को अतिक्रमण से मुक्त कराया था. फिर 2017 में DDA ने निरीक्षण के दौरान पाया कि वकील और गोयल नाम के व्यक्तियों ने फिर से 3 जमीनों में से 2 पर अतिक्रमण कर रहे थे. इस गंभीर उल्लंघन की पुलिस को सूचना दी गई, लिहाजा डीडीए ने जून 2018 के लिए निर्धारित अतिक्रमण हटाओ कार्यक्रम शुरू कर दिया.
हालांकि टीम जब अतिक्रमण हटाने के लिए पहुंची तो उसे काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा. अतिक्रमणकारियों के रूप में पहचाने जाने वाले परिवार ने इसका विरोध किया. DDA ने बताया कि अतिक्रमण की अनुमति देने के लिए दोषी अधिकारियों से स्पष्टीकरण भी मांगा गया था.
रैट माइनर की जानकारी में थी पूरी प्रक्रिया:DDA
DDA का कहना है कि सितंबर 2022 और दिसंबर 2022 में फिर से अतिक्रमण हटाने की योजना बनाई गई थी. अभियान के प्रयासों को एक बार फिर परिवार की महिलाओं ने विफल कर दिया, खुद को शारीरिक नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया और परिसर के भीतर खुद को रोककर आत्मदाह की धमकी दी. प्राधिकरण ने कहा कि डीडीए द्वारा संबंधित अवैध संपत्ति को गिराने की बात वकील हसन और उनके परिवार की जानकारी में थी. 2022 में अतिक्रमण हटाने के प्रयास के समय यह भी पता चला कि 2 अतिक्रमणकारियों में से एक यानी गोयल ने अतिक्रमण के अपने हिस्से के लिए अदालत से विध्वंस के खिलाफ कानूनी रोक प्राप्त कर ली थी. जिस स्थल पर विध्वंस किया गया है, उसके आसपास का अवैध निर्माण श्रीराम कॉलोनी, राजीव नगर के अंतर्गत आता है. जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (अनधिकृत कॉलोनियों में निवासियों के संपत्ति अधिकारों की मान्यता) विनियम, 2019 के तहत अधिसूचित है.
'वकील हसन से अवैध निर्माण खाली करने को कहा'
डीडीए ने कहा कि अतिक्रमण को हटाने के लिए 28 फरवरी 2024 को एक अभियान चलाया गया था. जिसके लिए डीडीए द्वारा पुलिस से सहायता भी मांगी गई थी. 28 फरवरी को डीडीए की टीम स्थानीय पुलिस के साथ मौके पर पहुंची. इस दौरान रैट माइनर वकील हसन के परिवार को सूचित किया और उनसे अतिक्रमित क्षेत्र को खाली करने का अनुरोध किया. वकील को अतिक्रमित संरचना से अपना सामान हटाने के लिए पर्याप्त समय देने के बाद डीडीए द्वारा अवैध निर्माण को गिरा दिया गया.
'रैट माइनर के योगदान की जानकारी नहीं थी'
डीडीए ने कहा कि अभियान से पहले या उसके दौरान किसी भी समय डीडीए अधिकारियों को उत्तराखंड की सिलक्यारा टनल में फंसे मजदूरों के रेस्क्यू ऑपरेशन में रैट माइनर वकील हसन के हालिया योगदान की जानकारी नहीं थी. देर शाम जब इस बात का पता चला तो डीडीए के अधिकारियों ने वकील हसन और उनके परिवार के लिए आश्रय की वैकल्पिक व्यवस्था करने के बाद मौके पर जाकर उनसे संपर्क किया. वकील हसन ने प्रस्तावित किसी भी राहत का लाभ उठाने से इनकार कर दिया और उसी स्थान पर या उसी के आसपास किसी भी स्थान पर एक स्थायी घर की मांग की. विवाद खत्म करने के लिए डीडीए के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी हस्तक्षेप किया और देर रात साइट पर गए, लेकिन समाधान नहीं निकला. डीडीए ने कहा कि वकील हसन को यह पता था कि इस अतिक्रमण को पहले 2016 में हटा दिया गया था और उसने 2017 में जमीन पर फिर से अतिक्रमण कर लिया था.
'अभियान में किसी को टारगेट नहीं किया'
दिल्ली विकास प्राधिकरण ने कहा कि यह अतिक्रमण हटाने का नियमित अभियान था. डीडीए ने किसी विशेष व्यक्ति को टारगेट नहीं किया है. सिल्कयारा टनल में फंसे मजदूरों को बचाने में वकील हसन के योगदान के बारे में जानने के बाद डीडीए ने परिवार की मदद के लिए हाथ बढ़ाया. डीडीए ने इस बात पर जोर दिया कि वकील हसन का अतिक्रमण गैरकानूनी था. साथ ही कहा कि डीडीए का अभियान गैर-भेदभावपूर्ण हैं. डीडीए कानून को बनाए रखने और अदालती आदेशों के अनुसार आगे के अवैध निर्माणों को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है. हालांकि वकील हसन के योगदान के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए उनके परिवार की सहायता करने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं.