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जैन समाज का डेलिगेशन राष्ट्रपति भवन में ज्ञापन देकर लौटा, प्रदर्शनकारियों से वापस जाने की अपील

झारखंड के गिरिडीह जिले में पारसनाथ पहाड़ियों पर स्थित सम्मेद शिखरजी जैन समुदाय का सबसे बड़ा तीर्थ है. समुदाय के सदस्य पारसनाथ हिल्स में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के राज्य सरकार के कदम का विरोध कर रहे हैं. सम्मेद शिखरजी को लेकर देशभर में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों की जड़ हाल ही में केंद्र और झारखंड सरकार की ओर से जारी किया गया एक नोटिस है.

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पारसनाथ हिल्स में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का विरोध हो रहा है
पारसनाथ हिल्स में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का विरोध हो रहा है

झारखंड में जैन तीर्थस्थल श्री सम्मेद शिखरजी को पर्यटन स्थल में बदलने का फैसला वापस लेने की मांग को विरोध प्रदर्शन जारी है. इस बीच रविवार को दिल्ली में बड़ी संख्या जैन समाज के लोगों ने ज्ञापन देने के लिए राष्ट्रपति भवन की तरफ कूच किया. हालांकि उन्हें दिल्ली पुलिस ने बीच में ही रोक दिया. जिसके बाद जैन समाज के डेलिगेशन को ही सिर्फ ज्ञापन देने के लिए भेजा गया. जहां से वह वापस लौट आया है. ज्ञापन देकर लौटे लोगों का कहना है कि प्रशासन ने उन्हें काफी सहयोग किया है. अब सभी प्रदर्शनकारी अपने घर जाएं. जिसके बाद दिल्ली में एकत्रित लोग वापस लौटने लगे हैं.

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दरअसल, झारखंड के गिरिडीह जिले में पारसनाथ पहाड़ियों पर स्थित सम्मेद शिखरजी जैन समुदाय का सबसे बड़ा तीर्थ है. समुदाय के सदस्य पारसनाथ हिल्स में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के राज्य सरकार के कदम का विरोध कर रहे हैं. सम्मेद शिखरजी को लेकर देशभर में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों की जड़ हाल ही में केंद्र और झारखंड सरकार की ओर से जारी किया गया एक नोटिस है. इसमें सम्मेद शिखरजी को पर्यटन स्थल बनाने की बात कही गई है. जैन समाज के लोगों ने सरकारों की ओर से जारी नोटिस को अपनी धार्मिक भावनाओं पर कुठाराघात बताते हुए इसके विरोध में मोर्चा खोल दिया है.

जैन समाज क्यों कर रहा विरोध? 

जैन धर्म के लोग कह रहे हैं कि इसे पर्यटन क्षेत्र बनाया जाता है तो पर्यटकों के आने की वजह से यहां मांस, शराब का सेवन भी किया जाएगा. अहिंसक जैन समाज के लिए अपने पवित्र तीर्थक्षेत्र में ऐसे कार्य असहनीय हैं. सरकार की ओर से जारी की गई अधिसूचना में मछली और मुर्गी पालन के लिए भी अनुमति दी गई है. छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने की भी बात कही गई है.

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