देश की राजधानी दिल्ली में G-20 शिखर सम्मेलन की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. मेहमानों के खाने-पीने की व्यवस्था के भी स्पेशल इंतजाम किए गए हैं. होटलों में स्पेशल व्यंजनों के साथ-साथ खास तरह के क्रॉकरी सेट का इंतजाम किया गया है. मेहमानों को चांदी और सोने को तस्तरी में खाना परोसा जाएगा जिसमें भारत की संस्कृति और विरासत की झलक देखने को मिलेगी.
इन बर्तनों को बनाने वाली कंपनी के मुताबिक, उनकी कंपनी 11 होटलों में बर्तन भिजवा रही है जिसमे आईटीसी ताज भी शामिल है. इससे पहले जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा जब भारत आए थे तो उन्हें खाने के साथ-साथ भारतीय क्रॉकरी इतनी पसंद आई थी कि वो उसे अपने साथ लेकर चले गए थे.
आइरिस कंपनी के मालिक राजीव और उनके बेटे ने बताया कि कुल 3 पीढ़ियों से वो बर्तन बनाने का काम कर रहे हैं जिसमें पूरे भारत की झलक नजर आती है. उनका मकसद विदेशी मेहमानों को भारत की एक झलक एक टेबल पर दिखाने का है. उनके बर्तनों में जयपुर, उदयपुर, बनारस से लेकर कर्नाटक को नक्काशी नजर आती है जिसे बनाने में कई दिन लगते हैं. इन बर्तनों की खासियत ये है कि ये पूरी तरह से 'मेक इन इंडिया' थीम के अंतर्गत आते हैं. कुल 15 हजार बर्तनों का ऑर्डर उन्हें मिला था.
#WATCH | Delhi: Delegates of the G20 Summit to be served in silverware and gold utensils pic.twitter.com/1f2Zm0wGTL
— ANI (@ANI) September 6, 2023
'लैब में टेस्ट होते हैं बर्तन'
बर्तनों को बनाने के बाद उसे आर एंड डी लैब में टेस्ट किया जाता है इसके बाद जिस होटल की जैसी मांग होती है उस हिसाब से ही डिजाइन किया जाता है. जैसे महाराजा थाली के हिसाब से 5 से 6 कटोरी, कांटा, चम्मच, नमक और पेपर के लिए अलग से चांदी का डब्बा होगा. ये बर्तन आईटीसी मौर्य में भी इस्तेमाल किए जाते हैं.
इन बर्तनों में भारत नजर आता है. ये क्रॉकरी सेट भारतीय संस्कृति और विरासत को दर्शाता है. इस क्रॉकरी सेट में देश के राष्ट्रीय पक्षी मोर का इस्तेमाल किया गया है और ये मेहमानों को काफी पसंद आता है. जी-20 के लिए महराजा थाली के डिजाइन है साथ ही दक्षिण भारत से भी कुछ डिजाइन लिए गए हैं.
'भारत की विलुप्त हो रही विरासत को दिखाया है'
बता दें, अलग-अलग होटल के शेफ्स ने अपने मेन्यू तय किए हैं. उसी हिसाब से बर्तन डिजाइन किए हैं. यानि मेन्यू को देखते हुए बर्तन डिजाइन किए है. G-20 के लिए इस डिजाइन को बनाने के लिए काफी वक्त भी लगा है क्योंकि ये काफी यूनिक हैं. इन बर्तनों के जरिए भारत कि विरासत को दिखाया जा रहा है जो विलुप्त हो रही है.