दिल्ली सरकार की ओर से सोमवार को बुलाया गया विशेष सत्र कई मायनों में खास हो सकता है, क्योंकि आम आदमी पार्टी सरकार ने जो विशेष सत्र बुलाया है उसके पहले ही दिन नए बने मुख्य सचिव विजय देव निशाना बन सकते हैं.
दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर हुए मिर्ची अटैक और चुनाव आयोग के साथ मिलकर बीजेपी की ओर से दिल्ली के 30 लाख वोटरों के नाम हटाए जाने के मसले पर भी चर्चा होगी और विरोध भी दर्ज करवाया जाएगा. नए बने विजय देव ही मुख्य सचिव बनने से पहले दिल्ली चुनाव आयोग के CEO थे और केजरीवाल सरकार के पांचवें मुख्य सचिव भी होंगे. इससे पहले के चार मुख्य सचिव पर केजरीवाल सरकार लगातार निशाना साधती रही है.
सत्र में निशाने पर आ सकते हैं मुख्य सचिव
दिल्ली सरकार का ये विशेष सत्र चुनाव आयोग को लेकर भी है, जहां आम आदमी पार्टी लगातार आरोप लगा रही है कि चुनाव आयोग बीजेपी के साथ मिलकर 30 लाख वोटरों के नाम काट दिए हैं यानी आरोप विजय देव पर भी लग रहे थे. इस विशेष सत्र में सत्ता पक्ष ने उन्हें घेरने का प्रयास किया तो माना जाएगा कि पहले दिन से ही सरकार ने मुख्य सचिव से झगड़ा मोल ले लिया है.
इससे पहले भी चारों मुख्य सचिव से केजरीवाल के रिश्ते अच्छे नहीं रहे. पार्टी और केजरीवाल लगातार मुख्य सचिव पर उंगली उठाती रही है. ऐसे में चुनाव आयोग के बहाने ही मुख्य सचिव सत्र के दिन ही निशाने पर आ सकते हैं.
कपिल मिश्रा ने की DTC कर्मचारियों की मांगों पर चर्चा का प्रस्ताव
तो वहीं आम आदमी पार्टी के बागी विधायक कपिल मिश्रा ने विधानसभा स्पीकर राम निवास गोयल को पत्र लिखा है और सत्र में बोलने का निवेदन किया है. कपिल मिश्रा ने पत्र में कहा है कि सोमवार को कुछ चर्चा दिल्ली के मुद्दों पर भी की जाए. विधानसभा का सदस्य होने के नाते मेरा प्रस्ताव है कि इस सत्र में एक विशेष चर्चा DTC कर्मचारियों की मांगों पर की जाए. साथ ही विधानसभा समान काम समान वेतन को लागू करे. कपिल ने आग्रह किया कि सभी अस्थायी कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित करने का संकल्प भी पारित किया जाए.
प्रदूषण पर श्वेत पत्र रखने का प्रस्ताव
कपिल मिश्रा का दूसरा प्रस्ताव है कि विधानसभा में बढ़ते प्रदूषण और सरकार का क्या एक्शन प्लान है, इस पर एक श्वेत पत्र सरकार द्वारा रखा जाए. कपिल का तीसरा प्रस्ताव है कि दिल्ली विधानसभा में दिल्ली में बांग्लादेशी और रोहिंग्या की कितनी संख्या है, इस पर सरकार को आकंड़े जारी करने को कहा जाए.