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तीन राज्य मिलकर बुझाते हैं दिल्ली की 'प्यास'... जानें केजरीवाल क्यों मांग रहे और पानी?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से पानी का कोटा बढ़ाने की मांग की है. उन्होंने मांग की कि दिल्ली की ढाई करोड़ आबादी की जरूरत को पूरा करने के लिए 130 करोड़ गैलन पानी हर दिन दिया जाए. ऐसे में जानना जरूरी है कि आखिर क्यों दिल्ली को और पानी की जरूरत पड़ रही है? उसे कहां-कहां से पानी मिलता है? और पानी की जरूरत पूरा करने के लिए केजरीवाल सरकार ने क्या किया?

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दिल्ली में हर साल पानी का संकट खड़ा हो जाता है. (फाइल फोटो- PTI)
दिल्ली में हर साल पानी का संकट खड़ा हो जाता है. (फाइल फोटो- PTI)

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से दिल्ली का पानी का कोटा बढ़ाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि दिल्ली की ढाई करोड़ आबादी के लिए 130 करोड़ गैलन पानी हर दिन दिया जाए.

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केजरीवाल ने कहा, 1997-98 में जब दिल्ली की आबादी 80 लाख के आसपास थी, तब हर दिन 80 से 85 करोड़ गैलन पानी हर दिन मिलता था. और अब जब आबादी ढाई करोड़ पहुंच गई है तब भी उतना ही पानी दिया जा रहा है. 

उन्होंने कहा कि अगर हर दिन 130 करोड़ गैलन पानी मिल जाता है तो दिल्लीवालों को चौबीसों घंटे पानी उपलब्ध करवाया जा सकेगा. एक गैलन में 4.5 लीटर पानी होता है.

पर सवाल खड़ा होता है कि क्यों दिल्ली को केंद्र से पानी मांगना पड़ रहा है? तो इसकी वजह है दिल्ली का लैंडलॉक स्टेट होना. यानी, चारों ओर से जमीन से घिरा हुआ. दिल्ली का अपना कोई पानी का बड़ा सोर्स नहीं है. उसे पानी के लिए उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा पर निर्भर होना पड़ता है. इसमें भी सबसे बड़ा हिस्सा हरियाणा का है.

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दिल्ली को कहां-कहां से मिलता है पानी?

दिल्ली को हरियाणा सरकार यमुना नदी से, उत्तर प्रदेश सरकार गंगा नदी से और पंजाब सरकार भाखरा नांगल से पानी की सप्लाई करती है.

दिल्ली सरकार के आर्थिक सर्वे के मुताबिक, हर दिन यमुना से 38.9 करोड़ गैलन, गंगा नदी से 25.3 करोड़ गैलन और भाखरा-नांगल से रावि-व्यास नदी से 22.1 करोड़ गैलन पानी मिलता है. इसके अलावा कुंए, ट्यूबवेल और ग्राउंड वाटर से 9 करोड़ गैलन पानी आता है. कुल मिलाकर दिल्ली को हर दिन 95.3 करोड़ गैलन पानी मिलता है.

दिल्ली को कितना पानी चाहिए?

दिल्ली सरकार का 2021-22 का आर्थिक सर्वे बताता है कि राज्य की 2.30 करोड़ आबादी को हर दिन 138 करोड़ गैलन पानी की जरूरत है, जबकि पानी की सप्लाई 95.3 करोड़ गैलन प्रति दिन की है.

दिल्ली सरकार के 2041 के मास्टर प्लान में अनुमान लगाया गया है कि 2041 तक राज्य को हर दिन 145.5 करोड़ गैलन पानी की जरूरत होगी. 

मास्टर प्लान के मुताबिक, दिल्ली में अभी हर दिन हर व्यक्ति को 227 लीटर पानी की जरूरत होती है. इस जरूरत को 2041 तक घटाकर 189 लीटर प्रति दिन पर लेकर आने का टारगेट रखा गया है. बाद में इसे 151 लीटर प्रति दिन पर लाया जाएगा.

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कैसे पूरी होगी दिल्ली की जरूरत?

दिल्ली का अपना कोई पानी का जरिया तो है नहीं, लिहाजा उसे दूसरे राज्यों पर ही निर्भर होना पड़ेगा. यही वजह है कि सीएम अरविंद केजरीवाल ने केंद्र से पानी का कोटा बढ़ाने की अपील की है. 

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का दावा है कि सात साल में दिल्ली के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, ट्यूबवेल और नलकूपों में पानी की उपलब्धता 86 करोड़ गैलन प्रति दिन से बढ़कर 99 करोड़ गैलन प्रति दिन पहुंच गई है. 

केजरीवाल ने रविवार को पटपड़गंज गांव में एक अंडरवाटर जलाशय का उद्घाटन किया है. ये जलाशय 32 करोड़ की लागत से बना है. दावा है कि इससे पटपड़गंज गांव, पांडव नगर, शशि गार्डन, मयूर विहार और चिल्ला गांव के एक लाख से ज्यादा लोगों को फायदा होगा.

सीएम केजरीवाल का दावा है कि 2015 में आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने के बाद से दिल्ली में 12 अंडरग्राउंड जलाशय, तीन वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, एक वाटर रिसाइकलिंग प्लांट, 500 ट्यूबवेल और 2,250 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बनाई गई है, जिससे 30 लाख लोगों को फायदा हुआ है.

 

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