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देश की राजधानी में 1978 के बाद पहली बार 45 साल में यमुना नदी में रिकॉर्ड तोड़ जलस्तर पहुंच चुका है. दिल्ली के निचले इलाके बाढ़ के पानी में डूब चुके हैं. वहीं रिहाइशी इलाकों में भी पानी भर चुका है और सड़कों पर जलभराव की स्थिति है. शहर के तमाम बाजार भी पानी से लबालब हैं. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने युमना के लगातार बढ़ते जलस्तर को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने इसको लेकर गृह मंत्री अमित शाह को चिट्ठी भी लिखी है और राजधानी में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन का हवाला दिया है.
अपनी चिट्ठी में सीएम केजरीवाल ने लिखा कि आज (बुधवार) दोपहर 1 बजे दिल्ली में यमुना का स्तर 207.55 मीटर पहुंच गया है. ये खतरे के निशान (205.33 मीटर) से बहुत ऊपर है. इसके पहले यमुना का अभी तक अधिकतम स्तर वर्ष 1978 में पहुंचा था जो कि 207.49 मीटर था. उस वक्त दिल्ली में बाढ़ आ गई थी और काफी गंभीर स्थिति हो गई थी. 207.55 मीटर के स्तर पर अब यमुना में कभी भी बाढ़ आ सकती है.
'रात में 207.72 मीटर पहुंच जाएगा यमुना का जलस्तर'
उन्होंने लिखा कि अभी आये सेंट्रल वॉटर कमीशन के अनुमान के मुताबिक आज रात को यमुना का स्तर 207.72 मीटर पहुंच जाएगा, जो कि बहुत चिंता की बात है. दिल्ली में पिछले 3 दिनों से बारिश नहीं हुई. दिल्ली में यमुना में पानी का स्तर दिल्ली की बारिश की वजह से नहीं बढ़ रहा, बल्कि हरियाणा में स्थित हथिनीकुंड बैराज से छोड़े जाने वाली पानी की वजह से लगातार बढ़ रहा है. मेरा आपसे विनम्र निवेदन है कि यदि संभव हो तो हथिनीकुंड बैराज से पानी को एक सीमित गति से ही छोड़ा जाए ताकि दिल्ली में यमुना का स्तर और न बढ़े.
'दुनिया में अच्छा संदेश नहीं जाएगा'
दिल्ली के मुख्यमंत्री ने जी20 शिखर सम्मेलन का हवाला देते हुए चिट्ठी में कहा कि दिल्ली देश की राजधानी है. और कुछ हफ्तों में यहां जी20 शिखर वार्ता होने जा रही है. देश की राजधानी में बाढ़ की खबर से दुनिया में अच्छा संदेश नहीं जाएगा. हम सबको मिलकर इस स्थिति से दिल्ली के लोगों को बचाना है.
दिल्ली के इन इलाकों में भरा पानी
कश्मीरी गेट के मोंस्टी मार्केट, रिंग रोड, यमुना घाट, यमुना बाजार इलाके में बाढ़ का पानी पहुंच गया है. यहां का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि गलियों में घटनों तक पानी बह रहा है. कश्मीरी गेट में गौशाला में यमुना नदी का पानी घुस गया है. आईटीओ पर छठ घाट पानी में पूरी तरह डूब गया है. यमुना नदी से सटे इलाके बहुत संवेदनशील हैं. इन इलाकों में करीब 41 हजार लोग रहते हैं.
27 हजार लोगों ने राहत शिविरों में कराया रजिस्ट्रेशन
दिल्ली सरकार के विकास मंत्री गोपाल राय के मुताबिक प्रभावित लोगों के लिए दिल्ली के 6 जिलों में करीब 2700 टेंट बनाए गए हैं. इन टेटों में रहने के लिए अभी तक 27,000 लोगों रजिस्ट्रेशन किया गया है. इस समय राजघाट डीटीसी डिपो में बने राहत शिविरों में 126 लोग रह रहे हैं. ईस्ट डिस्ट्रिक्ट में सबसे ज्यादा लगभग 1700 टेंट, तो नॉर्थ ईस्ट और साउथ में 150 से 200 टेंट लगाए गए हैं. वहीं राहत और बचाव कार्य के लिए 45 नावों को तैनात किया गया है.
इन जगहों पर बनाए गए हैं राहत शिविर
जानकारी के मुताबिक प्रभावित इलाकों से लोगों को निकालकर अक्षरधाम, गुलमोहर पार्क, चिल्ला से एनएच-24 तक, डीएनडी से निजामुद्दीन फ्लाइओवर और यमुना बैंक से आईटीओ पुल तक बने राहत शिविरों में शिफ्ट कर दिया गया है. इसके अलावा नोएडा-दिल्ली लिंक रोड पर भी राहत शिविर लगाए गए हैं. खादर की झुग्गियों से करीब 27 हजार लोगों को राहत शिविरों में शिफ्ट कर दिया गया है.
1978 में यमुना के जलस्तर ने तोड़ दिया था रिकॉर्ड
1978 में शहर के कई इलाके पूरी तरह से बाढ़ में घिर गए थे. इसका मुख्य कारण था हरियाणा से आने वाला पानी. तब यमुना में 2 लाख 24 हज़ार 390 क्यूसेक पानी अचानक आ गया था. उस समय लोहे के पुल पर यमुना का स्तर 207.49-मीटर के निशान को छू गया था. ये पहली और आखिरी बार था जब यमुना का स्तर इतने ऊपर तक गया है. हालांकि इसके बाद दो बार और यमुना का स्तर 207 मीटर के निशान को पार कर गया था. वो समय था 2010 (207.11 मीटर) और 2013 (207.32 मीटर). 2010 में यमुना में 2 लाख 26 हज़ार 535 क्यूसेक पानी आया था, जबकि 2013 में 3 लाख 65 हज़ार 573 क्यूसेक पानी पहुंचा था.