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'लगातार जलजमाव होता था, संज्ञान क्यों नहीं लिया?', दिल्ली कोचिंग हादसे के आरोपियों से कोर्ट का सवाल

दिल्ली पुलिस की ओर से कहा गया कि सिर्फ आर्थिक उद्देश्यों के लिए, बेसमेंट को कर्मशियल यूज के लिए किराये पर दे दिया गया. बिल्डिंग मालिकों को कोचिंग संस्थान की ओर से 4 लाख रुपये महीने का किराया मिल रहा था और इस चक्कर में तीन मासूम बच्चों की जान चली गई.

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दिल्ली कोचिंग हादसे के आरोपियों की जमानत याचिका पर राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई हुई. (PTI Photo)
दिल्ली कोचिंग हादसे के आरोपियों की जमानत याचिका पर राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई हुई. (PTI Photo)

दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर इलाके में स्थित जिस RAU'S IAS कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पिछले महीने तीन यूपीएससी अभ्यर्थियों की डूबकर मौत हो गई थी. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में बिल्डिंग के चार सह-मालिकों परविंदर सिंह, तजिंदर सिंह, हरविंदर सिंह और सर्बजीत सिंह को बीएनएस की धारा 105 (गैरइरादतन हत्या) के तहत गिरफ्तार किया था. चारों आरोपियों ने मामले में जमानत के लिए याचिका दायर की है, जिस पर राउज एवेन्यू कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई. 

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आरोपियों के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि इस हादसे में ज्यादा से ज्यादा लापरवाही का मामला बन सकता था, यह गैरइरादतन हत्या का मामला नहीं है. कोर्ट ने पूछा- मान लीजिए एक फ्लाईओवर गिर जाता है, अब अगर ठेकेदार ने  घटिया सामग्री लगाया था, तो गिरना स्वाभाविक है. इस केस में क्या करेंगे? जिम्मेदारी तो ठेकेदार की ही बनती है.' बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि बिल्डिंग मालिकों ने जानबूझकर इस हादसे को अंजाम नहीं दिया.

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उन्होंने कहा, 'जानबूझकर तब माना जाता है, जब कोई व्यक्ति ऐसा कार्य कर रहा है जो अवैध है और उसके काम से किसी के मृत्यु होने की संभावना है. व्यक्ति और घटना में सीधी निकटता होनी चाहिए.' इस पर कोर्ट ने कहा- 'बेसमेंट में तुरंत पानी क्यों भरा, यही तो सवाल है. आम लोग इस मामले को लगातार अधिकारियों के संज्ञान में ला रहे थे. जब पता चला कि कुछ गैरकानूनी चल रहा है तो क्या अधिकारियों को कुछ नहीं करना चाहिए, कार्रवाई नहीं करनी चाहिए?'

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अदालत ने कहा कि वहां पहले भी जल जमाव हुआ था. लगातार पानी भर रहा था तो बिल्डिंग मालिकों और अधिकारियों को इस बारे में जानकारी होनी चाहिए. इस पर आरोपियों ने अपने वकील के माध्यम से कोर्ट से कहा, 'जैसे ही हमें पता चला कि कई लोगों की जान चली गई है, कुछ दुर्भाग्यपूर्ण हुआ है तो हम पुलिस के पास पहुंचे.' पिछली सुनवाई में बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि यह घटना 'एक्ट ऑफ गॉड' (भगवान का कृत्य) था, जिसे टाला जा सकता था यदि सिविक एजेंसियां ​​अपने कर्तव्यों का पालन करतीं.

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दिल्ली पुलिस की ओर से कहा गया कि सिर्फ आर्थिक उद्देश्यों के लिए, बेसमेंट को कर्मशियल यूज के लिए किराये पर दे दिया गया. बिल्डिंग मालिकों को कोचिंग संस्थान की ओर से 4 लाख रुपये महीने का किराया मिल रहा था और इस चक्कर में तीन मासूम बच्चों की जान चली गई. यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है लेकिन कोर्ट सिर्फ भावनाओं के आधार पर नहीं जा सकता. कोचिंग सेंटर इतने दिनों से चल रहा है और कुछ नहीं हुआ. बिल्डिंग में 2.5 वर्ष से कोचिंग संस्थान  चलाया जा रहा था. हमें मामले में कानून और तथ्यों के अनुसार चलना होगा. अदालत में कल भी इस मामले की सुनवाई जारी रहेगी.

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