केंद्र सरकार के मंत्री लगातार किसानों से आंदोलन को लेकर अपील कर रहे हैं, लेकिन मामला कृषि कानूनों की वापसी पर अटका है. दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है. कड़ाके की सर्दी में भी किसान दिल्ली बॉर्डर पर डटे हुए हैं. कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के समर्थन में पूर्व सैनिक सिंघु बॉर्डर पहुंचे.
दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर किसान डटे हुए हैं. दिल्ली-यूपी सीमा पर स्थित गाजीपुर बॉर्डर पर डटे किसानों का विरोध 18वें दिन में प्रवेश कर चुका है. धरने पर बैठीं 80 वर्षीय रामकली का कहना है कि उन्हें ठंड के मौसम में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगी.
किसानों को मिला पूर्व सैनिकों का साथ
कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के समर्थन में मंगलवार को पूर्व सैनिक सिंघु बॉर्डर पहुंचे है. पूर्व सैनिक कमलदीप सिंह ने बताया कि मैं 5 साल पहले भारतीय सेना से रिटायर हुआ. हम खुद किसान-मज़दूर के बेटे हैं, हम यहां एक फौजी के तौर पर नहीं आए.
कानून वापसी के लिए राजी नहीं है सरकार
सरकारी खेमे से आते संकेत किसान संगठनों को परेशान कर सकते हैं. एक दिन पहले देश के अलग-अलग दस किसान संगठनों ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की और कृषि कानून को समर्थन दिया. सरकार पंजाब-हरियाणा के किसान जत्थों के लिए बैठक के लिए बंद ताले खोलने को तैयार है, लेकिन कानून वापसी पर टस से मस नहीं.
किसानों का आंदोलन जारी
इस बीच सिंघु सीमा किसान संगठनों का ऐसा मोर्चा बनता देख रहा है, जहां रोज नए जत्थे इंसाफ की मांग के साथ तैनात हो रहे हैं. कानून वापसी को लेकर रोज नए इरादे बुलंद हो रहे हैं. आंदोलन से पैदा हुई मुश्किलों को लेकर किसान माफीनामा जारी कर रहे हैं. किसानों का कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन जारी है.