दिल्ली की 75% आबादी डीटीसी की बसों से यात्रा करती है और 75% में से 40% से ज्यादा महिलाएं हैं जिनके लिए दिल्ली सरकार ने फ्री बस सेवा 2019 में शुरु की. दिल्ली सरकार की कोशिश थी कि फ्री बस सेवा से महिलाओं को सशक्तिकरण किया जा सकता है वह अपने काम के लिए आसानी से आ जा सकती हैं. लेकिन इन्हीं डीटीसी बसों में महिलाएं फ्री बस सेवा के चलते डिस्क्रिमिनेशन गलत व्यवहार किया जाता है. कंडक्टर या फिर ड्राइवर महिलाओं पर भद्दी टिप्पणियां करते हैं उन्हें टिकट लेने पर मजबूर करते हैं या फिर उनके लिए बस स्टॉप पर बस ही नहीं रोकते.
महिलाओं की सुरक्षा के लिए वैसे तो अब नई इलेक्ट्रिक बसों में मार्शल लगाए गए हैं, मगर महिलाओं का कहना है कि भीड़ अधीक होने की वजह से मार्शल भी उनकी मदद नहीं कर पाते. कंडक्टर महिलाओं को परेशान करते हैं कि भीड़ में भी सीट पर आके पिंक टिकट लें, महिलाओं के लिए आरक्षित सीट पर पुरुष बैठ जाते हैं और उठने के लिए बोलने के लिए महिलाओं से लड़ाई करतें हैं और फ्री सफर का ताना देते हैं.
दिल्ली में सबसे ज्यादा सफर करने वाली कॉलेज की लड़कियां हैं, कॉलेज की लड़कियों की शिकायत है कि बस स्टॉप कम होने की वजह से उन्हें घंटों सड़क पर इंतजार करना होता है और रात में सफर करना मुश्किल हो जाता है, जो गरीब महिलाएं हैं यानी जो महिलाएं कूड़ा बिनती हैं या फिर सामान बेचने इधर से उधर जाती है उन्हें बस में बैठने से मना कर दिया जाता है यह कहकर कि उनसे बदबू आती है.
ग्रीनपीस के सर्वे के अनुसार दिल्ली में महिलाएं चाहती हैं कि फीमेल ड्राइवर और कंडक्टर की संख्या बढ़ाई जाए. नए बस स्टॉप बनाय जाए, नए शौचालय बनाए जाए, सिर्फ फ्री बस सेवा देने से उनकी परेशानियां कम नहीं होंगी. इसे लेकर हमने डीटीसी बसों का रियल्टी चेक किया. एक आदमी महिला आरक्षित सीट पर बैठा है. कैमरे पर पूछने पर बोलता है, फ्री भी जायेगी और आराम से भी जायेगी, मैंने पैसा दिया है, मैं बैठ कर जाऊंगा. बस पूरी भरी हुई है. बहुत सी महिलाएं खड़ी हैं, मगर ये आदमी सब महिलाओं से बहस करता है और उन्हें सीट नहीं देता.
कैमरा पर महिलाओं ने बताया कि उन्हें रोज इन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. ऐसे ही आदमी महिलाओं की सीट में बैठ जाते हैं और उनसे लड़ने लगते हैं. अगर सीट से उठने के लिए बोला जाए, झगड़ा ना हो इसलिए महिलाएं चुप रहती हैं. और खड़े होकर ही घंटों सफर करती हैं. दूसरे रियल्टी चेक में कॉलेज की एक लड़की बताती है कि दिल्ली की बसों में क्या-क्या मुसीबत उठानी पड़ती है. कंडक्टर ड्राइवर बदतमीजी करते हैं, कभी-कभी बस भी नहीं रोकते, कहते हैं कि फ्री में जा रहे हैं इसलिए बस नहीं रोकेंगे.