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केजरीवाल सरकार का ऐलान- दिल्ली की 1797 अनधिकृत कॉलोनियां होंगी वैध

विधानसभा चुनाव से पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मास्ट्रर स्ट्रोक चला है. केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के करीब 40 लाख लोगों के लिए खुशखबरी दी है. ये लोग उन 1797 अनधिकृत कॉलोनियों में रह रहे हैं, जिन्हें हमेशा अपना आशियाना उजड़ने की चिंता सताती रहती थी. ये कई सालों से अपनी कॉलोनियों को वैध करने की मांग कर रहे थे. अब केजरीवाल सरकार ने इस पर मुहर लगा दी है.

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प्रेस कॉन्फ्रेंस करते दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल. (फोटोः पंकज नांगिया)
प्रेस कॉन्फ्रेंस करते दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल. (फोटोः पंकज नांगिया)

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लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एक के बाद एक दांव चल रहे हैं. विधानसभा चुनाव से पहले अपने सियासी समीकरण को बेहतर करने के लिए अब उन्होंने मास्ट्रर स्ट्रोक चला है. केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के करीब 40 लाख लोगों के लिए खुशखबरी दी है. ये 40 लाख लोग उन 1797 अनधिकृत कॉलोनियों में रह रहे हैं जिन्हें हमेशा अपना आशियाना उजड़ने की चिंता सताती रहती थी. ये लोग कई सालों से अपनी कॉलोनियों को वैध करने की मांग कर रहे थे. अब केजरीवाल सरकार ने इस पर मुहर लगा दी है.

केजरीवाल के मंत्री सत्येंद्र कुमार जैन ने कहा कि मैं केंद्र सरकर को धन्यवाद देता हूं, बधाई देता हूं क्योंकि हमने 2015 में केंद्र के पास इन कॉलोनियों को वैध करने का प्रस्ताव भेजा था. हमें खुशी है कि केंद्र सरकार ने इसे मंजूरी दे दी है. अब इन कॉलोनियों में रहने वाले लोग अपने मकानों की रजिस्ट्री आसानी से करा सकेंगे.

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बता दें कि जून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार 2.0 ने भी दिल्ली की अवैध कॉलोनियों को राहत देने के लिए इन्हें नियमित करने की तैयारी शुरू की थी. मोदी सरकार ने इस मुद्दे को अपने 100 दिन के एजेंडे में प्रमुखता से रखा है. इससे पहले 1961 में सबसे पहली बार ऐसी पॉलिसी बनाई गई थी और 101 कॉलोनियों को नियमित किया गया था. उसके बाद भी कम से कम तीन बार कॉलोनियों को नियमित करने की कवायद की गई.

दिल्ली के शहरी विकास मंत्री सत्येंद्र कुमार जैन ने कहा कि हमें खुशी है कि जो सपना इन कॉलोनियों के लोगों ने देखा था वो अब पूरा होने वाला है. दिल्ली सरकार इन कॉलोनियों के लिए 3000 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है. इसके अलावा अभी और 3000 करोड़ रुपए खर्च करेगी. सत्येंद्र जैन ने कहा कि जल्द ही इन कॉलोनी में रहने वाले लोगों को उनकी जमीन का मालिकाना हक मिलेगा. चाहे वह निजी जमीन पर रहते हों या सरकारी जमीन पर.

1994 से 2014 तक कोर्ट कहती रही- पहले सुविधाएं दो, फिर करो नियमित

बता दें कि दिल्ली सरकार ने 2 नवंबर, 2015 को अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के प्रस्ताव को केंद्र सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा था. हालांकि 1994 से 2014 के बीच सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट ने इन कॉलोनियों से संबंधित कई मामलों में स्पष्ट फैसले दिए कि इन्हें तब तक नियमित नहीं किया जा सकता, जब तक इनमें मूलभूत सुविधाएं प्रदान न कर दी जाएं.

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दिल्ली सरकार ने शुरू किया सुविधाएं देना

इन महत्वपूर्ण फैसलों और निर्देशों को ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार ने इन कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने का काम शुरू किया है. मूलभूत सुविधाओं में सीवर, पीने के पानी की पाइप लाइनें, सड़कें, नालियों और गलियों का निर्माण चल रहा है. दिल्ली के मुख्यमंत्री ने भी अनधिकृत कॉलोनियों में चल रहे विकास कार्यों का खुद जाकर कई बार निरीक्षण किया. दिल्ली सरकार के मुताबिक ज्यादातर अनधिकृत कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने का काम आने वाले पांच महीनों में पूरा हो जाएगा.

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