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दिल्ली प्रदूषण से परेशान, पर्यावरण सेस के 600 करोड़ बचाए बैठी रही केजरीवाल सरकार

सरकार 787 करोड़ रुपए इलेक्ट्रिक बसों को खरीदने में खर्च करेगी. इस मुद्दे पर केजरीवाल ने मंगलवार को बैठक भी ली है. जिसके बाद परिवहन मंत्री को आगे की कार्यवाही करने को कहा गया है.

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फाइल फोटो
फाइल फोटो

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प्रदूषण के मुद्दे पर दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार लगातार घिरती जा रही है. पहले ही केजरीवाल सरकार को एनजीटी से फटकार पड़ रही है. और अब एक आरटीआई के जरिए खुलासा हुआ है कि सरकार ने पर्यावरण सेस के जरिए जो 700 करोड़ रुपए इकट्ठा किया है, उसमें से वह सिर्फ 93 लाख रुपये ही खर्च कर पाई है.

दिल्ली सरकार का कहना है कि सरकार के पीडब्ल्यूडी विभाग के पास सड़क निर्माण या उसे मेंटेन करने के लिए पर्याप्त बजट है इसलिए सेस का इस्तेमाल वहां नहीं किया गया है. सरकार इन पैसों का इस्तेमाल पब्लिक ट्रांसपोर्ट को दुरुस्त करने में करेगी. सरकार जल्द ही 2000 बसों को खरीदने जा रही है, जिसमें 1000 बसें डीटीसी और 1000 क्लस्टर बसों को खरीदा जाएगा. दिल्ली सरकार ने कहा है कि क्योंकि PWD विभाग के पास पर्याप्त बजट है इसलिए वहां बजट का प्रयोग नहीं हो सकता है.

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सरकार 787 करोड़ रुपए इलेक्ट्रिक बसों को खरीदने में खर्च करेगी. इस मुद्दे पर केजरीवाल ने मंगलवार को बैठक भी ली है. जिसके बाद परिवहन मंत्री को आगे की कार्यवाही करने को कहा गया है.

आपको बता दें कि प्रदूषण के मुद्दे पर केजरीवाल सरकार लगातार कठघरे में है. एनजीटी कई दफा सरकार को फटकार लगा चुका है. दिल्ली सरकार ने जब ऑड इवन का प्रस्ताव रखा था, तब भी एनजीटी ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि आपने अभी तक बसों का इंतजाम क्यों नहीं किया है.

दिल्ली सरकार ने एनजीटी में ऑड इवन को लेकर 11 नवंबर के आदेश को पुनर्विचार के लिए याचिका डाली थी. इसमें ऑड इवन से महिलाओं और टू-व्हीलर्स को छूट देने को कहा गया था. सरकार ने कहा था कि चूंकि अगर टू-व्हीलर्स को भी इस दायरे में लाया जाएगा, तो 30-35 लाख लोगों को ट्रांसपोर्ट की सुविधा देने के लिए 3500 अतिरिक्त बसों की जरूरत है. 

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