राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के मुखर्जी नगर में सिख ऑटो ड्राइवर सरबजीत और उसके बेटे की पिटाई के मामले को लेकर लगाई गई जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है. साथ ही पूछा है कि आखिर ऑटो ड्राइवर और उसके 15 साल के बेटे को सड़क पर दिनदहाड़े क्यों बेरहमी से पीटा गया? कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस को एक हफ्ते में अपनी इंक्वायरी रिपोर्ट सौंपने को कहा है.
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय से भी जवाब मांगा है. हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को इस बात के लिए भी कड़ी फटकार लगाई कि आखिर अब तक सिर्फ तीन ही पुलिस वालों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई क्यों की गई, जबकि इस वीडियो में आधा दर्जन से ज्यादा पुलिसकर्मी मारपीट में शामिल रहे.
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा, 'आप कैसे उन पांच पुलिस वालों के एक्शन को जस्टिफाई कर सकते है, जो अपने पिता को बचा रहे एक नाबालिग बेटे को पीट रहे हैं? क्या आपने उन पुलिस वालों की पहचान की है, जिन्होंने नाबालिग लड़के पर हमला किया. उस लड़के को सड़क पर क्यों घसीटा गया और उस पर लाठियां क्यों बरसाई गईं?'
दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश का स्वागत
वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा, 'मैं मुखर्जी नगर में सरबजीत सिंह और उनके नाबालिग बेटे पर पुलिस की बर्बरता के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश का स्वागत करता हूं. जिन्हें नागरिकों की रक्षा करने का काम सौंपा गया, वो समाज में कलह पैदा नहीं कर सकता और न ही बेवजह हिंसा फैला सकता है.'
I welcome the Delhi High Court order against police brutalities on Sarabjeet Singh and his minor son at Mukherjee Nagar.
Those entrusted with protecting citizens cannot create discord in the society and spread senseless violence
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) June 19, 2019
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस को किसी को सरेआम पीटने और सड़क पर घसीटने की इजाजत कैसे दी जा सकती है? कोर्ट ने सुनवाई के दौरान वह वीडियो भी चलाकर देखा, जिसमें पुलिसकर्मी ऑटो ड्राइवर सरबजीत और उसके 15 साल के बेटे की पिटाई बेरहमी से कर रहे हैं. वीडियो देखने के बाद याचिकाकर्ता से कोर्ट ने पूछा कि इस वीडियो का सोर्स क्या है, जिस पर वकील ने बताया कि मारपीट के दौरान यह वीडियो आम जनता ने अपने मोबाइल से बनाया.
पावर का गलत इस्तेमाल
याचिकाकर्ता के वकील ने सुनवाई शुरू होते ही कहा कि पुलिस ने पावर का गलत इस्तेमाल किया. याचिकाकर्ता ने ऑटो चालक और उसके नाबालिग पुत्र की पिटाई को मानवाधिकारों का हनन और पुलिस की बर्बरता बताया. याचिकाकर्ता ने कहा कि पुलिस की ड्राइवर के साथ मामूली बहस ही हुई थी. इसके बाद दोनों अपने-अपने रास्ते चले गए थे. इस पर कोर्ट ने पूछा कि आपके इस कथन का क्या आधार है? याची ने कहा कि ऑनलाइन वीडियो उपलब्ध हैं, जिनमें तकरार दिख रही है. वे मीडिया में भी हैं. याची ने अदालत के कम्प्यूटर पर वीडियो दिखाया भी.
कोर्ट वीडियो देखने के बाद दिल्ली पुलिस के वकील पर भड़क गया. कोर्ट ने कहा कि 15 साल के बच्चे को भी सड़क पर पीटा गया, जबकि इस मामले में उसकी कोई गलती ही नहीं थी. कोर्ट ने कहा, 'हमें इस पर तुरंत करवाई चाहिए. पुलिस के वकील ने कहा कि हम करवाई कर रहे है.
कोर्ट ने कहा कि हम बस ये चाहते है कि नागरिकों को ये लगना चाहिए कि पुलिस फोर्स उनके साथ है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई को होगी. दिल्ली हाईकोर्ट ने ज्वाइंट कमिश्नर रैंक के अधिकारी से मामले की स्वतंत्र जांच कराकर रिपोर्ट देने को भी कहा है. कोर्ट ने मीडिया को भी इस मामले में नाबालिग का नाम उजागर न करने का निर्देश दिया.
पुलिस ने कहा, क्राइम ब्रांच को दी जांच
पुलिस ने हाईकोर्ट को जानकारी दी कि आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है. घटना की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है. ज्वाइंट कमिश्नर रैंक के अधिकारी से भी जांच कराई जा रही है.