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समलैंगिक जोड़ों के विवाह पंजीकरण वाली याचिका पर सरकार को HC का नोटिस

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि हिंदू विवाह अधिनियम में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा लिंग-तटस्थ है, यानि यह स्पष्ट रूप से एक ही सेक्स जोड़ों के विवाह पर प्रतिबंध नहीं लगाती है.

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हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को भेजा नोटिस
हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को भेजा नोटिस
स्टोरी हाइलाइट्स
  • समलैंगिक जोड़ों के विवाह के पंजीकरण की मांग
  • दिल्ली हाई कोर्ट में डाली गई याचिका
  • हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजकर मांगा जवाब

दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को हिंदू मैरिज एक्ट के तहत समलैंगिक जोड़ों के विवाह के पंजीकरण की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस मामले में 4 हफ्ते के भीतर हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं. अभिजीत अय्यर मित्रा द्वारा दायर की गई इस याचिका में हिंदू विवाह अधिनियम के तहत LGBTQIA जोड़ों के विवाह के पंजीकरण की मांग की गई  है.

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गुरुवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि हिंदू विवाह अधिनियम में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा लिंग-तटस्थ है, यानि यह स्पष्ट रूप से एक ही सेक्स जोड़ों के विवाह पर प्रतिबंध नहीं लगाती है. इसलिए किसी भी स्पष्ट निषेध के अभाव में, समलैंगिक जोड़ों के विवाह को हिंदू विवाह अधिनियम और साथ ही विदेशी विवाह अधिनियम के तहत पंजीकृत होने की अनुमति दी जानी चाहिए.

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इस याचिका पर सुनवाई के बाद  हाई कोर्ट ने आज नोटिस तो जारी कर दिया है लेकिन कोर्ट ने कहा कि इस तरह की एक और याचिका पहले से ही हाई कोर्ट में लंबित है, जिसमें विशेष विवाह अधिनियम के तहत समान लिंग वाले जोड़ों के लिए विवाह समानता की मांग की गई है. इसलिए हाई कोर्ट ने 14 जनवरी को दोनों मामलों की एक साथ सुनवाई करने का फैसला किया है.

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