दिल्ली वक्फ बोर्ड के चेयरमैन के तौर पर आम आदमी विधायक अमानतुल्लाह खान को चुनने के लिए होने वाली बैठक से पहले ही दिल्ली हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगा दी है. सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से सवाल किया कि जब अमानतुल्लाह खान के खिलाफ अनियमितताओं के आरोपों पर स्पेशल ऑडिट चल रहा है, तो वो ये मंजूरी कैसे दे सकते हैं?
दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें वक्फ बोर्ड सदस्यों को मीटिंग के बारे में मिले नोटिफिकेशन की जानकारी मिली थी. याचिकाकर्ता इकबाल खान ने अदालत में कहा था कि इस बैठक में अमानतुल्लाह को वक्फ बोर्ड का चेयरमैन चुना जा सकता है, जबकि अभी जांच चल रही है.
इसी याचिका की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि जब विधायक के खिलाफ आरोप में जांच चल रही है, तो वो सिस्टम का हिस्सा ही क्यों होने चाहिए? हालांकि, अभी कोर्ट ने इस मामले में कोई फैसला नहीं सुनाया है.
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अब इसपर नौ नवंबर को सुनवाई होगी, क्योंकि वक्फ बोर्ड की बैठक को टाल दिया गया था और अब बैठक 19 नवंबर को होनी है. याचिकाकर्ता के वकील विजय ने इंडिया टुडे को जानकारी दी कि वक्फ बोर्ड की मीटिंग में अमानतुल्लाह खान को चेयरमैन चुना जाना था, जो अभी जारी स्पेशल ऑडिट के खिलाफ जाता.
दूसरी ओर विधायक की ओर से पेश वकील केसी मित्तल ने इस याचिका को राजनीति से प्रेरित करार दिया और कहा कि विधायक के खिलाफ कोई रिपोर्ट, आरोप या तय दोष नहीं है. ना ही उनपर चुनाव लड़ने से रोक लगी है, ऐसे में उन्हें कोई कैसे रोक सकता है?
बता दें कि दिल्ली सरकार ने सितंबर में ही वक्फ बोर्ड में स्पेशल ऑडिट का आदेश दिया था. आरोप है कि मार्च 2016 से लेकर मार्च 2020 तक जबतक अमानतुत्लाह वक्फ बोर्ड के चेयरमैन रहे, तबतक वक्फ बोर्ड में कुछ अनियमितताएं हुईं.