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Delhi violence: मेरी गर्दन पर तलवार से वार हुआ...जहांगीरपुरी हिंसा में जख्मी हुए शख्स की आपबीती

जहांगीरपुरी हिंसा में जख्मी उमाशंकर के मुताबिक, वे हनुमान जयंती पर जुलूस का नेतृत्व कर रहे थे. दंगा करीब साढ़े 5 बजे शुरू हुआ. शुरुआत में 70-80 लोग विरोध कर रहे थे. उसके बाद भीड़ बढ़ती गई. अचानक छत से पत्थर और बोतलें फेंकी जाने लगीं.

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जहांगीरपुरी हिंसा में जख्मी उमाशंकर दुबे
जहांगीरपुरी हिंसा में जख्मी उमाशंकर दुबे
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दिल्ली के जहांगीरपुरी में शनिवार को हुई थी हिंसा
  • हनुमान जयंती पर शोभायात्रा में हुई थी हिंसा
  • हिंसा में घायल उमाशंकर सिंह भी घायल

राजधानी दिल्ली के जहांगीरपुरी में शनिवार को हनुमान जयंती के मौके पर हिंसा फैली थी. इस हिंसा में कई पुलिसकर्मी जख्मी हुए हैं. जबकि एक नागरिक भी घायल है. हिंसा में उमाशंकर दुबे भी जख्मी हुए हैं. वे हनुमान जयंती पर जुलूस का नेतृत्व कर रहे थे.

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उमाशंकर की गर्दन पर तलवार से वार किया गया. उन्हें गंभीर चोटें आई हैं. अभी उनका दिल्ली के अस्पताल में इलाज चल रहा है. उमाशंकर दुबे ने आजतक से बात की और हिंसा की पूरी कहानी बताई...

जहांगीरपुरी हिंसा में जख्मी उमाशंकर के मुताबिक, वे हनुमान जयंती पर जुलूस का नेतृत्व कर रहे थे. दंगा करीब साढ़े 5 बजे शुरू हुआ. शुरुआत में 70-80 लोग विरोध कर रहे थे. उसके बाद भीड़ बढ़ती गई. अचानक छत से पत्थर और बोतलें फेंकी जाने लगीं. उन्होंने बताया कि अंसार उस वक्त 60-70 लोगों के साथ c ब्लॉक में मस्जिद के सामने मौजूद था. अंसार को उसी के ग्रुप के लोगों ने कहा कि इन लोगो को छोड़ना मत, जाने मत देना. 

उमाशंकर ने बताया, ''मैंने अंसार से कहा कि ये लोग निहत्थे हैं, इन्हें मत मारना. इस पर अंसार ने कहा, जो किया वो भुगतना पड़ेगा.'' उन्होंने बताया कि दो से तीन महीने पहले बजरंग दल की हनुमान चालीसा के पाठ के दौरान जहांगीरपुरी में अंसार ने कार्यकर्ताओं को धमकी दी थी. उसने कहा था कि ये सब करना बंद कर दो, नहीं तो अंजाम बुरा होगा. 
 
उमाशंकर ने बताया, ''हिंसा के दौरान मुन्ना बंगाली, आरिफ, रफी और आलम के नाम भी लिए जा थे. बाहर से भी लोगों को बुलाया गया था. विवाद के दौरान मेरी गर्दन पर तलवार से वार किया गया. मैं खून से लथपथ हो गया था. पुलिसवालों ने मुझे अपनी तरफ खींचा और गाड़ी में बैठाया. लेकिन मैं गाड़ी से कार्यकर्ताओं को बचाने के लिए फिर उतरा. मैं अपने कार्यकर्ताओं को पीछे की गली से लेकर वहां से निकला. लेकिन तभी छत से पत्थर फेंके जाने लगे. केमिकल्स से भरी बोतलें फेंकी जा रही थीं.''

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उन्होंने बताया, इस दौरान कई राउंड फायरिंग भी की गई. मैं लोगों को बचाने में जुटा था. हमला करने वाले ज्यादातर बंगाली मुस्लिम थे. पुलिस के आने के बाद मामला शांत हुआ. 

बता दें कि इस हिंसा के आरोप में अबतक 23 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. सोमवार को दिल्ली पुलिस के कमिश्नर राकेश अस्थाना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और घटनाक्रम की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि ये पूरा झगड़ा एक मामूली बात से शुरू हुआ था. साथ ही उन्होंने साजिशों के सवाल पर भी जांच की बात कही. अस्थाना ने कहा कि मस्जिद में झंडे लगाए जाने की बात में सच्चाई नहीं है. उन्होंने ये भी कहा कि इस मामले की हर एंगल से जांच की जाएगी और जिस पक्ष के लोग भी लिप्त पाए जाएंगे तो उनपर कड़ा एक्शन किया जाएगा.


 

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