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दंगों का दर्द या मरकज बना मर्ज...सीलमपुर में AAP से क्यों छिटक गए मुसलमान?

दिल्ली एमसीडी उपचुनाव में आम आदमी पार्टी को चार सीटों जीत मिली है जबकि मुस्लिम बहुल सीलमपुर इलाके की चौहान बांगर सीट पर कांग्रेस के हाथों उसे करारी मात खानी पड़ी है. आम आदमी पार्टी की वहां पर हार हुई, जहां पिछले साल दंगे हुए थे. ऐसे में सवाल उठता है कि सीलमपुर में मुस्लिम समुदाय के केजरीवाल से दूर छिटकने के पीछे दंगे का दर्द या तबलीगी जमात के मरकज के खिलाफ लिया गया एक्शन है? 

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अरविंद केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल
स्टोरी हाइलाइट्स
  • आम आदमी पार्टी को सीलमपुर में हार मिली
  • मुस्लिम समुदाय केजरीवाल से छिटककर कांग्रेस के साथ लौटा
  • तबलीगी जमात पर एक्शन से मुस्लिमों में नाराजगी!

दिल्ली नगर निगम की पांच सीटों पर हुए उपचुनाव में से चार सीटों पर आम आदमी पार्टी को जीत मिली है जबकि मुस्लिम बहुल सीलमपुर इलाके की चौहान बांगर सीट पर कांग्रेस के हाथों उसे करारी मात खानी पड़ी है. हालांकि, ऐसे में उपचुनाव में आम आदमी पार्टी को वहां हार का मुंह देखना पड़ा, जहां पिछले साल दंगे हुए थे. ऐसे में सवाल उठता है कि सीलमपुर में मुस्लिम समुदाय के केजरीवाल से दूर छिटकने के पीछे दंगे का दर्द या तबलीगी जमात के मरकज के खिलाफ लिया गया एक्शन है?

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दिल्ली एमसीडी उपचुनाव में सीलमपुर की चौहान बांगर सीट पर आम आदमी पार्टी ने अपने पूर्व विधायक हाजी इशराक खान को उतारा था जबकि कांग्रेस ने पूर्व विधायक चौधरी मतीन के बेटे जुबैर चौधरी पर दांव लगाया था. बीजेपी ने यहां से मुस्लिम प्रत्याशी मो. नजीर अंसारी को प्रत्याशी बनाया था. आम आदमी ने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने और मुस्लिम समुदाय को साधने के लिए अपने सबसे विश्वसनीय और फॉयर ब्रिगेड नेता विधायक अमनातनुल्लह खान को खास तौर से सीलमपुर चौहान बांगर इलाके में लगा रखा था. इसके बाद भी आम आदमी पार्टी को मुस्लिमों की नाराजगी झेलनी पड़ी है. 

आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी हाजी इशराक खान को कांग्रेस प्रत्याशी जुबैर चौधरी ने 10642 वोटों से मात दी है. चौहान बांगर सीट पर आम आदमी पार्टी की हार ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि सीएए-एनआरसी आंदोलन के बाद भी मुस्लिम समुदाय ने केजरीवाल के पक्ष में दिल्ली विधानसभा में वोटिंग की थी. हालांकि, केजरीवाल ध्रुवीकरण के डर से विधानसभा चुनाव में मुस्लिम इलाके में प्रचार करने भी नहीं गए थे. इसके बाद भी दिल्ली की सभी मुस्लिमों का 80 फीसदी वोट आम आदमी पार्टी को मिला था और पांच मुस्लिम विधायक जीतकर आए थे. वहीं, एमसीडी के उपचुनाव में मुस्लिम अब केजरीवाल के दूर होता नजर आया है. 

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आम आदमी पार्टी को उपचुनाव में जिन वार्डों में जीत मिली है, उनमें कल्याणपुरी और त्रिलोकपुरी में अनुसूचित जाति का वोटर काफी प्रभावशाली है. यहां दलित समुदाय ने बीजेपी के बजाय केजरीवाल की पार्टी के पक्ष में वोटिंग की है. वहीं, शालीमार बाग में झुग्गी से संबंधित वोटर ज्यादा हैं जबकि रोहिणी वार्ड में अनाधिकृत कॉलोनी के वोटरों ने अपनी पसंद आम आदमी पार्टी को बनाया है, लेकिन सीलमुपर में मुस्लिमों समुदाय केजरीवाल से छिटकता नजर आया है. 

बता दें  पिछले साल इसी इलाके में दंगे हुए थे और उसके बाद मुस्लिम वोटर आम आदमी पार्टी सरकार से नाराज बताए जा रहे हैं. हालांकि, मुस्लिम समुदाय में नाराजगी की वजह दंगे के साथ-साथ कोरोना काल में तबलीगी जमात और मरकज के खिलाफ केजरीवाल के द्वारा लिए गए एक्शन भी हैं. दिल्ली में दंगे के दौरान केजरीवाल का मौन रहना मुस्लिम समुदाय को रास नहीं आया है. इसके अलावा कोरोना काल में केजरीवाल ने तबलीगी जमात के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया था और जमात से जुड़े मरीजों के लिए अलग कॉलम भी बना दिया था. 

सीलमपुर के उपचुनाव में कांग्रेस ने केजरीवाल को घेरने के लिए दंगा और जमात को मुख्य मुद्दा बनाया था. अलका लांबा ने प्रचार करते हुए कहा था कि जब आप लोगों को उनकी जरूरत थी तब केजरीवाल गायब थे. उन्होंने तबलीगी जमात के मरकज को महामारी कोरोना के नाम पर बदनाम करने और एफआईआर दर्ज कराने की बात करके एक धर्म विशेष के खिलाफ माहौल खराब करने वाला बताया था. इसकी वजह से दिल्ली के बाहर दूसरे राज्यों में भी जमात के लोगों पर एफआईआर हुई थी. इतना ही नहीं कांग्रेस ने दिल्ली के मुस्लिम इलाकों में जमात के खिलाफ लिए एक्शन को लेकर केजरीवाल के विरोध में कई कार्यक्रम करके मुस्लिम को साधने का दांव चला था. 

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सीलमपुर में आम आदमी पार्टी को जिताने का बीड़ा उठा रहे ओखला से विधायक अमानतउल्ला खान मुस्लिम समुदाय के लोगों से घर-घर जाकर वोट मांग रहे थे. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से लेकर डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और सांसद संजय सिंह तक ने पूरे इलाके में चुनाव प्रचार किया था. इसके बावजूद मुस्लिम समुदाय का भरोसा आम आदमी पार्टी नहीं जीत सकी और दोबारा से कांग्रेस उसकी पंसद बनकर उभरी है. ऐसे में कहा जा रहा है कि दिल्ली का मुस्लिम वोटर अब केजरीवाल से छिटकर कांग्रेस में वापसी करता दिखा है, जो केजरीवाल के लिए चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है.


 

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