Delhi MCD Election: दिल्ली में एमसीडी चुनाव से पहले टीचर्स की सैलरी का मुद्दा बड़ा बनकर उभरा है. वेतन नहीं मिलने से टीचर्स में काफी नाराजगी है. वो 7 मार्च को पूर्वी निगम मुख्यालय के गेट पर धरना-प्रदर्शन करेंगे, जिसमें उत्तरी निगम के भी शिक्षक भी शामिल होंगे. दरअसल, पूर्वी दिल्ली नगर निगम (EDMC) के शिक्षकों को पिछले 4 माह से सैलरी नहीं मिली है. उनके लाखों रुपये के एरियर्स बकाया हैं. जिसे देने में निगम प्रशासन नाकाम साबित हुआ है.
सैलरी नहीं मिलने परेशान हैं टीचर्स
पूर्वी निगम के टीचर्स सैलरी नहीं मिलने से परेशान हैं. उनको अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. शिक्षकों को राशन, किराया, दवाई और इलाज के पैसों के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है.
'आने-जाने के लिए भी नहीं रहे हैं पैसे'
पूर्वी निगम के टीचर डालचंद ने बताया कि अब तो आने-जाने के पैसे भी नहीं रहे. रोज मेरठ से अप-डाउन करना पड़ता है. आने-जाने का खर्च भी वहन नहीं कर पा रहे हैं. सैलरी मांगने के लिए रोड पर बैठने को मजबूर होना पड़ रहा है. वहीं, पूर्वी दिल्ली नगर निगम में कार्यरत एक वरिष्ठ शिक्षक का कहना है कि निगम प्रशासन के साथ सहयोग कर रहे हैं. अपने निजी फोन से इंटरनेट खर्च से बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने का कार्य किया है.
'अब घर चलाना भी हो गया मुश्किल'
शिक्षक सीमा रानी का कहना है कि अब घर चलाना मुश्किल हो गया है. बच्चों की फीस, उनके कपड़े और पति के इलाज के लिए भी पैसे नहीं हैं. लाखों रुपये का एरियर्स बकाया है जिसे देने का नाम निगम प्रशासन नहीं ले रहा है. हमारी चार महीने की सैलरी बकाया हो चुकी है. बिना सैलरी कोई अपना घर चला कर दिखाए. हम शिक्षकों के साथ ही ऐसा दुर्व्यवहार क्यों किया जा रहा है? इसका जवाब किसी के पास नहीं है.
निगम चुनाव से पहले टीचर्स का धरना
शिक्षक न्याय मंच नगर निगम के अध्यक्ष कुलदीप सिंह खत्री ने बताया कि पूर्वी निगम के टीचर पैसे-पैसे को मोहताज हो गए हैं. टीचर्स के साथ शिक्षक न्याय मंच नगर निगम पूरी दृढ़ता के साथ खड़ा है और 7 मार्च को पूर्वी निगम मुख्यालय के गेट पर धरना प्रदर्शन करने जा रहा है, जिसमें उत्तरी निगम के भी शिक्षक भी शामिल होंगे. पूरी निगम की एससी/एसटी शिक्षक यूनियन के अध्यक्ष राम कुमार पालीवाल ने भी हमें समर्थन दिया है.
MCD में क्यों आता है सैलरी संकट?
चुनाव के बहाने हमने ये तस्दीक की आखिर एमसीडी में सैलरी का संकट क्यों आता है? टीचर्स की सैलरी की बात अकेली नहीं है. खस्ताहाल निगम पैसे की तंगी की वजह से विकास के काम नहीं कर पाया, जो रिवेन्यू आता है वह सिर्फ कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर ही खर्च कर रही है. रही सही कसर कोरोना ने निकाल दी.
आंकड़ों के मुताबिक नगर निगमों के कुल बजट का करीब 40 फीसदी सरकारी अनुदान से आता है. वहीं कुल बजट का 40 फीसदी कर्मचारियों और पार्षदों का वेतन देने और दफ्तरी कामकाज में खर्च हो जाता है. पिछले कई चुनावों से दिल्ली में सफाई, प्राथमिक शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा, पार्किंग, सड़क, सार्वजनिक पार्क, प्रदूषण नियंत्रण और पेंशन प्रमुख मुद्दे रहे हैं.
बीजेपी प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर का कहना है निगम कर्मचारियों का वेतन का खर्च है सालाना करीब 10 हजार करोड़ है. निगम अस्पतालों, स्कूलों, हेल्थ सेंटरों, पार्कों, सड़कों और सामुदायिक भवनों के रख-रखाव और मिड डे मील पर काफी खर्च करता है. तीनों निगमों का सालाना बजट करीब 18 हजार करोड़ रुपये है. दिल्ली सरकार वक्त पर पैसे नहीं देती है.
दिल्ली के 11 जिलों में से 8 जिलों में रहने वाली करीब 80 फीसदी आबादी निगम के अंतर्गत आती है. जानकार बताते हैं तीनों नगर निगमों को अगर मिला दें तो यह टोक्यो के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी निगम है. नॉर्थ एमसीडी के 6 बड़े अस्पताल और तीनों निगमों के 1,800 स्कूल हैं. एमसीडी की सबसे खास सिटीजन सर्विसेज है जो बर्थ और डेथ सर्टिफिकेट बनाती है.