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शाहीन बाग, दंगों के बाद दिल्ली में पहला चुनाव, मुस्लिम वोटों के लिए जानें किसका क्या दांव

शाहीन बाग और जामिया में हुए एनआरसी-सीएए-एनपीआर के खिलाफ आंदोलन, जहांगीर पुरी और सीलमुपर दंगों के बाद दिल्ली में पहला चुनाव नगर निगम का हो रहा है. एमसीडी चुनाव में कांग्रेस, बीजेपी, आम आदमी पार्टी और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी मैदान में हैं, जो मुस्लिम वोटों को साधने के लिए अलग-अलग सियासी प्रयोग कर रहे हैं. ऐसे में देखना है कि मुस्लिम वोटर्स की पहली पसंद कौन बनता है?

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दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) चुनाव को लेकर सियासी बिसात बिछ चुकी है. बीजेपी, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक रखी है और इन्हीं तीनों दलों के बीच चुनावी मुकाबला है. दिल्ली की सियासत में मुस्लिम मतदाताओं को साधने के लिए तीनों ही दलों ने अपने-अपने दांव चल रहे हैं. कांग्रेस ने अपने सियासी आधार को वापस पाने के लिए सबसे ज्यादा मुस्लिम कैंडिडेट उतारे हैं तो आम आदमी पार्टी भी अपनी पकड़ को बनाए रखना चाहती है. इस तरह एमसीडी का चुनाव बीजेपी के पसमांदा प्रयोग का पहला लिटमस टेस्ट होगा तो असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के लिए भी इम्तिहान है. 

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दिल्ली की सियासत में मुस्लिम मतदाता लंबे समय तक कांग्रेस को वोट करता रहा है, तो बीजेपी भी उनके लिए अछूत नहीं रही है. बीजेपी के टिकट पर दिल्ली में मुस्लिम पार्षद ही नहीं बल्कि लोकसभा भी जीते है. अन्ना आंदोलन से निकले अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी का गठन किया तो मुस्लिमों ने कांग्रेस का मोह छोड़कर उनके साथ हो गए. ऐसे में एमसीडी चुनाव में मुस्लिम वोटबैंक को साधने के लिए आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और बीजेपी ने अपने-अपने सियासी दांव चले हैं. इस तरह से देखना है कि एमसीडी चुनाव में मुस्लिमों का भरोसा कौन जीतता है? 

दिल्ली में मुस्लिम बहुल सीटें 

दिल्ली की सियासत में मुस्लिम मतदाता 12 फीसदी के करीब है, जिसके चलते हर आठवां मतदाता मुसलमान है. दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से 8 विधानसभा और नगर निगम की 250 में से करीब 50 सीटों पर मुस्लिम मतदाता अहम भूमिका निभाते हैं. बल्लीमारान, सीलमपुर, ओखला, मुस्तफाबाद, चांदनी चौक, मटिया महल, बाबरपुर, दिलशाद गार्डेन और किराड़ी मुस्लिम बहुल इलाके हैं. इन क्षेत्रों की पार्षद सीटों पर 40 से 90 फीसदी तक मुस्लिम मतदाता हैं. इसके अलावा त्रिलोकपुरी और सीमापुरी इलाके में भी मुस्लिम मतदाता काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं.

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MCD चुनाव में मुस्लिम कैंडिडेट 

एमसीडी चुनाव में मुस्लिमों को टिकट देने में कांग्रेस ने सबसे बड़ा दिल दिखाया है. कांग्रेस ने सबसे अधिक टिकट दिए हैं तो बीजेपी ने सबसे कम मुस्लिम प्रत्याशी उतारे हैं. कांग्रेस दिल्ली की राजनीति में वापसी करने का प्लान बनाया है. इसके लिए वह अपने पारंपरिक वोटबैंक को वापस पाने की कोशिश कर रही है. एमसीडी के कुल 250 वार्डों में से कांग्रेस ने 26 सीटों पर मुसलमान कैंडिडेट उतारे हैं. इस तरह कांग्रेस ने 10 फीसदी से अधिक टिकट मुस्लिम समुदाय के नेताओं को दिए हैं. 

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के 13 पार्षद सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशी उतारे हैं, जो सिर्फ पांच फीसदी है. वहीं, बीजेपी ने दिल्ली की चार पार्षद सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार पर भरोसा जताया है, लेकिन चारों ही सीटों पर पसमांदा दांव चला है. मुसलमानों के प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाने वाले असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने कुल 16 एमसीडी सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें से 14 मुस्लिम और दो दलित समुदाय से हैं. 

मुस्लिम बनाम मुस्लिम के बीच फाइट

दिल्ली एमसीडी चुनाव में मुस्लिम बहुल सीटों पर मुस्लिम बनाम मुस्लिम के बीच सियासी संग्राम हो रहा है. बीजेपी एमसीडी कीजिन चार सीटों पर मुस्लिम कैंडिडेट उतारे हैं, उन्हीं सीटों पर कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, एआईएमआईएम ने भी मुस्लिम प्रत्याशी पर ही दांव लगा रखा है. इसके अलावा एमसीडी की 9 सीटों पर कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और एआईएमआईएम के मुस्लिम नेताओं के बीच फाइट है जबकि इन सीटों पर बीजेपी से हिंदू समुदाय के नेता चुनाव मैदान में है. वहीं, 13 सीटों पर कांग्रेस के मुस्लिम कैंडिडेट की आम आदमी पार्टी और बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हिंदू समुदाय के नेताओं से टक्कर है. 

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मुस्लिम इलाके में AAP-कांग्रेस जीती

2017 के एमसीडी चुनाव में मुस्लिम बहुल इलाके में आम आदमी पार्टी का जबरदस्त तरीके से जादू चला था. दिल्ली में 13 मुस्लिम पार्षद अलग-अलग पार्टी से जीतकर आए थे, जिनमें आठ मुस्लिम पार्षद आम आदमी पार्टी से जीते और कांग्रेस से चार मुस्लिम पार्षद चुने गए थे. इसके अलावा एक पार्षद बसपा के टिकट पर जीतकर आए थे. इस तरह एमसीडी चुनाव में मुस्लिमों की पहली पसंद आम आदमी पार्टी बनी थी और पिछले दो विधानसभा चुनाव से भी मुस्लिम इलाके में केजरीवाल का जादू चला था. 

किस पार्टी से जीते मुस्लिम पार्षद 

आम आदमी पार्टी से चौहान बांगर सीट से अब्दुल रहमान, घोंदली से शाहनवाज, कदमपुरी से मो. साजिद, मुस्तफाबाद से शकीला बेगम, बाजार सीताराम से शमा परवीन, कुरैशी नगर से शाहीन, बल्लीमारन से मोहम्मद शादिक और अबुलफजल एंक्लेव सीट से अब्दुल वाजिद खान जीते थे. कांग्रेस के टिकट पर जामा मस्जिद सीट से सुल्तान आबाद, दिल्ली गेट से अली मोहम्मद इकबाल, दरियागंज    से यासमीन किदवई और जाकिर नगर से शोएब दानिश जीते थे. इसके अलावा सीलमपुर सीट पर बसपा से शकीला बेगम जीते थे. 

बीजेपी के पसमांदा प्रयोग का टेस्ट

एमसीडी चुनाव राजनीतिक दलों के लिए मुस्लिम सियासत के लिए एक सियासी प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें बीजेपी के पसमांदा प्रयोग का लिटमस टेस्ट होना है. बीजेपी ने चांदनी महल से इरफान मलिक, कुरैश नगर से समीना राजा, चौहान बांगर से सबा गाजी और मुस्तफाबाद से शबनम मलिक को उतारा है. बीजेपी ने मुस्लिमों के बीच अपनी सियासी पैठ जमाने के लिए पसमांदा मुस्लिम पर फोकस कर रही है. बीजेपी ने चारों पसमांदा मुस्लिमों को टिकट दिया है, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं. बीजेपी पर मुस्लिम विरोधी होने के आरोप लगते रहे हैं और यह भी ओपन सीक्रेट है कि बीजेपी को मुस्लिम समाज का वोट कम ही मिल पाता है. ऐसे में बीजेपी पसमांदा मुस्लिमों पर दांव खेलकर अपना सियासी आधार को मजबूत करने का दांव चला है. 

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कांग्रेस ने जताया मुस्लिमों पर भरोसा

कांग्रेस एमसीडी चुनाव में मुस्लिमों पर भरोसा जताया है. कांग्रेस ने ओवैसी की पार्टी से ज्यादा मुस्लिम कैंडिडेट एमसीडी के चुनाव में उतारे हैं ताकि दोबारा से उनका विश्वास जीत सके. पूर्वी दिल्ली नगर निगम के तीन वार्डों के उपचुनाव में कांग्रेस को 30 पीसदी मत मिले थे और उसने मुस्लिम बहुल एक वार्ड में जीत भी हासिल की थी. इसके मद्देनजर 25 फीसदी से अधिक मुस्लिम आबादी वाले वार्डों में कांग्रेस ने मुस्लिम कैंडिडेट उतारे हैं और जिन सीटों पर मुस्लिम मतदाता कम, लेकिन उनकी संख्या अच्छी है. वहां भी मुस्लिम उम्मीदवार उतारे गए हैं. कांग्रेस ने 26 टिकट एमसीडी चुनाव में मुसमलानों को देकर बड़ा दांव चला है.

एक दर्जन सीट पर AAP के मुस्लिम 

आम आदमी पार्टी ने मुस्लिम बहुल पार्षद सीटों पर मुस्लिम कार्ड खेला है. केजरीवाल ने पुराने मुस्लिम पार्षद को दोबारा से मौका दिया है तो कुछ सीटों पर नए कैंडिडेट उतार रखे हैं. AAP ने 13 सीटों पर मुस्लिम कैंडिडेट दिए हैं, जो कि महज पांच फीसदी है. इन सीटों पर आम आदमी पार्टी के मुस्लिम विधायक भी है. इस तरह आम आदमी पार्टी ने मुस्लिम कैंडिडेट को उतारकर अपनी सियासी पकड़ को मजबूत बनाए रखना चाहती है, लेकिन उसे चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा रहा है. 

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ओवैसी का दलित-मुस्लिम समीकरण

एमसीडी चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी  AIMIM ने दलित-मुस्लिम का दांव चला है. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने दलित नेता चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी के साथ एमसीडी चुनाव में गठबंधन किया है.  AIMIM दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष कलीमुल हफीज ने कहा कि गठबंधन ने 50 से अधिक सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि एआईएमआईएम 16 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. उनका कहना है कि दिल्ली में दलित और मुसलमानों का सभी राजनीतिक दलों ने वोट लिया है पर उनके लिए काम नहीं किए हैं. केजरीवाल का चेहरा मुस्लिम विरोधी तो जगजाहिर है, लेकिन अब तो दलित विरोधी भी हो गए हैं. 

मुस्लिम इलाके में केजरीवाल की चुनौती

शाहीन बाग में हुए एनआरसी-सीएए-एनपीआर के खिलाफ आंदोलन, जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय आंदोलन, जहांगीर पुरी और दिल्ली दंगों के दौरान आम आदमी पार्टी ने पूरी तरह से दूरी बनाए रखा था तो कांग्रेस मुसलमानों के साथ पूरी तरह डट कर खड़ी रही. अरविंद केजरीवाल मुसलमानों के मुद्दों पर खामोश रहे. गुजरात चुनाव में भी बिल्किस बानो से जुड़े मुद्दे पर कोई टिप्पणी करने से बचे हैं जबकि कांग्रेस बिल्किस बानो के अपराधियों को दुबारा जेल के पीछे भेजने की मांग कर रही है. ऐसे में मुसलमान मतदाता एमसीडी चुनाव में केजरीवाल को लेकर नाराजगी भी है, जिसका कांग्रेस फायदा उठाना चाहती है. बीजेपी की नजर पसमांदा मुस्लिम पर है, जिन्हें विकास के नाम पर जोड़ रही है.

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