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MCD Election: बीजेपी, AAP, कांग्रेस... दिल्ली में किसकी 'मिनी सरकार'? ऐसी बन रही सियासी तस्वीर

दिल्ली नगर निगम की 250 सीटों के लिए आज चुनाव हो रहे हैं. बीजेपी, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने ने वोटरों को रिझाने के लिए भरपूर कवायद की है, लेकिन जनता किसके सिर पर ताज पहनाती है ये तो रिजल्ट आने पर ही पता चलेगा. एमसीडी इलेक्शन में 1,349 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.

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 दिल्ली नगर निगम की 250 सीटों के लिए सुबह 8 बजे से वोटिंग जारी है (फोटो-PTI)
दिल्ली नगर निगम की 250 सीटों के लिए सुबह 8 बजे से वोटिंग जारी है (फोटो-PTI)

दिल्ली नगर निगम (MCD) की 250 सीटों के लिए आज वोटिंग हो रही है. सुबह 8 बजे से शुरू हुआ मतदान शाम साढ़े पांच बजे तक चलेगा. इस बार 1,349 कैंडिडेट चुनावी मैदान में हैं. वहीं डेढ़ करोड़ वोटर इन कैंडिडेट्स की किस्मत का फैसला करेंगे. इस बार का एमसीडी चुनाव त्रिकोणीय हो गया है. क्योंकि बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने चुनावी रण जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है.

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दरअसल, MCD पर पिछले 15 साल से काबिज बीजेपी अपने सियासी वर्चस्व को कायम रखने के लिए जद्दोजहद कर रही है, तो AAP दिल्ली की सत्ता के साथ-साथ नगर निगम पर भी दबदबा बनाने की कवायद में है. वहीं, कांग्रेस दिल्ली की सियासत में अपने खोए हुए जनाधार को वापस पाने के लिए मशक्कत कर रही है. उधर, बसपा दलित वोटरों के सहारे एक बार फिर दिल्ली में अपनी उपस्थिति दर्ज करना चाहती है, तो असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM मुस्लिम वोटों के दम पर दिल्ली में जगह बनाने के लिए उतरी है. 

AAP-बीजेपी में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी

सीएम अरविंद केजरीवाल ने दावा किया है कि अगर उनकी पार्टी एमसीडी जीत जाती है तो वो विदेश से एक्सपर्ट बुलाकर दिल्ली के कूड़े के तीनों ढेरों को एक साल में समाप्त करेगी. वहीं, बीजेपी एमसीडी को फंड न देने के लिए अरविंद केजरीवाल सरकार को घेरती है. बीजेपी का कहना है कि केजरीवाल चार साल पहले से कह रहे थे कि देखना कि नदी कैसे साफ होती है, लेकिन न यमुना साफ हुई न ही प्रदूषण कम हुआ. बीजेपी दिल्ली में गली-गली में शराब के ठेके खुलने का आरोप लगा रही है. साथ ही जेल में बंद केजरीवाल के मंत्री सत्येंद्र जैन के मसाज वाले वीडियो पेश कर सवाल खड़े कर रही है. 

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AAP की MCD पर कब्जा जमाने की कवायद

पिछले 8 वर्षों से दिल्ली की सत्ता पर आम आदमी पार्टी काबिज है. 2017 में एमसीडी के चुनाव में आम आदमी पार्टी की सीटें तो आईं, लेकिन वो मेयर अपना नहीं बनवा पाई. ऐसे में आम आदमी पार्टी एमसीडी पर भी अपना कब्जा जमाना चाहती है. इसी के चलते इस बार एमसीडी चुनाव में बीजेपी के खिलाफ आम आदमी पार्टी ने जबरदस्त तरीके से घेराबंदी की है. 

क्या है कांग्रेस की रणनीति?

दिल्ली में कांग्रेस एमसीडी चुनाव के जरिए अपने खोए हुए राजनीतिक जनाधार को हासिल करने के प्रयास में हैं. हालांकि चुनावी मुकाबले में बीजेपी और आम आदमी पार्टी के आगे कांग्रेस को कमजोर बताया जा रहा है. एमसीडी चुनाव में कांग्रेस का पूरा फोकस मुस्लिम इलाकों पर रहा है. इसके लिए पार्टी ने तमाम लोकलुभाने वादे कर किए हैं. 

कांग्रेस ने सबसे ज्यादा 26 मुस्लिम कैंडिडेंट उतारे हैं और मुस्लिम इलाके में सीएम अरविंद केजरीवाल के द्वारा कोरोना के दौर में तब्लीगी जमात के खिलाफ दिए गए बयान और मरकज में ताला लगाए जाने के फैसले को वायरल किया जा रहा है. कांग्रेस नेता दिल्ली में सीएए-एनआरसी के खिलाफ आंदोलन पर केजरीवाल की चुप्पी पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं तो सीलमपुर और जहांगीरपुरी में हुए दंगों को लेकर घेर रही है. कांग्रेस कह रही है कि केजरीवाल दिल्ली की राजनीति बदलने आए थे, लेकिन स्थिति जस की तस है. 

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दिल्ली में कूड़े के पहाड़ बड़ा सियासी मुद्दा

दिल्ली के गाजीपुर, भलस्वा और ओखला. दिल्ली के इन तीन कूड़े के पहाड़ों को लेकर सियासत गर्म है. आम आदमी पार्टी कूड़े के ढेर के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहरा रही है, क्योंकि बीजेपी का ही एमसीडी पर नियंत्रण है. अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के तीनों कूड़े के पहाड़, गलियों में घूमते आवारा पशु, साफ-सफाई और प्रदूषण के मुद्दे को लेकर बीजेपी के खिलाफ नेरेटिव गढ़ा है.

इतना ही नहीं, रविवार को मतदान से पहले डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने भी कहा कि दिल्ली के डेढ़ करोड़ वोटर सफाई के मुद्दे पर वोट करें. वहीं एमसीडी कर्मचारियों के वेतन भुगतान से जुड़े मुद्दे भी एमसीडी चुनाव के लिहाज से अहम हैं. एमसीडी कर्मचारी सही समय पर वेतन न मिलने की सूरत में समय-समय पर हड़ताल पर जाने को मजबूर होते हैं.

एमसीडी में किस पार्टी के कितने कैंडिडेट?

दिल्ली एमसीडी चुनाव में 250 पार्षद सीटों के लिए 1349 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें से 382 निर्दलीय प्रत्याशी हैं. बीजेपी और आम आदमी पार्टी ने सभी 250 सीटों पर अपने-अपने कैंडिडेट उतारे हैं, जबकि कांग्रेस के 247 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. जेडीयू 23 सीटों पर चुनाव लड़ रही है तो AIMIM ने 15 कैंडिडेट उतारे हैं. बसपा ने 174, इंडियन मुस्लिम लीग ने 12, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने 3, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक ने 4, एनसीपी ने 29 और सपा, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने एक-एक सीट पर प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं. 

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क्या काम करती है MCD?

दिल्ली की टाउन प्लानिंग, सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के तहत अस्पतालों को चलाना, साफ-सफ़ाई सुनिश्चित करना, जल संसाधनों के विकास के साथ जल निकासी को भी सुनिश्चित करना, अपने-अपने क्षेत्रों के जन्म और मृत्यु का रिकॉर्ड रखना, प्राइमरी स्कूलों का संचालन, ई-रिक्शा, रिक्शा और ठेलों को लाइसेंस देना और उनका नियमन करना, हाउस टैक्स से लेकर दूसरे तरह के टैक्सों की वसूली करना आदि.

दिल्ली सरकार और दिल्ली एमसीडी के कुछ अधिकार एक दूसरे से ओवरलैप भी करते हैं. 60 फीट से अधिक चौड़ी सड़कों के निर्माण से जुड़ा कार्य जहां दिल्ली सरकार के अंतर्गत आता है, वहीं, इससे कम एमसीडी करती है. ऐसे ही प्राइमरी स्कूल में एक से कक्षा आठ तक की पढ़ाई एमसीडी अपने स्कूलों में करती है, तो दिल्ली सरकार जूनियर, इंटरमीडिएट और उच्च शिक्षा देती है.

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