देश की राजधानी दिल्ली में नगर निगम के परिसीमन का काम पूरा हो गया है. इसी के साथ दिल्ली में एमसीडी चुनाव कराए जाने का रास्ता साफ हो गया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने परिसीमन के मसौदे पर हस्ताक्षर करके 800 पन्नों की फाइल दिल्ली राज्य चुनाव आयोग के पास भेज दी और परिसीमन संबंधी अधिसूचना भी जारी कर दी है. परिसीमन के बाद दिल्ली नगर निगम का स्वरूप अब पूरी तरह से बदल गया है.
एमसीडी के एकीकरण के बाद अब अस्तित्व में आए दिल्ली नगर निगम के वार्ड की संख्या भी घट गई है तो पार्षद के क्षेत्र का दायरा भी बढ़ा है. परिसीमन के चलते नगर निगम के वार्डों के नाम और नंबर बदल गए हैं. निगम वार्डों का आरक्षण नए तरीके से चुनाव आयोग करेगा. अनुसूचित जाति, ओबीसी और महिलाओं के लिए पहले से आरक्षित वार्ड पूरी तरह से बदल जाएंगे. एमसीडी के नए निजाम में सीट से लेकर वोट, एरिया और आरक्षण ही नहीं बल्कि सियासी दलों का समीकरण भी बदल जाएगा.
दिल्ली में एक मेयर-एक कमिश्नर
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) तीनों इलाकों में बंटी हुई थी, जो उत्तरी दिल्ली, दक्षिण दिल्ली और पूर्वी दिल्ली के रूप में जानी जाती थी. मोदी सरकार ने मई 2022 में दिल्ली के तीनों निगमों को मिलाकर एकीकृत कर दिया. इस तरह एक एमसीडी हो गई है. दिल्ली एमसीडी में अभी तक मेयर, कमिश्नर और चीफ इंजीनियर तीन-तीन हुआ करता थे, जो अलग-अलग जोन के होते थे. एमसीडी के एकीकरण किए जाने के बाद मेयर, कमिश्नर और चीफ इंजीनियर एक-एक होंगे. इनके पास पहले से ज्यादा शक्तियां होंगी.
एमसीडी सीटें 272 से घटकर 250
दिल्ली नगर निगम में अभी तक 272 नगर निगम की सीटें थीं, लेकिन अब 250 हो गई हैं. दिल्ली में पहले उत्तरी और दक्षिण नगर निगम 104-104 पार्षद सीटें थीं जबकि पूर्वी दिल्ली में 64 सीटें हुआ करती थीं. परिसीमन के बाद एमसीडी सीटें 272 से घटकर 250 कर दी गई हैं. यह परिसीमन साल 2011 की जनगणना के आधार पर किया गया. इस तरह दिल्ली में 70 विधानसभा से 21 विधानसभा क्षेत्रों में एक-एक वार्ड कम किए गए हैं तो एक विधानसभा में सीट बढ़ी भी है. इस तरह कम आबादी वाले विधानसभा क्षेत्रों में वार्डों की संख्या है और अधिक आबादी वाले विधानसभा क्षेत्रों में वार्डों की संख्या ज्यादा की गई है
एमसीडी वार्ड के एरिया बढ़े-घटे
साल 2011 की जनसंख्या के हिसाब से एमसीडी सीटों का परिसीमन किया गया है, जिसके चलते कई वार्ड और इलाके इधर से उधर हो गए हैं. नए एमसीडी में पार्षद का इलाका यानि क्षेत्र पहले से बढ़ जाएगा, लेकिन कुछ जगह पर घट गई है. दिल्ली में अब सबसे बड़ा वार्ड मयूर विहार फेज वन बन गया है तो उसके बाद त्रिलोकपुरी और संगम विहार है. वहीं, दिल्ली में सबसे छोटा वार्ड चांदनी चौक है. परिसीमन से एमसीडी वार्ड के क्षेत्र ही नहीं बढ़े-घटे, बल्कि वार्ड में मतदाताओं की संख्या बढ़ गई है. वार्ड क्षेत्र का नाम और नंबर बदल गए हैं, जिन्हें परिसीमन में जिक्र किया गया है. इस तरह सभी वार्डों के मैप जारी कर सीमा निर्धारित करके बताया है
निगम में एससी के लिए 42 सीटें रिजर्व
केंद्र सरकार ने दिल्ली नगर निगम में 250 सीटों में से 42 वार्ड सीट को अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित किया गया है. इन वार्डों में परिसीमन का काम पूरा हो चुका है, लेकिन कौन सी 42 सीट आरक्षित होगी, दिल्ली का राज्य चुनाव आयोग अनुसूचित जाति के लोगों के लिए सीट चिन्हित और आरक्षित करके नोटिफिकेशन जारी करेगा. इस तरह पहले की कई सामान्य सीटें एससी के लिए आरक्षित हो सकती हैं.
सामान्य वर्ग-महिलाओं के लिए आरक्षण
दिल्ली नगर निगम के एक्ट 1957 के अनुच्छेद 490ए के उपधारा पांच के खंड (2) के तहत खंड ग, घ और ड़ की शक्तियां राज्य निर्वाचन आयोग उपयोग कर एमसीडी सीटों को आरक्षित करेगा. इसमें महिलाओ से लेकर ओबीसी, अनुसूचित जाति और सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित किया जाता है. केंद्रीय गृहमंत्रालय अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित वार्डों की संख्या 42 निर्धारित की है, तो महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण करना होगा. महिलाओं, ओबीसी और सामान्य वर्ग वाली पार्षद सीटों का आरक्षण दिल्ली चुनाव आयोग को तय करना है.
एमसीडी में सामान्य वर्ग के वार्डों में 50 प्रतिशत वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित करना होगा. इस तरह से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित वार्डों में महिलाओं के लिए 21 वार्ड और सामान्य वर्ग 104 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे. आम तौर पर यह प्रक्रिया चुनाव की घोषणा करने से कुछ दिन पहले की जाती है. ऐसे ही ओबीसी के लिए 27 फीसदी सीटें आरक्षित करनी होगी.
राजनीतिक दलों का समीकरण बिगड़ा
नए एमसीडी में सीटों का ही समीकरण नहीं गड़बड़ाया बल्कि राजनीतिक दलों का सियासी गणित भी बिगड़ गया है. कांग्रेस बीजेपी और आम आदमी पार्टी को परिसीमन के बाद नए तरीके से अपनी रणनीति बनाई होगी, क्योंकि क्षेत्र से लेकर वोटर्स और जातीय समीकरण भी बदल गए हैं. पिछले 15 वर्षों से एमसीडी पर बीजेपी काबिज है और एक बार से अपने वर्चस्व को बनाए रखने की कवायद में है.
वहीं, दिल्ली की सत्ता पर भले ही आम आदमी पार्टी आठ सालों से काबिज है, पर एमसीडी में अपना दबदबा नहीं बना सकी. ऐसे में आम आदमी पार्टी एमसीडी में आने के लिए हरसंभव कोशिश में है. कांग्रेस दिल्ली में अपने खोए हुए जनाधार में वापसी के लिए हाथ पांव मार रही है और एमसीडी में दोबारा से वापसी के लिए हर कोशिश कर रही है. ऐसे में परिसीमन के बाद नए तरीके से सियासी दलों के लिए चुनौती खड़ी हो गई.