सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर के एनजीओ के खिलाफ दिल्ली के महरौली थाने में एफआईआर दर्ज हुई है. यह एफआईआर राष्ट्रीय बाल संरक्षण अधिकार आयोग (एनसीपीसीआर) की शिकायत पर की गई है. जो दो चिल्ड्रन होम के खिलाफ की गई थी- उम्मीद अमन घर (लड़कों के लिए) और खुशी रेनबॉ होम (लड़कियों के लिए).
पुलिस ने बताया कि एनसीपीसीआर की शिकायत पर उम्मीद अमन घर और खुशी रेनबॉ होम के खिलाफ मंगलवार को महरौली थाने में मामला दर्ज किया गया. ये दक्षिण दिल्ली में है और इनकी स्थापना सेंटर फॉर इक्यूटी स्टडीज़ (सीएसई) ने की है. सीएसई का संचालन न्यास सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हर्ष मंदर द्वारा किया जा रहा है.
एफआईआर के मुताबिक, एनसीपीसीआर ने बताया है कि एनजीओ में मौजूद अनाथ बच्चों को CAA और NRC के प्रोटेस्ट में यूज किया गया था. इन्हें प्रोटेस्ट में ले जाया जाता था. साथ ही बच्चों के साथ यौन शोषण की भी शिकायत मिली थी. इसी वजह से एफआईआर में JJ एक्ट (जुवेनाइल जस्टिस) लगाया गया है.
एफआईआर के मुताबिक, एनसीपीसीआर ने अक्टूबर 2020 में एनजीओ का दौरा किया था. इस दौरान उन्हें पता चला कि एनजीओ में विदेशी भी आते थे. साथ ही फंड की हेरा फेरी भी की गई है. डीसीपी साउथ दिल्ली के मुताबिक, एनसीपीसीआर ने शिकायत में बताया कि बच्चों का इस्तेमाल CAA और NRC प्रोटेस्ट में किया गया था. हमने एफआईआर दर्ज कर, जांच शुरू कर दी है.
दिल्ली पुलिस CAA/NRC प्रोटेस्ट के दौरान दिल्ली हिंसा में भी हर्ष मंदर के इंवॉलमेंट की जांच भी कर रही है. हर्ष मंदर महरौली इलाके में उम्मीद अमन घर नाम की संस्था चलाते हैं, जिसमें लावारिस बच्चे रहते हैं. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, अक्टूबर 2020 में NCPCR की टीम ने संस्था का निरीक्षण किया था और खामियां पाई थीं, जिसके बाद एफआईआर दर्ज हुई. पुलिस ने आईपीसी 188 और JJ एक्ट में एफआईआर दर्ज की है.
बता दें कि हर्ष मंदर पर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का एक मामला चल रहा है. फिलहाल यह केस विचाराधीन है. पिछले साल मार्च में दिल्ली पुलिस के डीसीपी लीगल सेल ने एक्टिविस्ट हर्ष मंदर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया था. दिल्ली पुलिस ने मंदर पर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का आरोप लगाया था. हलफनामे में कहा गया था कि हर्ष मंदर ने सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ बयानबाजी की है, जो कोर्ट की अवमानना है.