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दिल्ली हिंसा: परवेज हत्या केस की चार्जशीट, पुलिस के पास न फुटेज-न पिस्टल

25 फरवरी को दिल्ली हिंसा के दौरान परवेज को भीड़ ने गोली मार दी थी. परवेज की हत्या के बाद उसके बेटे साहिल परवेज ने पुलिस को फोन करके घटना की पूरी जानकारी दी थी. साहिल ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा विश्व हिंदू परिषद से जुड़ा देवेश मिश्रा भीड़ का नेतृत्व कर रहा था.

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दिल्ली हिंसा के मामले में पुलिस के हाथ नहीं कोई सबूत (फाइल फोटो)
दिल्ली हिंसा के मामले में पुलिस के हाथ नहीं कोई सबूत (फाइल फोटो)

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  • फरवरी महीने में हुई हिंसा के मामले में चार्जशीट दाखिल
  • हत्या में इस्तेमाल की गई पिस्टल भी नहीं मिली

दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में फरवरी महीने में हुई हिंसा के मामले में चार्जशीट दाखिल की है. चार्जशीट में बताया गया है कि आरोपियों ने हिंसा से जुड़े अपने मोबाइल डेटा को डिलीट कर दिया था, इसलिए हिंसा में मारे गए 48 साल के परवेज की हत्या के मामले में पुलिस के पास ना तो कोई फुटेज है और ना ही हत्या के लिए इस्तेमाल की गई पिस्टल. दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को यह भी बताया कि आरोपियों ने हिंसा के दौरान सीसीटीवी कैमरे भी तोड़ दिए थे.

बता दें, 25 फरवरी को दिल्ली हिंसा के दौरान परवेज को भीड़ ने गोली मार दी थी. परवेज की हत्या के बाद उसके बेटे साहिल परवेज ने पुलिस को फोन करके घटना की पूरी जानकारी दी थी. साहिल ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा विश्व हिंदू परिषद से जुड़ा देवेश मिश्रा भीड़ का नेतृत्व कर रहा था. जिसके बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने देवेश मिश्रा समेत कई लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया. पुलिस ने देवेश मिश्रा के यहां से सीसीटीवी कैमरे को जब्त करके रोहिणी की एफएसएल लैब में भेजा.

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पुलिस ने बताया कि परवेज की हत्या में इस्तेमाल पिस्टल ना मिलने के कारण चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले के ट्रायल से पहले ही कोर्ट में आर्म्स एक्ट से जुड़े सेक्शन हटा दिए गए हैं. दिल्ली के नॉर्थ ईस्ट में यमुना विहार रोड के हिंसा के इस मामले में 16 लोगों के खिलाफ पुलिस ने हिंसा फैलाने और हत्या करने का मामला दर्ज किया था. लेकिन अपनी चार्जशीट में पुलिस ने कहा कि आरोपियों ने हिंसा के दौरान का सभी डेटा अपने मोबाइल से हटा दिया है.

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इतना ही नहीं हिंसा को अंजाम देने के दौरान सीसीटीवी कैमरे भी तोड़ दिए गए थे. फिर भी पुलिस ने कोर्ट को बताया है कि दो सीसीटीवी कैमरे बरामद किए गए हैं जिनको एफएसएल लैब में भेजा गया है. साथ ही आरोपियों के मोबाइल का डाटा रिट्रीव करने के लिए भी लैब भेजा गया है. पुलिस फिलहाल एफएसएल रिपोर्ट का इंतजार कर रही है.

हालांकि देवेश मिश्रा ने 21 अप्रैल को दिल्ली सरकार और एलजी को दिल्ली पुलिस के खिलाफ अपनी शिकायती चिट्ठी मेल पर भेजी है. जिसमें कहा गया है कि दिल्ली पुलिस जबरन बेकसूर हिंदुओं को निशाना बनाकर उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज करा रही है. देवेश मिश्रा का कहना है कि हिंदू इस मामले में हिंसा पीड़ित हैं, उनके कई जानकार हिंदुओं की दुकानें भी इस दौरान जला दी गईं. मेरे खिलाफ भी झूठी शिकायतें दर्ज करवाई गई हैं.

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देवेश मिश्रा का दावा है कि दिल्ली दंगों के दौरान वह दिल्ली में नहीं थे. देवेश मिश्रा के मुताबिक वो 23 से 27 फरवरी के बीच वो उत्तर प्रदेश के एटा में अपनी बहन के घर थे.

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