प्रदूषण की वजह से दुनिया भर में चर्चित दिल्ली के हालात इस बार कुछ ज्यादा खराब नजर आ रहे हैं. वैसे तो दिल्ली में धुंध, धुआं, प्रदूषण, जहरीली हवा कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार बात कुछ अलग है. अक्सर दिल्ली के गैस चैंबर बनने की खबरें दीवाली के बाद या तेज सर्दी होने पर आती हैं, लेकिन इस बार दिल्ली की हवा काफी पहले ही खराब होने लगी है. इसका नतीजा ये है कि अक्टूबर खत्म होने से पहले ही ग्रैप-2 लागू करना पड़ गया है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर अभी दिल्ली की हवा कितनी जहरीली हो गई है कि यहां इमरजेंसी पाबंदियां लगनी शुरू हो गई हैं.
दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ दिनों से बढ़ते प्रदूषण के बीच आखिरकार आज से पाबंदियों का एलान हो गया है. दिल्ली एनसीआर में आज सुबह आठ बजे से ग्रैप-2 लागू कर दिया है. इसके तहत फिलहाल कुछ मामूली पाबंदियां लागू की गई हैं. इस आदेश के लागू होते ही दिल्ली-एनसीआर में डीजल जनरेटर पर रोक लग गई है. अभी हवा का स्तर काफी ज्यादा खराब हो गया है.
अभी कैसे है हालात?
दिल्ली में सर्दी आने से पहले ही हवा जहरीली होना शुरू हो गई है. अगर दिल्ली के अलग-अलग इलाकों की बात करें तो आनंद विहार में सुबह 8 बजे (मंगलवार) 385 AQI रिकॉर्ड किया गया. इसके अलावा जहांगीरपुर में 362, मुंडका में 565, पंजाबी बाग में 354, बवाना में 350 और रोहिणी में 350 AQI था. इनके अलावा बुराड़ी में सुबह 8 बजे 340,आरके पुरम में 332, द्वारका सेक्टर-8 में 324, नरेला में 324, अलीपुर में 321, मंदिर मार्ग पर 319 AQI था.
पहले क्यों लगानी पड़ी पाबंदियां?
हर बार दिवाली की हवा सर्दी में दूषित हो जाती है, लेकिन इस बार ये हालात काफी जल्दी हो गए हैं. दिल्ली में हवा काफी पहले से दूषित हो चुकी है और सरकार ने 15 अक्टूबर को ही ग्रैप-1 की पाबंदियां लागू कर दी थीं. 15 अक्टूबर से पहले ही हवा दूषित होने लगी थी और अब हवा का स्तर लगातार खराब हो रहा है. इसी का नतीजा है कि ग्रैप-1 के बाद अब ग्रैप लगाने की नौबत आ गई है.
क्या राहत की है कोई उम्मीद?
अभी राहत की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है और बताया जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों तक एक्यूआई स्तर 300 से ज्यादा ही रहने वाला है. पूर्वानुमान के हिसाब से अभी मौसम साथ नहीं दे रहा है और हवा भी नहीं चल रही है. इसके साथ ही अभी बारिश की कोई भविष्यवाणी नहीं हुई है. ऐसे में दिल्ली के लोगों को आगे भी इसी जहरीली हवा का सामना करना होगा.
कितना स्तर माना जाता है खतरनाक?
अगर हेल्थ के हिसाब से देखें तो 0 से 50 तक का एक्यूआई सबसे सही होता है और जैसे जैसे इसका स्तर बढ़ता जाता है, वैसे वैसे हेल्थ के लिए नुकसान बढ़ता जाता है.
- जब ये स्तर 51 से 100 तक पहुंच जाता है तो इस स्थिति में बच्चों और बूढ़े लोगो को कुछ दिक्कत हो सकती है और अस्थमा आदि के मरीजों को परेशानी होती है.
- 101-150 तक जब स्तर पहुंच जाता है तो सेंसेटिव लोगों को दिक्कत होने लगती है और अस्थमा आदि से परेशान लोगों को बाहर की हवा से बचने के लिए कहा जाता है.
- 151-200 तक स्तर की हवा होने पर अनहेल्दी मानी जाती है. जिन लोगों को सांस संबंधी दिक्कत होती है, उनकी दिक्कत बढ़ जाती है.
- 201-300 तक स्तर के बीच की हवा को वेरी अनहेल्दी कैटेगरी में माना जाता है. इसमें सिर्फ सेंसेटिव लोगों को ही नहीं, बल्कि आम लोगों को दिक्कत होने लगती है. इस स्थिति में बच्चों को बाहर की हवा से बचाना चाहिए.
- 300 से ज्यादा एक्यूआई स्तर की हवा में हेल्थ अलर्ट जारी किया जाता है. इसमें लोगों को गले में आंख में दिक्कत होना शुरू हो जाती है और बाहर की हवा से कम से कम संपर्क में आने की सलाह दी जाती है.
क्या होता है ग्रैप-2?
GRAP का फुल फॉर्म ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान है. इस प्लान के जरिए प्रदूषण को कंट्रोल किया जाता है. इसके कई चरण हैं और ये चरण भी बढ़ते प्रदूषण के साथ बढ़ते जाते हैं. जैसे जैसे चरण बढ़ते हैं, वैसे वैसे दिल्ली में पाबंदियां भी बढ़ती जाती हैं. GRAP के 4 चरण होते हैं. जब दिल्ली में हवा 201 से 300 एक्यूआई तक खराब होती है तो पहला चरण लागू किया जाता है.
इसके बाद अगर हवा ज्यादा खराब होती है और एक्यूआई 301 से 400 तक पहुंच जाता है तो इसका दूसरा चरण लागू हो जाता है. अगर हवा ज्यादा खराब हो जाए यानी एक्यूआई 400 से भी ज्यादा हो जाए तो तीसरा चरण लगता है और हालात ज्यादा खराब होने पर GRAP का चौथा लेवल लागू कर दिया जाता है.
क्या पाबंदियां रहेंगी?
डीजल जनरेटर चलने पर रोक लगाई गई है और निजी गाड़ियों के इस्तेमाल को कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाया जाएगा. इसके साथ ही सीएनजी-इलेक्ट्रिक बसों और मेट्रो की सर्विस को बढ़ाया जाएगा. दिल्ली में कूड़ा, लकड़ी या कोयला जलाने पर रोक होगी.