दिल्ली में सर्दियां शुरू होते ही प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगता है. हर साल दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए अक्टूबर में ग्रेप-1 लागू किया जाता था, लेकिन इस साल सितंबर से ही पाबंदिया लगा दी गई हैं. प्रदूषण बढ़ने से दिल्लीवासियों को कई तरह की फेफड़े और सांस संबंधी बीमारी भी हो जाती है. दिल्ली में प्रदूषण का एक बड़ा कारण सड़कों पर उड़ती धूल है. क्योंकि राजधानी में जब गड्ढा युक्त सड़कों पर गाड़ियां जब दौड़ती हैं तो उड़ती हुई धूल से लोगों को सांस लेने में दिक्कत होती है और यह प्रदूषण का एक बड़ा कारण भी है.
दिल्ली में 500 किलोमीटर सड़क की जर्जर हालत
एमसीडी के ताजा सर्वे में यह खुलासा हुआ है कि करीब 500 किलोमीटर सड़क जर्जर हालत में है. यानी साफ है कि दिल्ली के प्रदूषण की समस्या कम से कम धूल की वजह से इस सीजन में बरकरार रह सकती है. पिछले महीने दिल्ली के कमिश्नर को लेटर लिखकर मेयर फंड के 500 करोड़ रुपये सड़कों के गड्ढ़े खत्म करने के लिए लिखा था.
जानें क्या कहती है सर्वे रिपोर्ट?
दिल्ली नगर निगम 15000 किलोमीटर रोड मेंटेन करता है लेकिन स्टैंडिंग कमेटी न बन पाने की वजह से एक बार फिर निगम वित्तीय संकट से जूझ रहा है लिहाजा खराब सड़क इस बार भी दिल्ली के प्रदूषण को बढ़ाने की एक बड़ी वजह बन रही है. यही वजह है कि दशकों से दिल्ली नगर निगम की सड़कों की हालत खस्ता है, जिसमें ना ही गड्ढे भरे जा सके हैं और ना ही सड़कों की नई कारपेटिंग हो सकी है. हालांकि, आधिकारिक तौर पर एमसीडी के अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि अप्रैल से लेकर सितंबर तक करीब 68 किलोमीटर सड़क की मरम्मत की जा चुकी है.
विपक्ष हुआ हमलावर
दिल्ली नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व महापौर सरदार राजा इकबाल सिंह ने आज दिल्ली की साफ सफाई पर दिल्ली की मेयर साहिबा द्वारा की गई प्रेस कांफ्रेंस पर कड़ा विरोध किया. सरदार राजा इकबाल सिंह ने कहा कि निगम की AAP सरकार एक साफ सुथरा एवं प्रदूषण मुक्त शहर देने के मुद्दे पर बुरी तरह विफल साबित हुई है. सारी दिल्ली की सड़कें टूटी फूटी पड़ी हैं जिससे सारा दिन धूल उड़ती रहती है और हर जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं.
दिल्ली के प्रदूषण के लिए स्थानीय कारक भी जिम्मेदार हैं जो कि दिल्ली सरकार एवं निगम की आम आदमी पार्टी द्वारा पिछले दस साल हाथ पर हाथ रखे रहने का प्रतिफल है. सरदार राजा इकबाल सिंह ने कहा कि दिल्ली की जनता निगम एवं दिल्ली की आप सरकार से बुरी तरह त्रस्त है एवं आगामी विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाने के लिए प्रतिबद्ध है. आपको बता दें कि साल 2024-25 के बजट में करीब 1000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया ताकि एमसीडी शासित सड़कों की मरम्मत हो सके.
ऊर्जा यानी यूनाइटेड रेजिडेंट ज्वाइंट एक्शन के अध्यक्ष अतुल गोयल ने कहा कि एमएलए का फंड बढ़कर अब 15 करोड़ हो गया है लेकिन इसका इस्तेमाल पहले तो पीडब्लूडी रोड के लिए होगा उसका बचा हुआ जो हिस्सा एमसीडी के लिए तब तक नहीं हो सकेगा जब तक कि टेंडरिंग में पास ना हो वहीं आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर अगर चुनाव आचार संहिता लागू हो जाती है तो फिर ये भी बहुत मुश्किल होगा.
ग्रेप 1 में हैं ये पाबंदियां
दिल्ली और आस-पास के इलाकों में वायु गुणवत्ता में सुधार की रणनीति तैयार करने के लिए जिम्मेदार स्वायत्त निकाय, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने इस साल के लिए अपनी संशोधित ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) की शुरुआत की है. संशोधित ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के तहत GRAP-3 में एनसीआर राज्यों से प्रदूषण फैलाने वाली बसों को दिल्ली में प्रवेश करने की अनुमति नहीं.
ऐसा तब होगा जब शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) स्टेज III - 'गंभीर' (AQI 401 और 450 के बीच) तक पहुंच जाएगा. यानी GRAP-3 के तहत अब एनसीआर से प्रदूषण फैलाने वाली बसों की दिल्ली में एंट्री नहीं होगी. सीएनजी, बीएस VI और इलेक्ट्रिक बसों को इसमें छूट रहेगी. इसके अलावा अखिल भारतीय पर्यटक परमिट वाली बसों या टेम्पो यात्रियों पर भी ये लागू नहीं होगा. बता दें कि दिल्ली की वायु गुणवत्ता के आधार पर GRAP को चार चरणों में वर्गीकृत किया गया है:
स्टेज I - 'खराब' (AQI 201-300);
स्टेज II - 'बहुत खराब' (AQI 301-400);
स्टेज III - 'गंभीर' (AQI 401-450);
स्टेज IV - 'गंभीर प्लस' (AQI >450).