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दिल्ली: झुग्गियों को हटाने का मामला फिर सियासत में उलझा, सुप्रीम कोर्ट पहुंची AAP-कांग्रेस

दिल्ली सरकार इस मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करने जा रही है. वहीं कांग्रेस नेता अजय माकन और महाबल मिश्रा ने भी याचिकाएं दाखिल की हैं. दिल्ली सरकार कोर्ट को यह बताएगी कि बिना वैकल्पिक इंतजाम किए रेलवे ट्रैक्स के आसपास बसे परिवारों को उजाड़ा नहीं जा सकता है.

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दिल्ली में रेल लाइन किनारे बसी बस्तियां (फोटो-पीटीआई)
दिल्ली में रेल लाइन किनारे बसी बस्तियां (फोटो-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • झुग्गियों को बचाने SC पहुंची पार्टियां
  • सुप्रीम कोर्ट ने झुग्गियां हटाने का दिया है आदेश
  • रेल पटरियों के किनारे 48000 झुग्गियां

दिल्ली में रेलवे पटरियों के आसपास बनी झुग्गियों को खाली करने के आदेश ने राजनीतिक हलके में खलबली मचा दी है. इन झुग्गियों में सालों से लाखों लोग रह रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सभी राजनीतिक दल इस मामले में सक्रिय हो गए हैं. सुप्रीम कोर्ट से आए इस आदेश को बदलवाने के लिए कई दलों के नेता सर्वोच्च न्यायालय की चौखट पर पहुंच रहे हैं. दरअसल इन झुग्गियों में 2.5 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं. इस वोट बैंक पर हर पार्टी की नजर है.

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दिल्ली सरकार इस मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करने जा रही है. वहीं कांग्रेस नेता अजय माकन और महाबल मिश्रा ने भी याचिकाएं दाखिल की हैं. दिल्ली सरकार दिल्ली शहरी आश्रय विकास बोर्ड और दूसरे कानूनों की आड़ लेकर कोर्ट को यह बताएगी कि बिना वैकल्पिक इंतजाम किए रेलवे ट्रैक्स के आसपास बसे परिवारों को उजाड़ा नहीं जा सकता है.

बोर्ड ने चिट्ठी लिखकर सरकार को बताया है कि दूसरी जगह वैकल्पिक आवास का इंतजाम तो है लेकिन अन्य सुविधाओं के लिए दिसंबर तक मोहलत दी जाए. साथ ही बोर्ड ने यह भी साफ कर दिया है कि सुल्तानपुरी इलाके में 1060 फ्लैट्स ही बने हैं जिन्हें दिसंबर तक रहने लायक बनाया जा सकता है. बाकी इंतजाम के लिए मार्च 2021 तक मोहलत दी जाए और तब तक झुग्गियां ना ढहाई जाए.

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सुप्रीम कोर्ट ने तीन सितंबर को आदेश दिया था कि तीन महीने के भीतर नई दिल्ली में 140 किलोमीटर लंबी रेल पटरियों के आसपास की लगभग 48,000 झुग्गी-झोपड़ियों को हटाया जाए. 

रेलवे की दलील थी कि राजनीतिक दखलंदाज़ी की वजह से दशकों से ये काम नहीं हो पा रहा है. इससे आए दिन दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं और रेलवे अपनी जमीन का उपयोग भी नहीं कर पा रहा है. इसके बाद कोर्ट ने जमीन खाली कराने का आदेश दिया.  कोर्ट ने यह निर्देश भी दिया है कि कोई भी अदालत झुग्गी-झोपड़ियों को हटाने पर कोई स्टे नहीं देगी. 

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा है कि रेलवे लाइन के आसपास अतिक्रमण के संबंध में यदि कोई अदालत अंतरिम आदेश जारी करती है तो यह प्रभावी नहीं होगा. सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश एम सी मेहता मामले में पारित किया है जिसमें सुप्रीम कोर्ट 1985 के बाद से दिल्ली और उसके आसपास प्रदूषण से संबंधित मुद्दों पर समय-समय पर आदेश जारी करती रहती है.

रेलवे ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि दिल्ली एनसीआर में 140 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन के साथ झुग्गीवासियों का अतिक्रमण हैं जिसमें 70 किलोमीटर लाइन पर अतिक्रमण बहुत ज्यादा है.  

रेलवे ने कहा कि एनजीटी ने अक्टूबर 2018 में आदेश दिया था जिसके तहत इन झुग्गी बस्ती को हटाने के लिए स्पेशल टास्क फ़ोर्स का गठन किया था लेकिन राजनैतिक दखलंदाजी के चलते रेलवे लाइन के आसपास का यह अतिक्रमण हटाया नहीं जा सका है. 

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सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में जोर देकर कहा है कि रेलवे लाइन के आसपास अतिक्रमण हटाने के काम में किसी भी तरह के राजनैतिक दबाव और दखलंदाजी को बर्दाश्त नहीं किया जाएग. 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कोर्ट द्वारा दिल्ली की रेलवे लाइन के आस पास बसे 48 हजार झुग्गियों को हटाने के फैसले को चुनौती दी है. उन्होंने याचिका में कहा है कि कोर्ट के इस फैसले से करीब 2 लाख 50 हज़ार लोग प्रभावित होंगे.

याचिका में ये भी दलील है कि कोर्ट ने आदेश देते वक्त न झुग्गियों में रहने वालों का पक्ष सुना और न ही उनके प्रतिनिधियों का. ऐसे में ढाई लाख लोग एक झटके में बेघर हो जाएंगे.

बाहरी दिल्ली के पूर्व सांसद महाबल मिश्रा ने भी SC में याचिका दायर कर प्रभावित झुग्गी वासियों के पुनर्वास की व्यवस्था के लिए कोर्ट के आदेश में बदलाव की मांग की है.

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