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कॉलोनी में नाव, गर्दन भर पानी में डूबकर दूध लाते बच्चे... यमुना के पानी में घिरे दिल्ली के इलाकों की देखें जिंदगी

दिल्ली में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं. हरियाणा के हाथिनीकुंड बैराज से लाखों क्यूसेक पानी छोड़ने जाने से दिल्ली में यमुना खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. उसने 1978 का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है. यमुना का पानी दिल्ली के निचले इलाकों में भर गया है, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हो गया है.

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दिल्ली में यमुना नदी के जलस्तर ने 45 साल का रेकॉर्ड तोड़ दिया
दिल्ली में यमुना नदी के जलस्तर ने 45 साल का रेकॉर्ड तोड़ दिया

यमुना नदी के पानी से डूबे इलाके, गर्दन भर पानी में उतरकर दूध लाते बच्चे, गलियों में तैरते लोग, कॉलोनियों में चली नाव, सिर पर भारी-भरकम सामना उड़ाकर सुरक्षित जगह पर जाते लोग... देश की राजधानी दिल्ली का इन दिनों यही हाल है...

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बारिश का पानी दिल्लीवासियों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है. भीषण बारिश के कारण यमुना का जलस्तर बढ़ जाने से यहां कई निचले इलाके पानी में डूब गए हैं. मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी कर दिया है. अनुमान है कि 14-16 जुलाई को फिर से बारिश हो सकती है, ऐसे में बाढ़ का खतरा और बढ़ सकता है.

दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर आज सुबह 9 बजे पुराना रेलवे पुल पर 207.32 मीटर दर्ज किया गया था, जो 1 बजे बढ़कर 207.55 मीटर हो गया है. यमुना के जलस्तर ने सुबह 10 साल का रेकॉर्ड तोड़ दिया था अब इसने 45 साल का रेकॉर्ड तोड़ दिया है. 6 सितंबर 1978 को यमुना का अधिकतम फ्लड लेवल 207.49 मीटर दर्ज किया गया था. 

सुरक्षित जगह पर जा रहे लोग

इसलिए यमुना में बढ़ गया जलस्तर

हरियाणा के यमुनानगर में बने हाथिनीकुंड बैराज से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण यमुदा का जलस्तर बढ़ रहा है. आज सुबह 9 बजे भी बैराज से 1 लाख 53 हजार 768 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है. मंगलवार शाम को 7 बजे बैराज से 2 लाख 42 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जिससे यमुना नदी का जलस्तर बढ़कर 206.69 मीटर हो गया था. फिलहाल नदी के उफान को कम करने के लिए ओखला बैराज के सभी दरवाजे खोल दिए गए हैं.

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कश्मीरी गेट के मोंस्टी मार्केट, रिंग रोड, यमुना घाट, यमुना बाजार इलाके में बाढ़ का पानी पहुंच गया है. यहां का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि गलियों में घटनों तक पानी बह रहा है. कश्मीरी गेट में गौशाला में यमुना नदी का पानी घुस गया है. आईटीओ पर छठ घाट पानी में पूरी तरह डूब गया है. यमुना नदी से सटे इलाके बहुत संवेदनशील हैं. इन इलाकों में करीब 41 हजार लोग रहते हैं.

पानी को रोकने के लिए बोरियां लगाई गईं

लोगों के लिए बनाए गए 2700 टेंट

दिल्ली सरकार के विकास मंत्री गोपाल राय के मुताबिक प्रभावित लोगों के लिए दिल्ली के 6 जिलों में करीब 2700 टेंट बनाए गए हैं. इन टेटों में रहने के लिए अभी तक 27,000 लोगों रजिस्ट्रेशन किया गया है. इस समय राजघाट डीटीसी डिपो में बने राहत शिविरों में 126 लोग रह रहे हैं. ईस्ट डिस्ट्रिक्ट में सबसे ज्यादा लगभग 1700 टेंट, तो नॉर्थ ईस्ट और साउथ में 150 से 200 टेंट लगाए गए हैं. वहीं राहत और बचाव कार्य के लिए 45 नावों को तैनात किया गया है. 

पानी में तैर रहे लोग

यहां बनाए गए हैं राहत शिविर

जानकारी के मुताबिक प्रभावित इलाकों से लोगों को निकालकर अक्षरधाम, गुलमोहर पार्क, चिल्ला से एनएच-24 तक, डीएनडी से निजामुद्दीन फ्लाइओवर और यमुना बैंक से आईटीओ पुल तक बने राहत शिविरों में शिफ्ट कर दिया गया है. इसके अलावा नोएडा-दिल्ली लिंक रोड पर भी राहत शिविर लगाए गए हैं. खादर की झुग्गियों से करीब 27 हजार लोगों को राहत शिविरों में शिफ्ट कर दिया गया है.

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चल रही नाव

8 जुलाई को टूटा 41 साल का रिकॉर्ड

मौसम विभाग के मुताबिक 8 जुलाई को दिल्ली-एनसीआर में हुई भारी बारिश ने 41 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया था. 1982 के बाद से जुलाई में एक दिन में सबसे ज्यादा 153 मिमी बारिश हुई है. इससे पहले 25 जुलाई 1982 को 169.9 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई थी. साल 2003 में 24 घंटे में 133.4 मिमी बारिश हुई थी. वहीं, 2013 में दिल्ली में 123.4 मिमी बारिश हुई थी.

घरों में घुस गया पानी

यह वक्त एक-दूसरे पर उंगुली उठाने का नहीं: केजरीवाल

सीएम अरविंद केजरीवाल का कहना है कि वह केंद्रीय जल आयोग के संपर्क में हैं और ऐसी उम्मीद है कि बाढ़ जैसी स्थिति पैदा नहीं होगी. यह वक्त एक दूसरे पर उंगुली उठाने का नहीं है. सभी राज्यों की सरकार को जनता को राहत देने के लिए एकसाथ मिलकर काम करने की जरूरत है. दिल्ली की पीडब्ल्यूडी मंत्री आतिशी ने कहा था कि दिल्ली में यमुना का जलस्तर आगामी मंगलवार को डेंज मार्क से ऊपर चला जाएगा.

दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा

यमुना से हर साल निकाली जानी चाहिए गाद: LG

दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने पिछले दिनों यमुना बाजार इलाके का दौरा करने के बाद कहा कि दिल्ली की जनता हर साल होने वाले जलभराव से परेशान है. उनका आरोप है कि यमुना से गाद निकालने का काम नियमित रूप से किया जाना चाहिए, लेकिन ये सफाई नहीं होती, जिसकी वजह से जलभराव होता है. प्रकृति नहीं बताती, हमें पहले से ही इसके लिए तैयार रहना होगा. 


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