आम आदमी पार्टी की मुश्किलें कम होती नज़र नहीं आ रही है. रोज पार्टी के साथ एक नया विवाद जुड़ता जा रहा है. संजय सिंह, सुशील गुप्ता और नारायण दास गुप्ता के हलफनामे ने विरोधियों को अरविंद केजरीवाल पर सवाल खड़े करने का एक नया मौका दे दिया है. हालांकि पार्टी के तमाम नेता विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज भी कर रहे हैं.
बता दें कि संजय सिंह ने राज्यसभा के लिए 4 जनवरी को नामांकन दाखिल किया था. इस दौरान सिंह के हलफनामे की जानकारी ने सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोरी थी. 'आजतक' के पास मौजूद हलफनामे में संजय सिंह ने अपनी कुल आय 224 रुपये बताई है.
हालांकि खुद संजय सिंह ने 'आजतक' से बातचीत करते हुए कहा "मेरी संपत्ति का विरोध किया जा रहा है, हलफनामे में 224 रुपए की जो आय लिखी है वो बैंक का ब्याज है." आम आदमी पार्टी के राज्यसभा उम्मीदवार संजय सिंह का कहना है कि आम आदमी पार्टी ईमानदारी पर यकीन रखती है, जबकि कांग्रेस और बीजेपी सिर्फ विरोध करने का मौका तलाशती रहती हैं.
संजय सिंह ने नामांकन पर दावा करते हुए कहा कि "सिर्फ 3 उम्मीदवार हैं तो विधायकों के समर्थन की ज़रूरत नहीं पड़ेगी और 8 तारीख को इसकी घोषणा भी हो जाएगी." कुमार विश्वास का नाम कटने पर संजय सिंह ने कहा कि पार्टी ने देश के 18 प्रतिष्ठित लोगों से संपर्क किया था. लेकिन इस लिस्ट में संजय सिंह, कुमार विश्वास, एनडी गुप्ता और सुशील गुप्ता नहीं थे. इस तरह की बातों पर मैं कभी टिप्पणी नहीं करता हूं. कुमार विश्वास से पूछिए कि वो पार्टी प्लेटफॉर्म पर बात क्यों नही रखते हैं".
बता दें, कि कांग्रेस छोड़कर आम आदमी पार्टी से राज्यसभा में डायरेक्ट एंट्री पाने वाले सुशील गुप्ता का भी संजय सिंह ने बचाव किया है. सिंह ने बीजेपी और कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि राज्यसभा के बाकी दो चेहरों के खिलाफ कोई सबूत है तो दिखाइए, सिर्फ बयान देने से काम नहीं चलता. सुशील गुप्ता ने मानहानि का केस किया है, विरोधी उसका जवाब दें.'
पार्टी के उम्मीदवारों पर आरोप लगा रहीं विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए संजय सिंह ने यह तक कह डाला कि जो पार्टी आरोप लगा रही है, उसने तो करोड़ों के लुटेरे विजय माल्या को राज्यसभा में भेजा था. सिंह का आरोप है कि बीजेपी और कांग्रेस पूंजीपतियों के हाथ में खेल रही है और देश की अर्थव्यवस्था को भी चौपट कर दिया है.